सुगम्यता उपकार नहीं, हर दिव्यांग का अधिकार है: पूनम श्रोती
प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा- एक्सेसिबिलिटी ऑडिट के साथ हर संस्थान के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान लागू किया जाए।

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संवाददाता, भोपाल। दिव्यांग अधिकार कार्यकर्ता एवं उद्दीप सोशल वेलफेयर सोसायटी की संस्थापक पूनम श्रोती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देशभर में दिव्यांगजनों के लिए सुगम्यता (Accessibility) सुनिश्चित करने हेतु ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों में प्रभावी एक्सेसिबिलिटी एक्शन प्लान लागू करने और राष्ट्रव्यापी सुगम्यता ऑडिट (Accessibility Audit) कराने का आग्रह किया है।
पूनम श्रोती का कहना है कि भारत को वास्तव में समावेशी और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए यह आवश्यक है कि दिव्यांगजन बिना किसी बाधा के स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, परिवहन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं तक स्वतंत्र रूप से पहुंच सकें।


कानून के बावजूद सुगम्यता की स्थिति चिंताजनक
प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में पूनम श्रोती ने उल्लेख किया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 लागू होने के बावजूद देश के अधिकांश सरकारी कार्यालय, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, कार्यस्थल, सार्वजनिक परिवहन और व्यावसायिक प्रतिष्ठान अभी भी दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह सुलभ नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि आवश्यक सुविधाओं के अभाव में दिव्यांगजनों को रोजमर्रा के छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनके आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और समान अवसर के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
एक साधारण एक्स-रे के लिए भी झेलनी पड़ी परेशानी
पूनम श्रोती ने अपने हालिया अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि हाथ में फ्रैक्चर होने के बाद उन्हें एक डायग्नोस्टिक सेंटर में एक्स-रे कराने के दौरान काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। केंद्र व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए अनुकूल नहीं था और वहां दिव्यांगजनों के लिए रैंप जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी।
उन्होंने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि देशभर के लाखों दिव्यांगजनों की रोजमर्रा की वास्तविकता है। यदि अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र जैसी आवश्यक सेवाएं भी सुगम नहीं हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
स्वतंत्र विशेषज्ञों की निगरानी में हो राष्ट्रीय सुगम्यता ऑडिट
पूनम श्रोती ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि सरकारी और सार्वजनिक भवनों के साथ-साथ आवश्यक निजी संस्थानों का भी व्यापक सुगम्यता ऑडिट कराया जाए। यह ऑडिट स्वतंत्र विशेषज्ञों की निगरानी में हो तथा इसमें दिव्यांगजनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक संस्थान के लिए समयबद्ध सुधार योजना तैयार की जाए, उसकी नियमित निगरानी हो और प्रगति की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए। साथ ही निर्धारित मानकों का पालन न करने वाले संस्थानों की जवाबदेही तय कर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
‘सुगम्यता उपकार नहीं, अधिकार है’
पूनम श्रोती ने कहा कि सुगम्यता किसी पर किया गया उपकार नहीं, बल्कि यह संविधान की भावना, कानूनी दायित्व और सम्मानजनक जीवन जीने का मूल अधिकार है। दिव्यांगजन दया या सहानुभूति नहीं चाहते, बल्कि समान अवसर, समान भागीदारी और समान पहुंच के अधिकार की अपेक्षा रखते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सुगम्यता केवल भवनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सार्वजनिक परिवहन और सभी सार्वजनिक सुविधाओं में भी समान पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
‘सुगम भारत के बिना विकसित भारत अधूरा’
पूनम श्रोती ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भौतिक, सामाजिक और संस्थागत बाधा के सभी आवश्यक सेवाओं तक समान पहुंच मिले। उन्होंने प्रधानमंत्री से सुगम्यता को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करते हुए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने का आग्रह किया।
कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सम्मानों से सम्मानित
पूनम श्रोती लंबे समय से दिव्यांगजनों के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही हैं। उन्हें भारत की 100 प्रेरणादायी महिलाओं में शामिल किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें मध्य प्रदेश शासन का नारी शक्ति सम्मान तथा महर्षि दधीचि सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। पूनम एक असाध्य बीमारी से पीड़ित हैं और जन्म से ही व्हीलचेयर का उपयोग करती हैं।

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