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Prayag Utsav 2026: जेएनयू में प्रयागराज की संस्कृति, साहित्य और अकादमिक विरासत का संगम

पूर्व कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह रहे मुख्य अतिथि, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ की अध्यक्षता में हुआ मुख्य सत्र।

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कन्वेंशन सेंटर में रविवार को ‘प्रयाग-दिल्ली संगम 2026’ के अंतर्गत ‘प्रयाग उत्सव’ का सफल आयोजन किया गया। प्रयागराज की समृद्ध सांस्कृतिक, साहित्यिक और शैक्षणिक विरासत को केंद्र में रखकर आयोजित इस उत्सव में दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले प्रयाग से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विचार-विमर्श, साहित्य, संगीत, लोक कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रयाग की विशिष्ट पहचान और परंपराओं को सामने रखा गया।

सिद्धार्थ नाथ सिंह रहे मुख्य अतिथि

उत्सव में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उद्घाटन सत्र के बाद दो पैनल चर्चाओं का आयोजन किया गया। इनमें डॉ. धनंजय चोपड़ा, डॉ. मधु रानी शुक्ला, शांतनु गुप्ता, रौनक गुप्ता, हर्षवर्धन त्रिपाठी, शिवेंद्र कुमार सिंह और जितेंद्र मणि त्रिपाठी ने अपने विचार साझा किए।

चर्चाओं में प्रयागराज की सांस्कृतिक पहचान, साहित्यिक परंपराओं और अकादमिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किए गए। आयोजन का उद्देश्य प्रयाग की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और दिल्ली-एनसीआर में रह रहे प्रयाग से जुड़े लोगों को साझा मंच प्रदान करना रहा।

नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ की अध्यक्षता में हुआ मुख्य सत्र

प्रयाग उत्सव का प्रमुख आकर्षण नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ की अध्यक्षता में आयोजित मुख्य सत्र रहा। इस सत्र में डॉ. कृतिका अग्रवाल, प्रो. आनंद शंकर सिंह, प्रो. निरंजन कुमार और प्रो. सपना रतन शाह ने प्रयाग की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक परंपराओं और उसकी ऐतिहासिक पहचान पर अपने विचार रखे।

वक्ताओं ने प्रयाग की सांस्कृतिक विशेषताओं और बौद्धिक परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए ऐसी पहलों की प्रासंगिकता को सामने रखा, जो विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़े रखती हैं।

कथक, लोकगायन और कवि सम्मेलन ने बांधा समां

विचार-विमर्श के साथ-साथ उत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी विशेष छटा देखने को मिली। कथक नृत्य, लोकगायन, युवा कवि सम्मेलन और संगीतमय प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत बनाया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला, लोक संस्कृति और साहित्य की विविधता को अभिव्यक्ति मिली।

युवा कवियों की भागीदारी ने साहित्यिक गतिविधियों को नई ऊर्जा दी, जबकि संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने आयोजन में सांस्कृतिक रंग भर दिए।

आयोजन समिति ने जताया आभार

कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए समिति के सदस्यों डॉ. कृतिका अग्रवाल, प्रो. सपना रतन शाह, डॉ. मृत्युंजय राव परमार, आशुतोष उपाध्याय, प्रतीक मिश्रा, सिद्धांत मिश्रा, विजय जायसवाल और आलोक सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, कलाकारों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

‘प्रयाग-दिल्ली संगम 2026’ के अंतर्गत आयोजित प्रयाग उत्सव ने प्रयागराज की सांस्कृतिक, साहित्यिक और शैक्षणिक विरासत को साझा करने के साथ दिल्ली-एनसीआर में रह रहे प्रयाग से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान किया। इस आयोजन के जरिए परंपरा, कला, साहित्य और संवाद के माध्यम से सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

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