बुलेट सिर्फ लड़कों की सवारी नहीं, बेटियां भी बन रहीं सशक्त बाइक राइडर: पूजा सिंह
भोपाल में ‘दस्तक संवाद’ के दौरान बाइकर पूजा सिंह ने साझा किए लेह-लद्दाख की 6 हजार किलोमीटर लंबी साहसिक यात्रा के अनुभव, युवा बाइकर्स को दिए सोलो और ग्रुप राइडिंग के टिप्स

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भोपाल, संवाददाता।
समाज में आज भी बाइक चलाने को अक्सर लड़कों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन महिलाओं ने अपने साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से इस धारणा को बदलना शुरू कर दिया है। बुलेट सिर्फ लड़कों की सवारी नहीं है, बल्कि बेटियां भी बाइक राइडर बनकर अपनी अलग पहचान बना रही हैं। हालांकि, लंबी और दुर्गम यात्राओं को पूरा करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ परिवार का सहयोग भी बेहद जरूरी है। यह बात भोपाल की चर्चित महिला बाइक राइडर पूजा सिंह ने रविवार को दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय में आयोजित ‘दस्तक संवाद’ कार्यक्रम में कही।
हाल ही में लेह-लद्दाख तक करीब 6 हजार किलोमीटर की साहसिक एकल बाइक यात्रा पूरी कर भोपाल लौटीं पूजा सिंह ने इस दौरान अपनी यात्रा के अनुभवों, चुनौतियों और रोमांचक संस्मरणों को साझा किया। वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी के साथ विशेष संवाद सत्र में उन्होंने बताया कि किस तरह एक महिला होने के साथ-साथ मां, पत्नी और नौकरीपेशा व्यक्ति की जिम्मेदारियों के बीच लंबी बाइक यात्राओं के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण होता है।
महिला बाइक राइडर्स के सामने सुरक्षा और सामाजिक सोच की चुनौती
पूजा सिंह ने कहा कि जब कोई लड़की रॉयल एनफील्ड जैसी भारी बाइक चलाती हुई दिखाई देती है, तो समाज में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं। महिला बाइक राइडर के रूप में सबसे पहले इस सोच से आगे निकलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बेटियां भी अपने आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि महिला राइडर्स को लंबी यात्राओं के दौरान सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यात्रा की तैयारी, सही योजना, आत्मविश्वास और परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
तुरतुक गांव में स्थानीय लोगों और बच्चों से मुलाकात का अनुभव
लेह-लद्दाख यात्रा के संस्मरण साझा करते हुए पूजा सिंह ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) की सीमा के निकट स्थित तुरतुक गांव में बिताए समय का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने वहां के लोगों के रहन-सहन, स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली के बारे में अपने अनुभव बताए।
पूजा ने गांव के लोगों के साथ बातचीत और आंगनवाड़ी के बच्चों से संवाद के यादगार पलों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि बाइक यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों, उनकी संस्कृति और जीवन को करीब से समझने का अवसर भी मिलता है।
युवा बाइकर्स को दिए सुरक्षित राइडिंग के खास टिप्स
कार्यक्रम में मौजूद भोपाल के युवा बाइकर्स को पूजा सिंह ने सोलो और ग्रुप राइडिंग के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लंबी यात्रा पर निकलने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता, मौसम और रास्तों की परिस्थितियों को समझना जरूरी है।
उन्होंने राइडिंग के दौरान हल्का भोजन करने, साथ में सूखे मेवे रखने और शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने की सलाह दी। नए राइडर्स को शुरुआत में कम दूरी की यात्राएं करनी चाहिए और अनुभव बढ़ने के साथ धीरे-धीरे लंबी दूरी तय करनी चाहिए।
पूजा सिंह ने बाइक की देखभाल को भी सुरक्षित यात्रा का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान बाइक साथी और परिवार के सदस्य की तरह होती है, इसलिए उसकी नियमित जांच और उचित रखरखाव जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अपनी बाइक का नाम उन्होंने ‘डिग्निटी’ रखा है। यह नाम उनके लिए आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और अपनी पहचान का प्रतीक है। उनके अनुसार, बाइक पर भरोसा रखने के साथ उसकी तकनीकी स्थिति का ध्यान रखना भी हर राइडर की जिम्मेदारी है।
एक दिन में ग्वालियर से चंडीगढ़ तक तय किया 600 किलोमीटर का सफर
अपनी लेह-लद्दाख यात्रा का अनुभव साझा करते हुए पूजा सिंह ने बताया कि उन्होंने ग्वालियर से चंडीगढ़ तक लगभग 600 किलोमीटर की दूरी एक ही दिन में तय की थी। इस तरह की लंबी यात्राओं में शारीरिक क्षमता, धैर्य और एकाग्रता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में यात्रा के दौरान मौसम और वातावरण के अनुकूल होने की आवश्यकता पर भी बात की। पूजा के मुताबिक, मैदानी इलाकों से हिमालयी क्षेत्र में पहुंचने पर शरीर को वहां की परिस्थितियों के अनुसार ढलने के लिए समय देना चाहिए। उन्होंने नए राइडर्स को सलाह दी कि वे जल्दबाजी से बचें और अपनी यात्रा की योजना परिस्थितियों के अनुरूप बनाएं।
कार्यक्रम के दौरान पूजा सिंह के बचपन से लेकर बाइक राइडिंग के क्षेत्र में उनके अब तक के सफर पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी दिखाई गई। इसके माध्यम से श्रोताओं को उनके संघर्ष, अनुभवों और साहसिक यात्राओं के बारे में जानने का अवसर मिला।
साहस, संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प की मिसाल है पूजा की यात्रा

कार्यक्रम में विशेष वक्तव्य देते हुए विकास संवाद के संस्थापक सचिन जैन ने कहा कि पूजा सिंह की लद्दाख यात्रा साहस, भावुकता और दृढ़ संकल्प का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह यात्रा केवल हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि अलग-अलग लोगों और उनकी जीवनशैली को जानने-समझने का माध्यम भी बनी।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पूजा सिंह के अनुभवों को रुचि के साथ सुना और उनसे बाइक राइडिंग से जुड़े सवाल भी पूछे। संवाद सत्र ने युवा राइडर्स को सुरक्षित यात्रा, आत्मविश्वास और नई जगहों को जानने के महत्व के बारे में प्रेरित किया।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव ने किया। ‘दस्तक संवाद’ के इस विशेष सत्र में पूजा सिंह की साहसिक यात्रा के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मसम्मान और सही तैयारी के साथ महिलाएं भी उन क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकती हैं, जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों का क्षेत्र माना जाता रहा है।

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