दिल्ली में 18वें गृहा सम्मेलन का आगाज, जलवायु अनुकूल विकास के लिए नीति निर्माताओं ने साझा किए विचार
सीओपी-31 से पहले आयोजित सम्मेलन में नीति निर्माताओं, शहरी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा।

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भारत में टिकाऊ निर्माण और कम-कार्बन वाले भविष्य की दिशा में प्रयासों को गति देने के उद्देश्य से गृहा काउंसिल ने मंगलवार को नई दिल्ली में 18वें गृहा सम्मेलन का उद्घाटन किया। ‘कम-कार्बन भविष्य की राह : इमारतों से लेकर बुनियादी ढांचे तक’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, शहरी विकास विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में टिकाऊ भवन निर्माण, संसाधनों के कुशल उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष चर्चा हुई।
उद्घाटन समारोह में टीईआरआई की महानिदेशक एवं गृहा काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. विभा धवन, गृहा काउंसिल के उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा टीईआरआई के कार्यकारी निदेशक (रणनीति एवं साझेदारी) संजय सेठ सहित कई गणमान्य व्यक्ति और क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सीओपी-31 से पहले आयोजित इस सम्मेलन को भारत की बदलती जलवायु प्राथमिकताओं और वैश्विक जलवायु एजेंडे में देश की भूमिका पर विचार-विमर्श के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों और नई तकनीकों को साझा करने के साथ टिकाऊ विकास की राह में मौजूद चुनौतियों की पहचान करना तथा पर्यावरण के अनुकूल और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने में सक्षम बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।
एकीकृत बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने की जरूरत
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संजय सेठ ने कहा कि बुनियादी ढांचा किसी भी सुव्यवस्थित और जलवायु चुनौतियों का सामना करने में सक्षम समाज की नींव होता है। भारत में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है। ऐसे में आज लिए जाने वाले फैसले आने वाले कई दशकों तक देश के कार्बन उत्सर्जन की दिशा तय कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण में अपनाए जा रहे टिकाऊ विकास के सिद्धांतों को उन व्यवस्थाओं तक भी विस्तारित करने की जरूरत है, जो इन इमारतों को जोड़ती हैं और उनका आधार बनती हैं। इसके लिए अलग-अलग इमारतों और परियोजनाओं के बजाय एकीकृत बुनियादी ढांचे तथा छोटे-छोटे सुधारों के बजाय व्यापक व्यवस्थागत बदलाव पर ध्यान देना होगा।
ग्रीन बिल्डिंग के लिए गृहा रेटिंग फ्रेमवर्क महत्वपूर्ण
मध्य प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग के सचिव एवं मध्य प्रदेश बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक सिबी चक्रवर्ती एम. ने कहा कि किसी भी परियोजना के प्रदर्शन को मापना जरूरी है, तभी यह पता लगाया जा सकता है कि लिए गए फैसलों से अपेक्षित परिणाम मिल रहे हैं या नहीं। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में गृहा ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग एक मानक ढांचे के रूप में स्थापित हुई है। यह भवन निर्माण और भूमि विकास में पर्यावरणीय स्थिरता का आकलन करने के लिए एक मान्यता प्राप्त और व्यापक तरीका उपलब्ध कराती है। उन्होंने टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लिए इस तरह के एकीकृत दृष्टिकोण की बढ़ती भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
ऊर्जा बचत और टिकाऊ निर्माण पर जोर

सेंट-गोबेन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एशिया प्रशांत और भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीधर एन. ने अपने विशेष संबोधन में कहा कि ऊर्जा की सबसे स्वच्छ और सस्ती इकाई वह है, जिसकी किसी इमारत को जरूरत ही न पड़े। उन्होंने कहा कि भारत के निर्माण क्षेत्र में बदलाव लाना किसी एक संगठन के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत को मिलकर काम करना होगा। गृहा के साथ साझेदारी इसी सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास है, जिसका उद्देश्य टिकाऊ निर्माण पद्धतियों को बढ़ावा देना और स्वस्थ एवं जलवायु अनुकूल भविष्य तैयार करना है।
वहीं, विश्व बैंक समूह के संचालन प्रबंधक एवं कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने कहा कि अब चुनौती केवल यह समझने की नहीं है कि हरित इमारतें क्यों जरूरी हैं, बल्कि ऐसी नीतियां और वित्तीय व्यवस्थाएं तैयार करने की है, जिनसे टिकाऊ निर्माण आर्थिक रूप से व्यावहारिक और प्राथमिकता वाला विकल्प बन सके।
उन्होंने गृहा की जंगृहा पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विशेष रूप से स्वयं निर्मित घरों और छोटे स्तर की इमारतों में टिकाऊपन तथा मजबूती को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह ऐसा क्षेत्र है, जो पारंपरिक हरित भवन प्रमाणन प्रणालियों की पहुंच से अक्सर बाहर रह जाता है। उन्होंने छोटे स्तर के आवासीय निर्माण क्षेत्र में गृहा काउंसिल के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जताई।
तीन महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी, एआई आधारित उपकरण पेश
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में गृहा काउंसिल की ओर से तीन महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग प्रशिक्षण रिपोर्ट, ‘द स्काई मॉडलिंग रिपोर्ट’ और ‘शाश्वतः : लेट नेचर बी’ शामिल हैं। इसके अलावा, गृहा काउंसिल ने अपनी रेटिंग प्रणाली को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उपकरण भी पेश किए।
इस अवसर पर एसटेक और गृहा काउंसिल के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसे टिकाऊ पर्यावरण के निर्माण के लिए दोनों संस्थाओं के बीच सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। कार्यक्रम का समापन गृहा काउंसिल की उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं सचिव और टीईआरआई में टिकाऊ भवनों की निदेशक शबनम बस्सी के संबोधन के साथ हुआ।
‘आरोहण’ प्रदर्शनी में दिखीं टिकाऊ निर्माण की नई तकनीकें
उद्घाटन सत्र के बाद सम्मेलन में ‘आरोहण’ प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। इसमें विभिन्न विशेष क्षेत्रों के माध्यम से टिकाऊ निर्माण सामग्री, आधुनिक तकनीकों और नए प्रयोगों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण जीवन-आकार का नमूना ‘स्पर्श 2.0’ रहा, जिसे आगंतुकों को कम-कार्बन वाले पर्यावरण का व्यावहारिक अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
इसके साथ ही, काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के सहयोग से आयोजित वास्तुकला डिजाइन प्रतियोगिता ‘इंडियन स्ट्रीट्स रीइमैजिन्ड’ के चुने गए डिजाइन भी प्रदर्शित किए गए। इन डिजाइनों में भारतीय सड़कों को अधिक समावेशी, जलवायु अनुकूल और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के नए विचारों को सामने रखा गया।
सम्मेलन में हुई चर्चाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से इस बात पर जोर दिया गया कि कम-कार्बन भविष्य के निर्माण के लिए केवल हरित इमारतें बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवहन, शहरी विकास और बुनियादी ढांचे सहित विकास के सभी क्षेत्रों में पर्यावरण अनुकूल दृष्टिकोण अपनाना भी जरूरी है।

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