राष्ट्रीय गोधन दीपावली महोत्सव 2026: दिल्ली हाट जनकपुरी में जुटेंगे देशभर के गौसेवक और उद्यमी
1 से 7 नवंबर तक होने वाले आयोजन में प्राकृतिक खेती, पंचगव्य, जैविक खाद और गो आधारित उत्पादों का होगा प्रदर्शन, 400 स्टॉलों पर दिखेगा गो-आधारित स्वदेशी उत्पादों का संसार

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गोसंवर्धन को केवल संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय आत्मनिर्भरता, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय गोधन दीपावली महोत्सव 2026’ का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव 1 से 7 नवंबर 2026 तक दिल्ली हाट, जनकपुरी में आयोजित होगा। इसकी घोषणा नॉर्थ एवेन्यू स्थित सांसद क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में की गई।
प्रेस वार्ता में असम के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी, भारतीय किसान संघ के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष सतीश छिकारा, अशोक सचदेवा, पूर्व विधायक मदन लाल सहित विभिन्न सामाजिक और किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
गौ आधारित जीवन-पद्धति को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर

प्रो. जगदीश मुखी ने गोसंवर्धन को भारतीय जीवन-पद्धति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक संरचना में गौ आधारित जीवन-पद्धति का लंबे समय से विशेष महत्व रहा है। वर्तमान समय में पर्यावरण संकट, प्रदूषण और रासायनिक खेती से जुड़ी चुनौतियों के बीच प्राकृतिक और गौ आधारित जीवनशैली को एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
उन्होंने गौधन के संरक्षण और इसके उपयोग से जुड़े उत्पादों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए समाज के सभी वर्गों से इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी का रूप देने का आह्वान किया।
गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास

राष्ट्रीय गोधन महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक विजय खुराना ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र के रूप में देखना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगार सृजन करने वाली आर्थिक इकाइयों के रूप में विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल प्रदर्शनी और बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय परंपरा, संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों, प्राकृतिक जीवनशैली और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का व्यापक मंच बनेगा।
400 स्टॉलों पर प्रदर्शित होंगे गो आधारित उत्पाद
आयोजकों के अनुसार महोत्सव में करीब 400 स्टॉल लगाए जाएंगे। इनमें देश के विभिन्न हिस्सों की गौशालाओं, गोसेवकों और संस्थाओं द्वारा तैयार किए गए प्राकृतिक तथा गो आधारित उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा।
महोत्सव में गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पाद, पंचगव्य, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पाद तथा अन्य स्वदेशी वस्तुएं प्रमुख आकर्षण रहेंगी। इनके माध्यम से गौशालाओं के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा।
आधुनिक तकनीक से आत्मनिर्भरता के मॉडल होंगे प्रस्तुत
विजय खुराना ने बताया कि देश में करीब 22 हजार गौशालाएं हैं। इन्हें स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़कर ग्रामीण रोजगार और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। महोत्सव में आधुनिक तकनीक के माध्यम से गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के विभिन्न नमूने और मॉडल भी प्रस्तुत किए जाएंगे।
आयोजकों का कहना है कि महोत्सव का मुख्य आधार पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन रहेगा।
1966 के गोसंरक्षण आंदोलन के संतों को दी जाएगी श्रद्धांजलि
महोत्सव के दौरान 7 नवंबर 1966 के संसद मार्ग गोसंरक्षण आंदोलन में जान गंवाने वाले संतों को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी। इसके साथ ही देशभर के गौसेवकों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को महोत्सव में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
दिल्ली सरकार और विभिन्न संस्थाओं का सहयोग
राष्ट्रीय गोधन दीपावली महोत्सव का आयोजन राष्ट्रीय गोधन महासंघ की ओर से किया जा रहा है। आयोजन में दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम, दिल्ली सरकार, काउजोन तथा सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा, दिल्ली का सहयोग रहेगा।
दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम की ओर से दिल्ली हाट, जनकपुरी को महोत्सव के आयोजन स्थल के रूप में उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है।
आयोजकों के अनुसार, महोत्सव के जरिए गोसंवर्धन को संरक्षण की अवधारणा से आगे ले जाकर स्वदेशी उत्पादन, प्राकृतिक खेती, ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

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