लव कुश रामलीला 2026: श्रीराम ने तोड़ा शिव धनुष, सीता स्वयंवर और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का भव्य मंचन
लालकिला मैदान में लव कुश रामलीला के तीसरे दिन शिव धनुष भंग और सीता स्वयंवर का भव्य मंचन, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले सहित कई गणमान्य अतिथि पहुंचे

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रामायण के इतिहास में भगवान श्रीराम द्वारा भगवान शिव के विशाल धनुष को भंग करने का प्रसंग मर्यादा, शक्ति और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है। मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री माता सीता के स्वयंवर में यह शर्त रखी थी कि जो वीर भगवान शिव के दिव्य धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा, उसी के साथ सीता का विवाह किया जाएगा। स्वयंवर में अनेक शक्तिशाली राजा आए, लेकिन कोई भी धनुष को हिला तक नहीं सका। अंततः गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम आगे बढ़े और सहजता से शिव धनुष उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे। इसी दौरान धनुष टूट गया और माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार किया।
इसी ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंग का भव्य मंचन देश-विदेश में विख्यात लव कुश रामलीला कमेटी द्वारा लालकिला मैदान में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन किया गया। भगवान श्रीराम के हाथों शिव धनुष टूटते ही पूरा रामलीला परिसर ‘सियावर रामचंद्र की जय’ और ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा। दर्शकों की तालियों और श्रद्धालुओं के उत्साह ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सीता स्वयंवर में राजाओं की चुनौती, श्रीराम ने सहजता से तोड़ा धनुष

लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि सीता स्वयंवर के दौरान विभिन्न देशों से आए शक्तिशाली राजाओं ने अपने-अपने अंदाज में भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने और उसे भंग करने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका। राजाओं की लगातार असफलता से निराश राजा जनक ने व्यथित होकर कहा कि क्या पृथ्वी वीरों से खाली हो गई है?
राजा जनक के इन शब्दों के बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम आगे बढ़े। उन्होंने बिना किसी अहंकार और कठिनाई के शिव धनुष उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष भंग हो गया। धनुष टूटने की गूंज के साथ ही रामलीला परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इसके बाद माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उनका वरण किया।
ढोल-नगाड़ों और रोशनी के बीच विवाह प्रसंग का भव्य मंचन
शिव धनुष भंग और सीता स्वयंवर के दृश्य को आकर्षक मंच सज्जा, रंग-बिरंगी रोशनी, ताजे फूलों से सजे मंच और प्रभावशाली ध्वनि व्यवस्था के बीच प्रस्तुत किया गया। श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग के दौरान ढोल-नगाड़े बजे और मिठाइयां बांटकर उत्सव मनाया गया। इस भव्य प्रस्तुति को देखने के लिए बड़ी संख्या में रामभक्त और दर्शक रामलीला मैदान पहुंचे।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बढ़ाया रोमांच
शिव धनुष टूटने की आवाज सुनकर भगवान परशुराम राजा जनक के दरबार में पहुंच गए। धनुष भंग होने से क्रोधित परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखे संवादों का प्रभावशाली मंचन किया गया। लक्ष्मण के निर्भीक और व्यंग्यपूर्ण जवाबों से परशुराम का क्रोध लगातार बढ़ता गया। दोनों के बीच हुए संवादों ने दर्शकों में रोमांच पैदा कर दिया और लोग एकाग्र होकर मंचन देखते रहे।
इस तनावपूर्ण प्रसंग में भगवान श्रीराम ने अपनी विनम्रता, संयम और मधुर वाणी से परशुराम को शांत करने का प्रयास किया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय और संवाद अदायगी ने रामायण के इस महत्वपूर्ण प्रसंग को जीवंत कर दिया। इस दृश्य के माध्यम से दर्शकों को शक्ति के साथ विनम्रता, धैर्य और मर्यादा के महत्व का संदेश भी मिला।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले सहित कई गणमान्य अतिथि पहुंचे
कमेटी के महासचिव सुभाष गोयल ने बताया कि रामलीला के तीसरे दिन केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने लालकिला मैदान पहुंचकर मंचन का अवलोकन किया। उन्होंने रामलीला के आयोजन और भव्य प्रस्तुतियों की सराहना की।
सुभाष गोयल ने कहा कि लव कुश रामलीला कमेटी का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, आकर्षक मंच सज्जा और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से नई पीढ़ी तक भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और रामायण की शिक्षाओं को पहुंचाना है। कमेटी लगातार प्रयास कर रही है कि युवा पीढ़ी भारतीय धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े तथा भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य, मर्यादा, विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को अपनाए।

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