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चरागाह विकास मिशन को मिलेगी नई गति, कार्बन क्रेडिट तंत्र मजबूत करने पर जोर

आईसीएआर सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने IGFRI झांसी का किया दौरा, चारा सुरक्षा और घासभूमि पुनर्स्थापन को बताया राष्ट्रीय प्राथमिकता

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संवाददाता, झांसी। देश में चरागाहों और घासभूमियों के समुचित विकास को गति देने तथा उनसे मिलने वाले पारिस्थितिकी लाभों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के अतिरिक्त सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने 6 जून 2026 को आईसीएआर-भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (IGFRI), झांसी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान की अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों का विस्तृत अवलोकन किया और चरागाह विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए कार्बन क्रेडिट इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया।

दौरे के दौरान ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने चरागाह प्रबंधन, चारा उत्पादन एवं उपयोग के क्षेत्र में संस्थान द्वारा विकसित की जा रही नवीन तकनीकों और अनुसंधान कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कांटा रहित नागफनी जैसे गैर-पारंपरिक चारा स्रोतों, वर्षभर चारा उत्पादन प्रणालियों, राष्ट्रीय चारा जर्मप्लाज्म संरक्षण केंद्र तथा चारा कैफेटेरिया जैसी सुविधाओं की सराहना की। साथ ही, उन्होंने विश्व की पहली बीज उत्पादन करने वाली बाजरा-नेपियर संकर घास विकसित करने के लिए संस्थान के प्रयासों को भी उल्लेखनीय बताया।

ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने कहा कि देश में चारा एवं घास भूमि विकास को बढ़ावा देने के लिए मजबूत नीतिगत समर्थन समय की आवश्यकता है। उन्होंने चरागाह एवं घासभूमियों की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने की जरूरत पर बल दिया, जिससे इनके संरक्षण, पुनर्स्थापन और प्रभावी प्रबंधन के लिए बेहतर योजनाएं बनाई जा सकें।

जलवायु परिवर्तन और जलवायु-स्मार्ट कृषि के बढ़ते महत्व को देखते हुए उन्होंने चरागाहों की कार्बन अवशोषण क्षमता के मूल्यांकन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने संस्थान से अपेक्षा जताई कि वह कार्बन क्रेडिट सृजन, संभावनाओं की पहचान, रणनीति निर्माण और कार्बन क्रेडिट के मोनेटाइजेशन से जुड़े तंत्र विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभाए।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में चरागाह संसाधनों के सतत एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए संस्थान द्वारा विकसित ‘राष्ट्रीय रेंजलैंड नीति’ का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर “चरागाह विकास मिशन” और “कार्बन क्रेडिट सृजन एवं संयोजन” प्रमुख विषयों के रूप में उभरकर सामने आए, जिन्हें चारा सुरक्षा मजबूत करने, पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन और जलवायु अनुकूलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चरागाह विकास और कार्बन क्रेडिट तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो इससे न केवल पशुधन क्षेत्र को लाभ मिलेगा, बल्कि देश के पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को भी नई मजबूती मिलेगी।

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आईसीएआर सचिव ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी ने आईजीएफआरआई झांसी का दौरा कर चरागाह विकास मिशन, कार्बन क्रेडिट सृजन, चारा सुरक्षा और जलवायु-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया। यह पहल देश में घास भूमि संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करेगी।

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