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In Search of Truth: संवाद में महेश भट्ट ने साझा किए जीवन के अनकहे अनुभव

मुंबई में आयोजित विशेष संवाद में महेश भट्ट ने जीवन, संघर्ष, रिश्तों, रचनात्मकता और आत्मखोज पर साझा किए गहरे अनुभव

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मुंबई, संवाददाता

वरिष्ठ फिल्मकार, लेखक और विचारक महेश भट्ट ने एक बार फिर अपने गहन विचारों और जीवन अनुभवों से लोगों को प्रेरित किया। मुंबई के वर्सोवा स्थित RDX Studio में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम “In Search of Truth” में महेश भट्ट ने लेखिका, पटकथा लेखक एवं निर्देशक सुहृता दास के साथ जीवन के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर बातचीत की। यह कार्यक्रम केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आत्मखोज, रिश्तों, संघर्षों, सफलता, असफलता और जीवन के वास्तविक अर्थ पर केंद्रित एक प्रेरणादायक संवाद बन गया।

कार्यक्रम की शुरुआत कविता और स्मृतियों के साथ हुई। इसके बाद सुहृता दास ने महेश भट्ट के जीवन, उनकी अप्रकाशित आत्मकथा और व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से बातचीत को आगे बढ़ाया। इस दौरान दर्शकों को महेश भट्ट के सार्वजनिक व्यक्तित्व से परे एक संवेदनशील इंसान और गहरे विचारक को जानने का अवसर मिला।

संवाद के दौरान महेश भट्ट ने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि मात्र चार वर्ष की आयु में सिनेमा ने उन्हें आकर्षित किया था। उन्होंने कहा कि चलती हुई तस्वीरों का जादू ही उनके भीतर कहानी कहने की प्रेरणा बना। उन्होंने स्वीकार किया कि जीवन अक्सर भ्रम और वास्तविकता के बीच चलता है और सत्य को स्वीकार करना हमेशा आसान नहीं होता।

अपने संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए महेश भट्ट ने प्रसिद्ध निर्देशक राज खोसला से मिली सीख को साझा किया। उन्होंने कहा, “Zero is a great figure to begin with.” उनके अनुसार शून्य से शुरुआत करना कमजोरी नहीं, बल्कि हर बड़ी उपलब्धि की पहली सीढ़ी है।

महेश भट्ट ने अपने विद्रोही स्वभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि युवावस्था में वे हमेशा दूसरों से अलग दिखना चाहते थे, लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि जीवन का वास्तविक अर्थ लोगों से जुड़ने और अनुभव साझा करने में है। उन्होंने कहा, “पहले मैं अलग दिखना चाहता था, आज मैं लोगों से जुड़ना चाहता हूँ।”

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब उन्होंने अपनी माँ से जुड़ी एक स्मृति साझा की। उन्होंने बताया कि बचपन में अपनी बीमार माँ को मुस्कुराने के लिए उन्होंने उनके बालों में जुगनू सजाए थे। इस प्रसंग ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया और यह संदेश दिया कि जीवन की सबसे बड़ी कहानियाँ साधारण लेकिन मानवीय अनुभवों से जन्म लेती हैं।

रचनात्मकता और कला पर अपने विचार रखते हुए महेश भट्ट ने कहा कि महान कला अक्सर टूटे हुए दिल, संघर्षों और भावनात्मक अनुभवों से जन्म लेती है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी रचनात्मक यात्रा का बड़ा हिस्सा आत्ममंथन, असफलताओं और जीवन के कठिन अनुभवों से प्रेरित रहा है।

जीवन और सफलता के अर्थ पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग अपनी खुशियों को भविष्य की उपलब्धियों से जोड़ देते हैं। वे सोचते हैं कि अगली सफलता मिलने के बाद जीवन बेहतर होगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि जीवन वर्तमान क्षण में ही मौजूद है। उन्होंने कहा, “हम अपनी ज़िंदगी को लगातार टालते रहते हैं। सोचते हैं कि जब यह हासिल होगा, तब जीना शुरू करेंगे। लेकिन जीवन कहीं आगे नहीं है। जीवन इसी पल में है, इसी सांस में है, इसी बातचीत में है।”

कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों, थिएटर कलाकारों, लेखकों, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने अपने सवाल रखे। महेश भट्ट ने फिल्म निर्माण, मानसिक स्वास्थ्य, रिश्तों, रचनात्मकता, असफलता और बच्चों के पालन-पोषण जैसे विषयों पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।

पालन-पोषण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे माता-पिता की बातों से अधिक उनके व्यवहार से सीखते हैं। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों को केवल निर्देश देने के बजाय उनकी बातों को समझें और उन्हें सुनने की आदत विकसित करें।

युवा रचनाकारों के लिए उनका संदेश था कि असफलता से घबराने की आवश्यकता नहीं है। कई बार जीवन की सबसे बड़ी सीख और सबसे सशक्त रचनात्मक ऊर्जा उन्हीं अनुभवों से जन्म लेती है जिन्हें हम अपनी हार मान लेते हैं।

पूरे कार्यक्रम में महेश भट्ट का एक ऐसा व्यक्तित्व सामने आया जो केवल एक सफल फिल्मकार नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान, विचारक और जीवन का सतत विद्यार्थी है। वहीं सुहृता दास की गहन तैयारी, आत्मीय प्रश्नों और संवाद शैली ने इस कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित दर्शकों ने इसे केवल एक संवाद नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, प्रेरणा और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर बताया। अपने शीर्षक के अनुरूप “In Search of Truth” सत्य की खोज से आगे बढ़कर जीवन को समझने और महसूस करने की एक सार्थक यात्रा साबित हुआ।

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