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‘कनेक्टेड’ दुनिया में बढ़ता अकेलापन, ‘डिसकनेक्टेड : कनेक्टेड’ ने मंच पर उठाए अहम सवाल

अनुमिता दत्ता चौधरी की परिकल्पना, लेखन और निर्देशन में तैयार ब्लैकआउट थिएटर पीस ने डिजिटल निर्भरता और अकेलेपन पर दर्शकों को सोचने के लिए मजबूर किया।

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नई दिल्ली। खैंलना–द पीपल फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स ने अपनी नई नाट्य प्रस्तुति ‘डिसकनेक्टेड : कनेक्टेड’ के जरिए डिजिटल दौर में बढ़ती दूरी, अकेलेपन और मानवीय जुड़ाव जैसे अहम सवालों को मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। द ब्लैंक कैनवास, एलटीजी सभागार, मंडी हाउस, दिल्ली में हुई प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।

अनुमिता दत्ता चौधरी की परिकल्पना, लेखन और निर्देशन में तैयार यह ब्लैकआउट थिएटर पीस दर्शकों को कुछ समय के लिए अपने गैजेट्स, स्क्रीन और रोजमर्रा के डिजिटल शोर से दूर ले जाता है। नाटक का केंद्रीय सवाल बेहद सरल, लेकिन विचारोत्तेजक है—जब ‘कनेक्टेड’ रहने के लिए बनाई गई यह पूरी दुनिया अचानक बंद हो जाए, तो क्या बचता है?

ब्लैकआउट की पृष्ठभूमि में बुनी गई कहानी

शहर में लागू सिविल डिफेंस ब्लैकआउट की पृष्ठभूमि पर आधारित ‘डिसकनेक्टेड : कनेक्टेड’ में फोन और स्क्रीन से दूर होने के बाद सामने आने वाली वास्तविक दुनिया को केंद्र में रखा गया है। दिल्ली की आम आवाजों और अनुभवों के जरिए कहानी को स्ट्रिप्ड-डाउन और स्प्लिट-स्टेज फॉर्मेट में प्रस्तुत किया गया।

नाटक यह सवाल उठाता है कि आधुनिक तकनीक ने हमें भले ही लगातार ‘कनेक्टेड’ रखा हो, लेकिन क्या हम वास्तव में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं? प्रस्तुति इस बात को रेखांकित करती है कि कई बार तन्हाई हमारे डिवाइसेज के पीछे छिपी रहती है और अपने आसपास मौजूद लोगों को सच में देखने, सुनने और समझने के लिए हमें डिजिटल दुनिया से कुछ पल बाहर निकलना पड़ता है।

दर्शकों ने सराहा नाटक का प्रयोग

प्रस्तुति के दौरान दर्शकों को मनोरंजन के साथ आत्ममंथन का अवसर भी मिला। बिना अनावश्यक मंचीय तामझाम के कहानी और संवादों के माध्यम से डिजिटल दूरी तथा उसके पीछे छिपे अकेलेपन को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा गया। प्रस्तुति के बाद दर्शकों के बीच मानवीय रिश्तों, तकनीक पर बढ़ती निर्भरता और वास्तविक संवाद की जरूरत को लेकर सार्थक चर्चा भी देखने को मिली।

गुरुग्राम में भी हुई प्रस्तुति

‘डिसकनेक्टेड : कनेक्टेड’ की प्रस्तुति 23 अगस्त 2026 को शाम 6:30 बजे रंग परिवर्तन थिएटर स्टूडियो, मेन बस स्टैंड के पास, गुरुग्राम में हुई। इसके बाद 24 अगस्त 2026 को शाम 7 बजे द ब्लैंक कैनवास, एलटीजी, मंडी हाउस, दिल्ली-01 में इसका मंचन किया गया।

नाटक में विभोर आहूजा, मोहन यादव, रूपाली नाथ, यश रावत, तनुश्री रावत, शिउली घोष, राशि राजपूत, अनुश्री खंटवाल, अनुस्तुति खंटवाल, जितेंद्र कुमार राजपूत, भूपेश गुप्ता, वैभव मेहता, अजय कुमार और अंजली रावत ने अभिनय किया।

2007 से थिएटर और सामाजिक चेतना के लिए सक्रिय है खैंलना

खैंलना–द पीपल फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स की स्थापना वर्ष 2007 में हुई थी। यह एक पंजीकृत कला एवं संस्कृति आधारित एनजीओ (80G) है, जो थिएटर को सामाजिक चेतना से जोड़कर काम करता है। संस्था ऐसे सामाजिक मुद्दों को मंच प्रदान करने के लिए सक्रिय रही है, जिन पर अक्सर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं होती। इसके साथ ही खैंलना की स्ट्रीट थिएटर में भी सक्रिय भागीदारी रही है।

‘डिसकनेक्टेड : कनेक्टेड’ इसी प्रयास की एक कड़ी है, जो तकनीक से भरी दुनिया में इंसानी रिश्तों और वास्तविक संवाद की जरूरत को मंच के जरिए सामने लाती है।

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