त्रिनगर में पर्यूषण-संवत्सरी महापर्व की आराधना, मुनि महाराज उपेंद्र ने दिया अहिंसा का संदेश
मुनि महाराज उपेंद्र ने साधु-संतों के प्रति सम्मान, सात्विक आहार और जीवदया अपनाने का किया आह्वान।

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त्रिनगर स्थित समुदाय भवन में एसएस. जैन सभा के तत्वावधान में अष्ट दिवसीय पर्यूषण-संवत्सरी महापर्व आराधना का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में किया जा रहा है। मुनि महाराज उपेंद्र के सान्निध्य में आयोजित यह आठ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम 8 से 15 सितंबर 2026 तक चलेगा।
कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे से 10:00 बजे तक श्रद्धालुओं को तप, तपस्या, अमन तपस्या, संयम और अहिंसा के महत्व पर विस्तार पूर्वक प्रवचन दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही जैन समाज के प्रमुख ग्रंथ के ग्यारह अध्यायों का अध्ययन एवं वाचन भी आठ दिनों में पूर्ण किया जाएगा।

इसी क्रम में शुक्रवार, 11 सितंबर को प्रातः 8:30 बजे मुनि महाराज उपेंद्र ने उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए साधु-संतों के प्रति सम्मान, जीवदया और अहिंसा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि साधु-संत किसी के तिरस्कार या अपमान के बावजूद उसे श्राप नहीं देते, क्योंकि उनका उद्देश्य ईश्वर की प्राप्ति और आत्मकल्याण होता है।
मुनि महाराज ने कहा कि साधु-संत अपना जीवन यापन करने के लिए भोजन की याचना करते हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास भोजन उपलब्ध है तो उसे श्रद्धा पूर्वक भोजन प्रदान करना चाहिए। यदि किसी कारणवश भोजन देने की स्थिति न हो तो विनम्रतापूर्वक हाथ जोड़ देना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से साधु-संतों के प्रति सदैव सम्मान और करुणा का भाव रखने का आह्वान किया।
उन्होंने लोगों से मांस, अंडे और अन्य हिंसक आहार से दूरी बनाए रखने की अपील करते हुए अहिंसक एवं सात्विक जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने फैक्टरी मालिकों से भी आग्रह किया कि यदि संभव हो तो अपने घरों में गाय का पालन करें। उन्होंने कहा कि यदि घर में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है तो फैक्टरी परिसर में एक मशीन कम लगाकर उस स्थान पर गाय पालने का प्रयास किया जा सकता है। गाय के दूध का उपयोग परिवार में करने की भी उन्होंने प्रेरणा दी।
अमन तपस्या के महत्व को समझाते हुए मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं से पूजा-अर्चना के साथ-साथ सादा एवं सात्विक भोजन ग्रहण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि तप, संयम और सरल जीवन मनुष्य को आत्मिक शांति की ओर ले जाते हैं।
प्रवचन के अंत में मुनि महाराज उपेंद्र ने श्रद्धालुओं को ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का संदेश देते हुए नमोकार मंत्र के माध्यम से आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धार्मिक प्रवचनों का लाभ उठाया।

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