IRFC-2026 का झांसी में समापन, चारा सुरक्षा को लेकर वैज्ञानिकों और किसानों ने साझा किए सुझाव
कृषि वानिकी और वैकल्पिक भू-उपयोग से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व ग्रामीण आजीविका मजबूत करने पर चर्चा

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झांसी, संवाददाता। ग्रासलैण्ड, झांसी में तीन दिनों से चल रहे अंतरराष्ट्रीय चरागाह एवं चारा सम्मेलन (IRFC-2026) का शुक्रवार को समापन हो गया। सम्मेलन के अंतिम दिन चारा सुरक्षा, टिकाऊ भू-उपयोग, कृषि वानिकी, किसानों के अधिकार और चारा फसलों की किस्मों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, प्रजनकों और किसान प्रतिनिधियों ने विचार साझा किए।
अंतिम दिन वैकल्पिक भू-उपयोग प्रणालियों और कृषि वानिकी के माध्यम से टिकाऊ एवं लचीले भू-दृश्यों के विकास विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ। ICAR-CAFRI के पूर्व निदेशक एवं ICRAF के देशीय प्रतिनिधि डॉ. एस.के. ध्यानी ने कृषि वानिकी और वैकल्पिक भू-उपयोग प्रणालियों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
किसानों और प्रजनकों के अधिकारों पर विशेष चर्चा
सम्मेलन में सामाजिक-आर्थिक पहलुओं, नीतियों, शासन व्यवस्था और संस्थागत भूमिका से जुड़े विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसके अलावा पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) के विशेष सत्र में किसानों के अधिकार और चारा फसलों की किस्मों का संरक्षण विषय पर विस्तार से चर्चा हुई।
सत्रों में किसानों और प्रजनकों के अधिकार, किसानों की भागीदारी से चारा बीज उत्पादन, चारा फसलों की किस्मों का संरक्षण तथा चारा बीज क्षेत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। चर्चा में वैज्ञानिकों, प्रजनकों, नीति निर्माताओं और किसान प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा चारा क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए।
सम्मेलन की प्रमुख अनुशंसाएं प्रस्तुत
समापन समारोह में UPCAR के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, PPVFRA के रजिस्ट्रार जनरल डॉ. डी.के. अग्रवाल, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. सिंह, ICAR-CAFRI के निदेशक डॉ. आर.एस. यादव तथा ICAR-IGFRI के निदेशक डॉ. पंकज कौशल सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सम्मेलन के दौरान हुई वैज्ञानिक चर्चाओं के आधार पर प्रमुख अनुशंसाएं प्रस्तुत की गईं। साथ ही उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति और सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति पुरस्कार प्रदान किए गए।
टिकाऊ चारा व्यवस्था के लिए बेहतर समन्वय पर जोर
तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन RMSI, झांसी के सचिव के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिन हुई चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि चारा सुरक्षा केवल चारा उत्पादन बढ़ाने का विषय नहीं है, बल्कि इसमें किसान, वैज्ञानिक, नीतियां, संस्थाएं और प्राकृतिक संसाधन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से टिकाऊ चारा व्यवस्था विकसित करने, पशुधन क्षेत्र को मजबूत बनाने और ग्रामीण आजीविका को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सम्मेलन में हुई वैज्ञानिक चर्चाओं और प्रस्तुत अनुशंसाओं को चरागाह एवं चारा क्षेत्र के भविष्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार माना गया।

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