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Anti Paper Leak Bill 2026: पेपर लीक माफिया पर बड़ी चोट, लोकसभा से एंटी पेपर लीक संशोधन बिल 2026 को मंजूरी

5 से 10 साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक जुर्माना और संगठित अपराध पर 10 करोड़ रुपये तक की सजा का प्रावधान।

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-ओमकुमार
संसद लोकसभा में हंगामे के बीच बुधवार को एंटी पेपर लीक संशोधन बिल (लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026–The Public Examination (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill–2026) पास हो गया। लोकसभा में लंबी चर्चा के बाद ध्वनि मत से यह बिल पास हो गया है। इस बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर नोकझोंक भी हुई। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एंटी पेपर लीक बिल के पारित होने की घोषणा करने के बाद लोकसभा की कार्यवाही 30 जुलाई सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
लोकसभा में पारित हुए एंटी पेपर लीक बिल में अधिक सख्त सजा का प्रस्ताव है। इस कानून का मकसद ऐसे लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता पर बुरा असर पड़ता है।
एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक की मुख्य बातें क्या है?
1– देश के सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासनों को यह अधिकार देना कि वे प्रस्तावित कानून के तहत अपराधों के मामलों में सुनवाई के लिए किसी भी सत्र अदालत को विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत के तौर पर नामित कर सकें।
2– यह प्रावधान करना कि ऐसी विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों में कार्यवाही रोजाना के आधार पर हो और आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी हो जाए।
3– केंद्र सरकार को किसी भी अपराध की जांच के लिए विशेष कार्य बल बनाने का अधिकार देना।
4– यह प्रावधान करना कि कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी हो जाए।
5– सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को कानून के तहत मामलों को चलाने के लिए एक या अधिक विशेष सरकारी अभियोजक नियुक्त करने का अधिकार देना।
6– किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ में अपील करने की व्यवस्था करना, और अपील स्वीकार होने की तारीख से 3 महीने के भीतर उसका निपटारा करना।
7– नए कानून के तहत, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित तरीकों में शामिल पाए गए लोगों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल का कारावास काटना पड़ सकता है और उन पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
8– संगठित अपराधों के लिए, विधेयक में कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
वंही केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बिल पेश करते हुए कहा कि “इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा करने और सुझाव देने के बजाए विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा। यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता।”
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