56th Guru Vandana Mahotsav 2026: गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण का संदेश, 8 विभूतियां ‘श्रेष्ठ कला आचार्य अलंकरण’ से सम्मानित
गुरु-शिष्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान, ओम प्रकाश जैन बोले— संस्कारों से ही सुरक्षित रहेगी भारतीय संस्कृति

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भोपाल संवाददाता। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है और गुरु-शिष्य परंपरा हमारी सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर है। इंटरनेट और जेन-जी (Gen Z) के इस आधुनिक दौर में बच्चों को भारतीय संस्कारों और ऋषि परंपरा से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह बात मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम प्रकाश जैन ने शनिवार को आयोजित 56वें गुरु वंदना महोत्सव 2026 को संबोधित करते हुए कही।
भोपाल के मानस भवन में अभिनव कला परिषद की संस्था ‘मधुवन’ द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में कला, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों, साहित्यकारों और रचनाकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में कला जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों, जनप्रतिनिधियों और संस्कृति प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
गुरु-शिष्य परंपरा की विरासत को समर्पित रहा महोत्सव
इस वर्ष का गुरु वंदना महोत्सव 2026 कला और संस्कृति के तीन महान पुरोधाओं पंडित नंदकिशोर शर्मा, श्रद्धेय रमेशचंद्र अग्रवाल और पंडित सुरेश तांतेड़ की पुण्य स्मृति को समर्पित रहा। आयोजन का उद्देश्य इन विभूतियों के योगदान को स्मरण करते हुए गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था।
अपने संबोधन में ओम प्रकाश जैन ने कहा कि समर्पण ही वह गुण है जो गुरु और शिष्य को एक अटूट संबंध में बांधता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल युग में भी भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत बनाए रखने के लिए बच्चों में संस्कार, अनुशासन और गुरु के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना आवश्यक है।
8 विभूतियों को मिला ‘श्रेष्ठ कला आचार्य अलंकरण’
समारोह के दौरान कला की विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाली आठ प्रतिष्ठित विभूतियों को ‘श्रेष्ठ कला आचार्य अलंकरण’ से सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में आध्यात्मिक गुरु पंडित सुदेश शांडिल्य, गीतकार यतीन्द्रनाथ राही, छायाकार जगदीश कौशल, पद्मश्री लोकगायक कालूराम बामनिया, शास्त्रीय गायिका विदुषी शोभा चौधरी, मूर्ति शिल्पकार एवं चित्रकार देवीलाल पाटीदार, कला समीक्षक विनय उपाध्याय तथा रंगकर्मी रश्मि मुजुमदार शामिल रहे।
इसके अलावा कार्यक्रम की लोकप्रिय उद्घोषिका विशाखा राजुरकर को उनके जन्मदिवस के अवसर पर विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
कला, संस्कृति और साहित्य जगत की दिग्गज हस्तियों की रही उपस्थिति
समारोह में माधवराव सप्रे संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर, गुफा मंदिर के महंत प्रदीप दास, वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल, कला संरक्षक कमलेश जैमिनी, प्रख्यात सितार वादक स्मिता नागदेव, समाजसेवी गोपाल गोदानी और जवाहर कर्णावत सहित कई प्रतिष्ठित अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
गुरु ही कला और संस्कारों के संवाहक हैं
अभिनव कला परिषद के सचिव अतुल सुरेश तांतेड ने कहा कि गुरु वंदना महोत्सव केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की एक सशक्त सांस्कृतिक परंपरा है। उन्होंने कहा कि गुरु से प्राप्त ज्ञान, अनुशासन और संस्कार ही कला की परंपराओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जीवंत बनाए रखते हैं। ऐसे आयोजन कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ समाज में कला और संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ाते हैं।
गुरु परंपरा के संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम के संयोजक राम वल्लभाचार्य ने सभी अतिथियों, सम्मानित कलाकारों एवं कला प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु वंदना महोत्सव भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और कला साधना के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। यह आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रेरक संदेश देता है।

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