डॉ. प्रतिभा राय को साहित्य अकादेमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया
ओडिशा की पहली महिला लेखिका के रूप में साहित्य अकादेमी फेलोशिप से सम्मानित हुईं डॉ. प्रतिभा राय

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भुवनेश्वर। प्रख्यात ओड़िया लेखिका एवं विदुषी डॉ. प्रतिभा राय को साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए साहित्य अकादेमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया। भुवनेश्वर के संस्कृति भवन सभागार में आयोजित विशेष समारोह में साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने उन्हें फेलोशिप की पट्टिका प्रदान की।
समारोह का शुभारंभ डॉ. अद्याशा दास द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण गीत से हुआ।
इसके बाद साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. वरुण गुलाटी ने स्वागत वक्तव्य दिया तथा डॉ. प्रतिभा राय को प्रदान की जाने वाली फेलोशिप का प्रशस्ति-पत्र पढ़कर सुनाया।

साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. प्रतिभा राय के साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए उन्हें “भारतीय साहित्य की जीवंत किंवदंती” बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. राय ने अपने सृजन के माध्यम से भारतीय साहित्य को समृद्ध किया है और उनकी रचनाओं ने व्यापक स्तर पर पाठकों को प्रभावित किया है।
समारोह के दौरान एक विशेष ‘संवाद’ कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इसके पश्चात फेलोशिप प्रदान करने का औपचारिक समारोह हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. गौरहरि दास ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. प्रतिभा राय ओडिशा की पहली महिला लेखिका हैं, जिन्हें साहित्य अकादेमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। उन्होंने डॉ. राय की साहित्यिक उपलब्धियों को ओड़िया तथा भारतीय साहित्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर प्रख्यात लेखक देबप्रसाद दास, प्रोफेसर संघमित्रा मिश्रा और प्रोफेसर प्रफुल्ल कुमार महंती ने डॉ. प्रतिभा राय के जीवन, व्यक्तित्व और साहित्यिक कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने भारतीय साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान और उनकी रचनात्मक यात्रा को रेखांकित किया।

फेलोशिप प्राप्त करने के बाद डॉ. प्रतिभा राय ने अपना स्वीकृति वक्तव्य दिया। उन्होंने साहित्य अकादेमी द्वारा प्रदान किए गए इस सम्मान के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में साहित्य अकादेमी के उप सचिव डॉ. एन. सुरेश बाबु ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यकार, लेखक, विद्वान और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
डॉ. प्रतिभा राय को साहित्य अकादेमी फेलोशिप से सम्मानित किया जाना ओड़िया साहित्य के साथ-साथ भारतीय साहित्य जगत के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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