Shardiya Navratri 2026: दिल्ली के झण्डेवाला देवी मंदिर में माँ चंद्रघंटा की पूजा, जानें मंदिर की खास व्यवस्थाएं
300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से मंदिर परिसर की निगरानी, आरती और धार्मिक कार्यक्रमों का हो रहा सीधा प्रसारण

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माँ भगवती के नौ स्वरूपों में तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी सुशोभित होती है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। माँ का यह स्वरूप साहस, शक्ति, शांति और कल्याण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि माँ चंद्रघंटा की आराधना करने से भक्तों के भय और बाधाएं दूर होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
नई दिल्ली स्थित प्राचीन शक्तिपीठ झण्डेवाला देवी मंदिर में शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन माँ भगवती के इसी दिव्य स्वरूप की पूजा-अर्चना पूर्ण विधि-विधान के साथ की गई। मंदिर में श्रद्धालुओं ने माँ के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से सुरक्षा व्यवस्था पर नजर
नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इनके माध्यम से मंदिर में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रहे।
मंदिर में बनाए गए नियंत्रण कक्ष से सुरक्षा विभाग के सेवादार और पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों के साथ मिलकर पूरे परिसर की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और नवरात्र के दौरान बढ़ने वाली भीड़ का बेहतर प्रबंधन करना है।
घर बैठे भी कर सकते हैं माँ के दर्शन

झण्डेवाला देवी मंदिर में प्रतिदिन होने वाली आरती और धार्मिक कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मंदिर के आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल, फेसबुक पृष्ठ, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रतिदिन प्रातः 4 बजे तथा शाम 7 बजे की आरती का सीधा प्रसारण किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, प्रातःकाल से लेकर मध्यरात्रि तक आयोजित होने वाले विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का प्रसारण भी किया जाता है। इससे वे श्रद्धालु भी माँ भगवती के दर्शन और पूजा-अर्चना से जुड़ सकते हैं, जो किसी कारणवश मंदिर नहीं पहुंच पाते।
मेहंदी केंद्र पर कन्याएं दे रही हैं सेवाएं
नवरात्र के अवसर पर मंदिर में दर्शन के लिए आने वाली महिलाओं और युवतियों के लिए मेहंदी लगाने की व्यवस्था भी की गई है। मंदिर के मेहंदी केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही कन्याएं प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्रद्धालु महिलाओं के हाथों पर मेहंदी लगाती हैं। इस पहल से कन्याओं को अपने हुनर को निखारने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर भी मिलता है।
पर्यावरण अनुकूल पौधों का स्टाल बना आकर्षण
मंदिर परिसर में सेवा भारती की ओर से लगाया गया वाटिका स्टाल भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां पर्यावरण के अनुकूल तथा घरों और आसपास के स्थानों की सजावट के लिए विभिन्न प्रकार के पौधे उचित कीमतों पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल के माध्यम से पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क चाय और शर्बत की व्यवस्था की गई है। मदर डेयरी की ओर से लगाए गए उत्पाद स्टाल पर भी भक्तों को विशेष छूट दी जा रही है। इन सुविधाओं से मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सहूलियत मिल रही है।

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