भारत की पवन ऊर्जा क्षमता ने बनाया रिकॉर्ड, Windergy India 2026 में दिखेगा वैश्विक विस्तार का रोडमैप
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने जोड़ी 6.05 गीगावाट पवन क्षमता, कुल स्थापित क्षमता 58.14 गीगावाट हुई

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भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र अब केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से एक बड़े औद्योगिक, विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। देश में पवन ऊर्जा की बढ़ती क्षमता, घरेलू विनिर्माण और वैश्विक स्तर पर बढ़ते निर्यात की झलक विंडर्जी इंडिया 2026 में देखने को मिलेगी। पवन ऊर्जा क्षेत्र के इस प्रमुख मंच का आठवां संस्करण 7 से 9 अक्टूबर 2026 तक चेन्नई ट्रेड सेंटर में आयोजित किया जाएगा।
पवन ऊर्जा क्षमता में भारत का रिकॉर्ड प्रदर्शन
विंडर्जी इंडिया 2026 ऐसे समय में आयोजित हो रहा है, जब भारत ने पवन ऊर्जा क्षेत्र में अब तक का सर्वश्रेष्ठ वार्षिक प्रदर्शन दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 6.05 गीगावाट नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी। इसके साथ ही 31 जुलाई 2026 तक भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 58.14 गीगावाट हो गई है।
भारत अब वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर साल करीब 10 गीगावाट नई क्षमता जोड़ने की आवश्यकता होगी। इंडियन विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) के अनुसार, वर्तमान में करीब 43 गीगावाट की पवन ऊर्जा परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। वहीं, 150 मीटर हब ऊंचाई पर भारत की अनुमानित पवन ऊर्जा क्षमता करीब 1,164 गीगावाट आंकी गई है।
2030 तक 100 गीगावाट, 2035 तक 155 गीगावाट का लक्ष्य
IWTMA के मानद सचिव एवं सुजॉन एनर्जी लिमिटेड के अध्यक्ष- कॉर्पोरेट अफेयर्स एवं रिटेल बिजनेस, दिनेश जगदाते ने कहा कि भारत का पवन ऊर्जा क्षेत्र एक उभरते उद्योग से 58 गीगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता वाले मजबूत क्षेत्र में बदल चुका है। उन्होंने कहा कि देश का विनिर्माण आधार अब वैश्विक बाजारों के लिए पवन टर्बाइनों का निर्यात कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आगे की दिशा स्पष्ट है—2030 तक 100 गीगावाट और 2035 तक 155 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निर्माताओं, डेवलपर्स, नीति निर्माताओं और नवाचार से जुड़े पक्षों को मिलकर काम करना होगा।
घरेलू विनिर्माण बना पवन ऊर्जा क्षेत्र की रीढ़

भारत में पवन ऊर्जा उपकरणों का घरेलू विनिर्माण भी तेजी से बढ़ा है। घरेलू टरबाइन विनिर्माण क्षमता वर्ष 2014 में करीब 10 गीगावाट प्रतिवर्ष थी, जो अब बढ़कर 24 गीगावाट प्रतिवर्ष हो गई है। इस क्षेत्र में करीब 70-80 प्रतिशत घरेलू मूल्यवर्धन हो रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से पवन ऊर्जा उपकरणों का निर्यात 12,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले स्तर की तुलना में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। इससे भारत के वैश्विक पवन ऊर्जा आपूर्ति केंद्र के रूप में मजबूत होने का संकेत मिलता है।
इसी दिशा में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने IWTMA के सहयोग से भारत का पहला पवन ऊर्जा आपूर्ति-श्रृंखला पोर्टल WT-MARUT भी लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य भारत को तेज कार्यान्वयन वाले घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक पवन ऊर्जा विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में मजबूत करना है।
भारत को वैश्विक पवन ऊर्जा निर्यात केंद्र बनाने पर जोर
एनविजन एनर्जी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के ग्लोबल बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख एवं IWTMA के कार्यकारी सदस्य सुमन नाग ने कहा कि पवन ऊर्जा क्षेत्र की मौजूदा स्थिति इसकी परिपक्वता को दर्शाती है। निर्यात केंद्रित कंपनियां भारत से विनिर्माण और वैश्विक बाजारों को निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक पवन ऊर्जा विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में मजबूत करने से देश के व्यापक निर्यात लक्ष्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
ऊर्जा संक्रमण के साथ औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र पर जोर
दिल्ली में आयोजित विंडर्जी इंडिया 2026 के कर्टेन रेज़र कार्यक्रम में MNRE के संयुक्त सचिव राजेश कुलहरी ने कहा कि भारत का ऊर्जा संक्रमण अब केवल मेगावाट क्षमता जोड़ने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य ऐसा संपूर्ण औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है, जो कुशल रोजगार पैदा करे, विनिर्माण और निर्यात को गति दे तथा देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करे।
उन्होंने कहा कि पवन ऊर्जा के विस्तार से आयातित और अस्थिर जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने तथा ऊर्जा प्रणाली की लागत घटाने में भी मदद मिलेगी।
टैरिफ और ऊर्जा लागत भी एजेंडे में
विंडर्जी इंडिया 2026 में पवन ऊर्जा परियोजनाओं की व्यवहार्यता, टैरिफ और ऊर्जा लागत जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होगी। उद्योग जगत का मानना है कि अब केवल कम टैरिफ हासिल करना पर्याप्त नहीं है। समय पर बिजली खरीद समझौते (PPA), ट्रांसमिशन नेटवर्क की तैयारी और बेहतर बोली संरचनाएं परियोजनाओं की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
भारत अब केवल स्टैंडअलोन पवन और सौर परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। पवन-सौर हाइब्रिड, स्टोरेज आधारित परियोजनाओं तथा फर्म और डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) की खरीद की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
लॉजिस्टिक्स दक्षता से तेज होगा परियोजनाओं का क्रियान्वयन
पवन ऊर्जा उपकरणों के विनिर्माण और निर्यात के लिए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बेहद महत्वपूर्ण है। बड़े आकार के पवन टरबाइन और उनके घटकों की आवाजाही में रूट प्लानिंग, परमिट, भारी उपकरणों की ढुलाई, वेयरहाउसिंग और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता जैसी चुनौतियां सामने आती हैं।
समयबद्ध और भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स पवन ऊर्जा परियोजनाओं के निर्माण के साथ-साथ उनके संचालन और रखरखाव के लिए भी जरूरी है। इस क्षेत्र में डिजिटलीकरण और रियल-टाइम ट्रैकिंग प्रणालियां आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
रिपावरिंग से बढ़ेगी पवन ऊर्जा की क्षमता
भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र में रिपावरिंग यानी पुराने पवन टरबाइनों को आधुनिक और अधिक क्षमता वाले टरबाइनों से बदलना भी बड़ा अवसर माना जा रहा है। उच्च पवन क्षमता वाले क्षेत्रों में भारत में 19,000 से अधिक पुराने सब-मेगावाट पवन टरबाइनों का बेड़ा मौजूद है।
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से इन पुराने टरबाइनों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। पुराने टरबाइनों का क्षमता उपयोग कारक (CUF) करीब 14-15 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 30 प्रतिशत तक किया जा सकता है। इससे मौजूदा भूमि और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग करते हुए पवन ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विंडर्जी इंडिया 2026 में जुटेंगे 20 हजार से अधिक प्रतिभागी
PDA Ventures प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीईओ प्रदीप देवड़ा ने कहा कि विंडर्जी इंडिया एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला और सम्मेलन होने के साथ-साथ संपूर्ण पवन ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को एक मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बन चुका है। भारत के क्षमता लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के साथ यह मंच उद्योग के विभिन्न हितधारकों को जुड़ने और सहयोग करने का अवसर देता रहेगा।
IWTMA और PDA Ventures प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित तथा विद्युत मंत्रालय और MNRE के समर्थन से होने वाले विंडर्जी इंडिया 2026 में 20,000 से अधिक प्रतिभागियों, 400 से अधिक प्रतिनिधियों और 30 से अधिक देशों के 350 प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है।
सुजॉन इंडिया इस आयोजन का प्लेटिनम पार्टनर है। वहीं एनविजन और केनकिओन गोल्ड पार्टनर तथा बेनडि और रेनका सिल्वर पार्टनर हैं। जर्मनी, डेनमार्क और स्पेन के देश-पवेलियन भी आयोजन का हिस्सा होंगे।
आयोजन के दौरान दो दिवसीय सम्मेलन ‘Wind-Powering India’s Energy Resilience’ के साथ-साथ पवन ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती कुशल कार्यबल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विशेष अकादमिक सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
IWTMA क्या है?
इंडियन विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IWTMA) भारत में पवन ऊर्जा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख उद्योग संगठन है। वर्ष 1998 में स्थापित IWTMA सरकारी संस्थानों, उद्योग जगत और वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर पवन ऊर्जा विकास, विनिर्माण और नीति संबंधी मुद्दों को आगे बढ़ाने का काम करता है। संगठन भारत को पवन ऊर्जा आधारित सतत और कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
PDA Ventures के बारे में
PDA Ventures प्राइवेट लिमिटेड, PDA Trade Fairs India प्राइवेट लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। कंपनी भारत में क्षेत्र-विशिष्ट बिजनेस-टू-बिजनेस व्यापार मेलों, सेमिनारों, फोरम और सम्मेलनों के आयोजन के क्षेत्र में सक्रिय है। बेंगलुरु मुख्यालय वाली कंपनी को समुद्री क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, ब्यूटी, फिटनेस, मीडिया, जैविक कृषि, बैंकिंग टेक्नोलॉजी, वुडवर्किंग, एयरपोर्ट्स और अन्य क्षेत्रों में विभिन्न व्यावसायिक मंच तैयार करने का दो दशकों से अधिक का अनुभव है।

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