भारत मंडपम बना ग्लोबल प्लास्टिक रीसाइक्लिंग हब, GCPRS-2026 का भव्य आगाज़
उद्योग, सरकार और वैज्ञानिकों ने सतत विकास के लिए साझा रणनीति पर किया मंथन

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम के हॉल संख्या-6 में गुरुवार को तीसरे ग्लोबल कॉन्क्लेव ऑन प्लास्टिक रीसाइक्लिंग एंड सस्टेनेबिलिटी (GCPRS-2026) का भव्य शुभारंभ हुआ। ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) द्वारा आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी में देश-विदेश के उद्योगपति, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ और प्लास्टिक रीसाइक्लिंग क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग के सचिव तेजवीर सिंह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्लास्टिक आज आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसके उपयोग के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व के अग्रणी प्लास्टिक रीसाइक्लिंग देशों में शामिल है, लेकिन अब केवल रीसाइक्लिंग की मात्रा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उद्योग को उच्च गुणवत्ता, वैल्यू एडिशन और अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग तकनीकों की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने केमिकल रीसाइक्लिंग, डिज़ाइन फॉर रीसाइक्लिंग, सर्कुलर इकोनॉमी और मोनो-मटेरियल पैकेजिंग जैसे आधुनिक समाधानों को अपनाने पर जोर दिया।
तेजवीर सिंह ने उद्योग जगत से अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निवेश बढ़ाने, सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने तथा अनौपचारिक कचरा संग्राहकों को औपचारिक व्यवस्था से जोड़ने की अपील की। उन्होंने सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय को समय की आवश्यकता बताया।
जीसीपीआरएस-2026 में 12 देशों के 250 से अधिक प्रदर्शक
एआईपीएमए के गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन अरविंद मेहता ने बताया कि जीसीपीआरएस का तीसरा संस्करण प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग के तेजी से संगठित और आधुनिक होते स्वरूप को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सम्मेलन में 12 देशों के 250 से अधिक प्रदर्शक नवीनतम तकनीकों और उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एआईपीएमए उद्योग की तकनीकी क्षमता बढ़ाने, कौशल विकास, रोजगार सृजन और भारतीय प्लास्टिक उत्पादों के निर्यात को कई गुना बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। साथ ही उन्होंने जीएसटी के माध्यम से उद्योग के औपचारिकीकरण की सराहना करते हुए सीपीसीबी पोर्टल और ईपीआर अनुपालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की मांग भी उठाई।
उद्योग और सरकार की साझेदारी से मिलेगा सतत विकास को बल
एआईपीएमए के अध्यक्ष सुनील शाह ने कहा कि यह आयोजन प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग को मजबूत बनाने और सतत विकास के लक्ष्यों को गति देने की दिशा में संस्था की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण, औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वहीं एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रभ दास ने कहा कि प्लास्टिक उद्योग का भविष्य नवाचार, तकनीकी उन्नयन और सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों को अपनाने में निहित है। उन्होंने कहा कि उद्योग और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी ही टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल विकास का आधार बनेगी।
आयोजन को सफल बनाने में इनकी रही अहम भूमिका
सम्मेलन के सफल आयोजन में हितेन भेडा, सिद्धार्थ शाह, कैलाश बी. मुरारका, हरेन सांघवी, चंद्रकांत तुरखिया, अनिल रेड्डी वेनाम, विपीन देसाई, मयूर के. शाह, सुनील मोंगा, वाई. वी. रमण, अशोक अग्रवाल और मनोज आर. शाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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