मनोज माडान ने IIC में लॉन्च की ‘DEPUTY: Second to None’, पर्दे के पीछे के नेतृत्व को मिली नई पहचान
संस्थानों की सफलता में दूसरे और तीसरे पायदान के नेतृत्वकर्ताओं की अहम भूमिका पर केंद्रित है पुस्तक, प्रभावी नेतृत्व के साथ मानसिक संतुलन को भी बताया आवश्यक

👆भाषा ऊपर से चेंज करें
कॉर्पोरेट जगत में सफलता और नेतृत्व की चर्चा प्रायः शीर्ष पदों तथा ‘कॉर्नर ऑफिस’ तक पहुंचने के इर्द-गिर्द केंद्रित रहती है। हालांकि, किसी भी संस्थान की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने और रणनीतियों को धरातल पर उतारने में दूसरे और तीसरे स्तर के नेतृत्वकर्ताओं की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे ही नेतृत्वकर्ताओं के योगदान और जिम्मेदारियों को केंद्र में रखते हुए ग्लोबल बिजनेस एग्जीक्यूटिव, TEDx वक्ता और कॉन्शस लीडरशिप कोच मनोज माडान ने नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में अपनी नई पुस्तक ‘DEPUTY: Second to None’ का लोकार्पण किया। इस पुस्तक का वैश्विक प्रकाशन वॉलनट पब्लिकेशन (Walnut Publication) द्वारा किया गया है।
‘नंबर वन होना जरूरी नहीं, फिर भी आप सबसे अलग हो सकते हैं’
पुस्तक के लेखक मनोज माडान ने कहा, “आपको नंबर वन होने की जरूरत नहीं है, फिर भी आप Second to None हो सकते हैं।” उन्होंने कहा कि किसी संस्थान में डिप्टी की भूमिका केवल शीर्ष नेतृत्व का सहयोग करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह संस्थान के विजन को प्रभावी कार्यान्वयन में बदलने वाली महत्वपूर्ण कड़ी होता है।
मनोज माडान के अनुसार, यह पुस्तक उन सक्षम और समर्पित पेशेवरों को समर्पित है, जो पर्दे के पीछे रहकर संस्थानों की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, लेकिन कई बार उन्हें उनके योगदान के अनुरूप पहचान नहीं मिल पाती। पुस्तक में ऐसे नेतृत्वकर्ताओं की भूमिका, चुनौतियों और कार्यस्थल पर उनके प्रभाव को प्रमुखता से सामने लाया गया है।
विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने रेखांकित किया डिप्टी का महत्व
पुस्तक की मूल अवधारणा को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों का समर्थन मिला। इस अवसर पर वक्ताओं ने संस्थानों में डिप्टी की भूमिका, उनके योगदान और नेतृत्व संबंधी जिम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए।
संगीता गुप्ता (NASSCOM) ने तेजी से बदलते कारोबारी माहौल और बढ़ती चुनौतियों के बीच संचालन संबंधी जिम्मेदारियां संभालने वाले डिप्टी की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे नेतृत्वकर्ता संस्थानों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढालने और उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
चरनजोत सिंह नंदा (ICAI) ने वित्तीय क्षेत्र में पर्दे के पीछे काम करने वाले नेतृत्वकर्ताओं की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने ऐसे पेशेवरों को कंपनियों की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण आधार बताया।
वहीं, डॉ. अरुणा झा (SRCC) और सर्वेश माथुर (EYGDS) ने अकादमिक और कॉर्पोरेट दोनों क्षेत्रों में डिप्टी की जिम्मेदारियों पर चर्चा की। उन्होंने रणनीतिक योजनाओं और दैनिक कार्यान्वयन के बीच संतुलन स्थापित करने में डिप्टी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
अजय बग्गा (Zimmer Biomet) और भूरीजना दास (Hare Krishna Movement) ने स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक जिम्मेदारियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में डिप्टी के योगदान, कर्तव्यनिष्ठा और व्यापक जिम्मेदारियों पर अपने विचार साझा किए।
नेतृत्व की सफलता के लिए मानसिक संतुलन जरूरी : पूनम माडान
कार्यक्रम में चार्टर्ड अकाउंटेंट से एग्जीक्यूटिव वेलनेस कोच बनीं पूनम माडान ने मध्य और वरिष्ठ स्तर के नेतृत्वकर्ताओं के सामने आने वाले मानसिक दबाव और पेशेवर चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने प्रभावी नेतृत्व और लंबे समय तक बेहतर पेशेवर प्रदर्शन के लिए भावनात्मक मजबूती को आवश्यक बताया।
पूनम माडान ने कहा कि आत्म-जागरूकता, आंतरिक संतुलन और मानसिक कल्याण को केवल कॉर्पोरेट सुविधाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये दीर्घकालिक पेशेवर सफलता, व्यक्तिगत स्थिरता और प्रभावी नेतृत्व के लिए आवश्यक आधार हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नेतृत्व की जिम्मेदारियों को लंबे समय तक प्रभावी ढंग से निभाने के लिए पेशेवर दक्षता के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी महत्वपूर्ण है।
डिप्टी की भूमिका को नई दृष्टि से प्रस्तुत करती है पुस्तक
‘DEPUTY: Second to None’ के माध्यम से मनोज माडान ने उन नेतृत्वकर्ताओं की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया है, जो शीर्ष पद पर न होते हुए भी संस्थानों की रणनीति, प्रबंधन और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
पुस्तक का केंद्रीय विचार यह है कि नेतृत्व का महत्व केवल पद या अधिकार से निर्धारित नहीं होता, बल्कि जिम्मेदारी निभाने, परिणाम देने और संस्थान के विकास में योगदान करने की क्षमता से भी जुड़ा होता है।

Stay Updated with Dainik India 24×7!
Follow us for real-time updates:




