बरखा महोत्सव में गूंजे गजलों के सुर, श्रद्धा जैन की प्रस्तुति ने जीता कला प्रेमियों का दिल
अभिनव कला परिषद के आयोजन में सात कला साधकों को ‘अभिनव संगीत रत्न 2026’ सम्मान, 65 वर्षों से कला परंपराओं को बढ़ावा दे रही संस्था

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भोपाल, संवाददाता।
शहर में शनिवार शाम रिमझिम फुहारों के बीच आयोजित बरखा महोत्सव कला प्रेमियों के लिए यादगार बन गया। नृत्य, नाट्य और संगीत की अभिनव कलाओं को समर्पित 65 वर्ष पुरानी संस्था अभिनव कला परिषद की ओर से मानस भवन में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में कला रसिकों ने मशहूर गजलकारों की रचनाओं का संगीतमय आनंद लिया। मुंबई से आईं प्रसिद्ध गजल गायिका एवं संगीतकार श्रद्धा जैन ने अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान सात संगीत कला साधकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘अभिनव संगीत रत्न 2026’ सम्मान से सम्मानित किया गया।
सात कला साधकों को ‘अभिनव संगीत रत्न 2026’ सम्मान

बरखा महोत्सव की शुरुआत संगीत और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों के सम्मान समारोह से हुई। अभिनव कला परिषद की ओर से विभिन्न शहरों से आए सात कला साधकों को सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वाले कलाकारों में मुंबई की गजल गायिका एवं संगीतकार श्रद्धा जैन, इंदौर के तबला वादक पंडित हितेन्द्र दीक्षित, कथक नृत्यांगना डॉ. संतोष देसाई, भोपाल की शास्त्रीय गायिका भारती सिंह राजपूत, संतूर वादिका श्रुति अधिकारी, शास्त्रीय गायिका सुलेखा धरकर भट्ट और ध्रुपद गायिका सुरेखा कांबले शामिल रहीं।
इस अवसर पर सूचना आयुक्त राजेश भट्ट, शेखर करहाड़कर, डॉ. लता मुंशी, डॉ. मीरा दास और कला गुरु श्री श्रीधर व्यास सहित प्रदेश के कई प्रतिष्ठित कला साधक एवं कला रसिक मौजूद रहे।
अभिनव कला परिषद के सचिव अतुल सुरेश तांतेड़ ने कहा कि बरखा महोत्सव का उद्देश्य संगीत और कला की परंपराओं को प्रोत्साहित करना तथा कलाकारों को सम्मानजनक मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि परिषद पिछले 65 वर्षों से इस परंपरा का निरंतर निर्वहन कर रही है।
श्रद्धा जैन की गजल प्रस्तुति ने श्रोताओं को किया भावविभोर

सम्मान समारोह के बाद मुंबई से आईं गजल गायिका श्रद्धा जैन ने मशहूर गजलकारों की चुनिंदा रचनाओं की सुरमयी प्रस्तुति दी। उनकी आवाज में गजलों की भावनात्मक गहराई और संगीत की मधुरता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम में मरहूम गजलकार डॉ. बशीर बद्र की चर्चित गजल ‘होंठों पर मोहब्बत के फसाने नहीं आते’ के माध्यम से उन्हें याद किया गया। इसके बाद राजेश रेड्डी की गजल ‘रंग मौसम का था, पहले पेड़ ये कितना घना था पहले’ और हस्तीमल हस्ती की रचना ‘मुस्कुराए जा रहे हो, किसी से मिलकर आ रहे हो’ प्रस्तुत की गई।
श्रद्धा जैन ने जगजीत सिंह की लोकप्रिय गजल ‘होश वालों को खबर क्या’ को राग मेघ में प्रस्तुत कर श्रोताओं को संगीत की मधुर अनुभूति से सराबोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में शब्दों की संवेदना, सुरों की नजाकत और भावों की गहराई का प्रभाव दिखाई दिया।
उन्होंने ‘दिल के मेहमान बन जाइए’ तथा ‘था बाजारों में जिसका बोलबाला, हमारे पास वो सिक्का नहीं था’ जैसी गजलों के साथ तराना और शास्त्रीय बंदिश भी प्रस्तुत की। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम के माहौल को और अधिक संगीतमय बना दिया।
जीडी जोशी ने भी गजल गायन से बांधा समां
बरखा महोत्सव में शहर के गजल गायक जीडी जोशी ने भी अपनी प्रस्तुति दी। उनके गजल गायन ने श्रोताओं को संगीत की भावपूर्ण दुनिया से जोड़े रखा।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. विशाखा राजुरकर राज ने किया। भाषा की गहराई, सधी हुई आवाज और प्रभावी संचालन के माध्यम से उन्होंने पूरे आयोजन को गरिमापूर्ण बनाए रखा।

रिमझिम फुहारों के बीच आयोजित बरखा महोत्सव ने संगीत प्रेमियों को गजल, शास्त्रीय संगीत और कला साधना के विविध रंगों से रूबरू कराया। अभिनव कला परिषद की 65 वर्ष पुरानी परंपरा ने एक बार फिर कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

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