विभीषण की श्रीराम शरणागति से संजीवनी बूटी तक, लव कुश रामलीला में जीवंत हुए रामायण के रोमांचक प्रसंग
पंजाबी गायक शंकर साहनी बने विभीषण, 220 फीट की ऊंचाई पर संजीवनी बूटी लेकर पहुंचे हनुमान, अंगद के पांव को रावण दरबार में कोई योद्धा नहीं हिला सका

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रामायण में विभीषण की श्रीराम के प्रति शरणागति धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने का एक महत्वपूर्ण प्रसंग है। लंका के राजा रावण का छोटा भाई होने के बावजूद विभीषण ने अधर्म का साथ देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक श्रीराम के पास लौटाने की सलाह दी, लेकिन अहंकार में डूबे रावण ने उनकी बात नहीं मानी। इसके बाद विभीषण ने लंका का राजवैभव छोड़कर प्रभु श्रीराम की शरण ली। श्रीराम ने भी उन्हें शरणागत मानकर स्वीकार किया। इसी प्रसंग से यह संदेश मिलता है कि सत्य और धर्म का मार्ग अपनाने के लिए अन्याय का विरोध करना आवश्यक है।
इसी आदर्श, भक्ति और धर्म की विजय के संदेश को देश-विदेश में विख्यात लव कुश रामलीला समिति द्वारा लाल किला मैदान में आयोजित रामलीला में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। लीला के दौरान विभीषण की श्रीराम की शरण में जाने से लेकर लक्ष्मण के मूर्छित होने, हनुमान जी के संजीवनी बूटी लेकर आने और अंगद-रावण संवाद तक के दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

लाल किला मैदान में रविवार को आयोजित लव कुश रामलीला में पंजाबी पॉप गायक शंकर साहनी ने विभीषण की भूमिका निभाई। उन्होंने अपने अभिनय के माध्यम से विभीषण के उस महत्वपूर्ण प्रसंग को जीवंत किया, जब रावण की अधर्मपूर्ण नीतियों का विरोध करते हुए विभीषण ने लंका का राजवैभव त्यागकर प्रभु श्रीराम की शरण ग्रहण की। विभीषण की भूमिका में शंकर साहनी की प्रस्तुति रामायण के इस महत्वपूर्ण प्रसंग का हिस्सा रही। इस प्रसंग के माध्यम से सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया।
220 फीट की ऊंचाई पर संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान
लव कुश रामलीला समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि लीला के सबसे आकर्षक दृश्यों में हनुमान जी का संजीवनी बूटी लेकर लौटना शामिल रहा। विशाल क्रेनों की सहायता से हनुमान जी को लगभग 220 फीट की ऊंचाई पर विशाल पेड़-पौधों और चमकती संजीवनी बूटी के साथ आकाश मार्ग से आते हुए दिखाया गया।
यह अद्भुत दृश्य देखकर मैदान में मौजूद रामभक्त रोमांचित हो उठे। बड़ी संख्या में दर्शक अपने मोबाइल फोन के कैमरों में इस मनोहारी दृश्य को कैद करते नजर आए। मोबाइल फोन की चमकती रोशनी से पूरा लीला मैदान जगमगा उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।
इसके बाद सुषेण वैद्य की भूमिका निभा रहे अपोलो अस्पताल के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अशोक शर्मा ने संजीवनी बूटी की सहायता से लक्ष्मण जी को स्वस्थ करने का दृश्य प्रस्तुत किया। लक्ष्मण जी के ठीक होते ही पूरा मैदान जय श्रीराम के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा।
अंगद के पांव को हिला नहीं सके रावण के योद्धा
लीला का एक अन्य प्रमुख आकर्षण अंगद और रावण के बीच हुआ संवाद रहा। श्रीराम के दूत के रूप में अंगद जब रावण के दरबार में पहुंचे, तो उन्होंने रावण को माता सीता को लौटाकर युद्ध टालने की सलाह दी। रावण के अहंकार और चुनौतीपूर्ण व्यवहार के बीच अंगद ने अपना पांव जमीन पर जमा दिया और दरबार में मौजूद योद्धाओं को उसे हिलाने की चुनौती दी।
रावण के दरबार का कोई भी योद्धा अंगद का पांव नहीं हिला सका। अंत में जब स्वयं रावण अंगद का पांव हटाने के लिए आगे बढ़ा, तो अंगद ने उसे ललकारते हुए कहा कि यदि पांव ही छूना है, तो प्रभु श्रीराम के चरणों में जाकर शीश झुकाओ।
इस प्रभावशाली दृश्य को आठ-ट्रैक ध्वनि प्रणाली के साथ प्रस्तुत किया गया। संवाद, ध्वनि और कलाकारों के अभिनय के तालमेल ने दर्शकों को बांधे रखा। रामभक्तों ने इस प्रसंग को उत्साह और श्रद्धा के साथ देखा।
असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने किया लीला का अवलोकन
अर्जुन कुमार ने बताया कि असम सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने भी लाल किला मैदान पहुंचकर प्रभु श्रीराम की लीला का अवलोकन किया और भगवान श्रीराम का आशीर्वाद लिया। उनके आगमन पर समिति के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
समिति के महासचिव सुभाष गोयल ने बताया कि असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल सहित अन्य गणमान्य अतिथियों को समिति की ओर से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का हुआ प्रभावशाली मंचन
लीला के दौरान हनुमान जी की वापसी, विभीषण का श्रीराम की शरण में जाना, रामेश्वरम की स्थापना, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण जी का मूर्छित होना, सुषेण वैद्य का आगमन और हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया।
इन दृश्यों के माध्यम से कलाकारों ने भक्ति, त्याग, साहस, धर्म और अहंकार के अंत जैसे संदेशों को दर्शकों तक पहुंचाया। भव्य मंच सज्जा, विशाल क्रेनों से किए गए दृश्य संयोजन और आधुनिक ध्वनि व्यवस्था ने रामलीला के आकर्षण को और बढ़ाया।
इस अवसर पर पवन गुप्ता, सत्यभूषण जैन, अखिल सिंघल, बृजमोहन गोयल, अंकुर गोयल, गौरव सूरी, संदीप भूटानी सहित समिति के अन्य पदाधिकारी और अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
लाल किला मैदान में आयोजित यह रामलीला एक बार फिर दर्शकों के लिए धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक मंच तकनीक का आकर्षक संगम बनकर सामने आई।

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