शबरी के बेर से लंका दहन तक, लव कुश रामलीला में जीवंत हुई रामायण
लाल किला मैदान में 250 फीट की ऊंचाई पर श्रीराम-लक्ष्मण को कंधों पर उठाकर लाए हनुमान जी, हजारों रामभक्तों ने मोबाइल कैमरों में कैद किया अद्भुत दृश्य

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रामायण में शबरी और भगवान श्रीराम की भेंट भक्ति, प्रेम और समर्पण का अनुपम उदाहरण है। वनवास के दौरान जब प्रभु श्रीराम माता सीता की खोज करते हुए शबरी के आश्रम पहुंचे, तो उनकी प्रतीक्षा में वर्षों से बैठी शबरी ने प्रेमपूर्वक उन्हें बेर अर्पित किए।

मान्यता के अनुसार, शबरी ने प्रत्येक बेर को चखकर मीठा होने के बाद ही प्रभु को दिया, ताकि उन्हें खट्टे बेर न खाने पड़ें। भगवान श्रीराम ने शबरी की निष्कपट भक्ति और प्रेम को स्वीकार करते हुए उनके जूठे बेर खाए। यह प्रसंग संदेश देता है कि ईश्वर के लिए बाहरी आडंबर से अधिक भक्त का सच्चा प्रेम और समर्पण महत्वपूर्ण है।
इसी भक्ति, समर्पण और वीरता के भाव को देश-विदेश में विख्यात लव कुश रामलीला कमेटी ने लाल किला मैदान में भव्य एवं प्रभावशाली मंचन के माध्यम से जीवंत कर दिया।

लीला के दौरान उस समय हजारों रामभक्त रोमांचित हो उठे, जब विशाल क्रेनों की मदद से आकाश मार्ग से लगभग 250 फीट की ऊंचाई पर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर उठाए हनुमान जी का भव्य आगमन हुआ। इस अद्भुत दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने के लिए दर्शकों में खासा उत्साह दिखाई दिया। हजारों मोबाइल फोन की चमकती रोशनी से पूरा लीला मैदान जगमगा उठा।
इसके बाद जब हनुमान जी ने सोने की लंका में आग लगाई, तो देखते ही देखते लंका दहन का रोमांचक दृश्य सामने आया। इस दौरान पूरे लीला स्थल पर ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोष गूंजने लगे और दर्शक भक्ति तथा उत्साह से सराबोर हो गए।
लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि रामलीला में आधुनिक तकनीक, विशाल क्रेनों और भव्य मंच सज्जा के माध्यम से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा कि रामलीला का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों, हनुमान जी की निष्ठा और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है।
उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और असम के स्वास्थ्य मंत्री ने किया रामलीला का अवलोकन
अर्जुन कुमार ने आगे बताया कि दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा असम सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने लीला स्थल पर पहुंचकर भगवान श्रीराम की लीला का अवलोकन किया और प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद लिया। गणमान्य अतिथियों के आगमन से आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।
राम-सुग्रीव मित्रता से लंका दहन तक के प्रसंगों का मंचन
लीला मंच पर शबरी से भगवान श्रीराम की भेंट, राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, माता सीता की खोज, लंकनी से भेंट, रावण-सीता संवाद, अक्षय कुमार वध, रावण-हनुमान संवाद और लंका दहन तक के प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय, आकर्षक वेशभूषा, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और सजीव मंचन ने दर्शकों को रामायण के घटनाक्रमों से जोड़ दिया।
गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित

कमेटी के महासचिव सुभाष गोयल ने बताया कि लीला स्थल पर पहुंचे उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, असम सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल तथा अन्य गणमान्य अतिथियों को कमेटी की ओर से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर पवन गुप्ता, सत्यभूषण जैन, अखिल सिंघल, बृजमोहन गोयल, अंकुर गोयल, गौरव सूरी, प्रवीण गोयल और संदीप भूटानी सहित कमेटी के अन्य पदाधिकारी तथा अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
लाल किला मैदान में आयोजित लव कुश रामलीला में भक्ति, आधुनिक तकनीक और भव्य मंचन का अनूठा संगम देखने को मिला। शबरी के बेर से लेकर 250 फीट की ऊंचाई पर हनुमान जी के आगमन और लंका दहन तक के दृश्यों ने रामभक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
-चंद्र मोहन शर्मा (लेखक वरिष्ठ फिल्म समीक्षक, पत्रकार हैं।)

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