350वें शहादत दिवस पर गुरु तेग बहादुर जी की विरासत पर मंथन, यमुनानगर में जुटे देशभर के विद्वान
साहित्य अकादेमी और गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संयुक्त आयोजन में गुरु जी के जीवन, दर्शन, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत पर हुआ व्यापक विमर्श

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श्री गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान केवल भारतीय इतिहास की एक महान घटना नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और अपने विश्वास की रक्षा के लिए सर्वोच्च त्याग का अद्वितीय उदाहरण है। उनकी शहादत ने भारतीय सभ्यता के उस मूल विचार को मजबूत किया, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता के साथ जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। इसी कालजयी विरासत और उनके विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श के लिए यमुनानगर में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, हरियाणा के सहयोग से गुरु नानक खालसा कॉलेज, यमुनानगर में ‘श्री गुरु तेग बहादुर जी की विरासत’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। यह संगोष्ठी श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस की स्मृति को समर्पित रही।
संगोष्ठी में देशभर से आए प्रख्यात विद्वानों, लेखकों, शिक्षाविदों तथा साहित्य एवं शिक्षा जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, दर्शन, बलिदान, साहित्यिक योगदान तथा उनकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार रखा।
गुरु तेग बहादुर जी की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी
उद्घाटन सत्र की शुरुआत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान से हुई। इसके बाद अतिथियों का अभिनंदन किया गया। साहित्य अकादेमी के उप सचिव डॉ. एन. सुरेश बाबू ने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और उनकी विरासत को साहित्य, शिक्षा तथा अकादमिक विमर्श के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
इस अवसर पर संस्कृति मंत्री, भारत सरकार का संदेश भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के स्मरण के महत्व को रेखांकित किया गया।
धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का महान उदाहरण है गुरु जी का बलिदान

केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के कुलाधिपति प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और बलिदान को मानव मूल्यों तथा धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का महान उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि गुरु जी का बलिदान भारत के सभ्यतागत इतिहास में विशिष्ट स्थान रखता है और उनकी शिक्षाएं आज भी समाज को मानवता, सहिष्णुता तथा नैतिक साहस का संदेश देती हैं।
साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने अध्यक्षीय संबोधन में गुरु तेग बहादुर जी की विरासत के साहित्यिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक पक्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने गुरु जी की वाणी और विचारों की व्यापक मानवीय दृष्टि को रेखांकित किया।
दो विद्वत् सत्रों में हुआ अकादमिक विमर्श
संगोष्ठी के अकादमिक सत्र में दो विद्वत् सत्र आयोजित किए गए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. अरविंदर सिंह भल्ला, प्राचार्य, गुरु नानक खालसा कॉलेज ने की। इस सत्र में सरदार अवतार सिंह, सरदार मनजिंदर सिंह और डॉ. लेजिया लखवीर ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रख्यात पंजाबी लेखक रविंदर सिंह ने की। इस सत्र में डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. अनुराग सिंह और डॉ. दलविंदर सिंह ग्रेवाल ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। विद्वानों ने गुरु तेग बहादुर जी के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान के साथ-साथ उनकी शिक्षाओं की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए।
बलिदान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर चर्चा
समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. हरमोहिंदर सिंह बेदी ने की। साहित्य अकादेमी के उप सचिव डॉ. एन. सुरेश बाबू ने समापन वक्तव्य दिया। प्रख्यात पंजाबी विद्वान एवं लेखक बलकार सिंह ने समापन संबोधन में गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान के व्यापक ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
गवर्निंग बॉडी एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष सरदार रणदीप सिंह जौहर ने संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी की कालजयी विरासत और उनकी शिक्षाओं के संरक्षण एवं प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में साहित्य अकादेमी के उप सचिव श्री नवीन कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच संचालन साहित्य अकादेमी की डॉ. संदीप कौर तथा गुरु नानक खालसा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के डॉ. तिलक राज और डॉ. विनय चंदेल ने किया।
इस अवसर पर डॉ. अमित जोशी, डॉ. कुमार गौरव, श्री ओम पाहवा, सरदार गुरदियाल सिंह निमार, डॉ. एन. एस. विर्क, सरदार अजिंदरपाल सिंह, राहुल कोहली सहित अनेक गणमान्य अतिथि तथा संस्थान के शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय संगोष्ठी ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, दर्शन, बलिदान और साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत पर सार्थक अकादमिक विमर्श के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। संगोष्ठी में यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि गुरु तेग बहादुर जी का जीवन और बलिदान आज भी मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता, सहिष्णुता और नैतिक साहस की प्रेरणा देता है।

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