लाल किला मैदान में 110 फीट ऊंचे रावण का होगा दहन, अहंकार, यातायात और प्रदूषण पर देगा संदेश
कुंभकरण और मेघनाद के पुतले भी होंगे आकर्षण का केंद्र, श्रीराम का तीर लगते ही रावण की नाभि से निकलेगा अमृत और आंखों से बरसेगी आग

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नई दिल्ली। रामायण की कथा में रावण, कुंभकरण और मेघनाद का वध बुराई पर अच्छाई तथा अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। लंकापति रावण अपनी विद्वता, शक्ति और शिवभक्ति के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन उसका अहंकार और अधर्म अंततः उसके विनाश का कारण बना। वहीं, कुंभकरण अपनी असाधारण शारीरिक शक्ति के लिए जाना जाता था, जबकि मेघनाद को इंद्रजीत के नाम से भी जाना जाता था। रामायण के युद्ध में श्रीराम और उनकी सेना ने इन तीनों का अंत कर लंका पर धर्म की विजय का मार्ग प्रशस्त किया। विजयादशमी पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन इसी ऐतिहासिक और धार्मिक प्रसंग की याद दिलाता है।
इसी परंपरा को भव्य रूप देते हुए लाल किला मैदान में आयोजित विश्वविख्यात लव कुश रामलीला में इस वर्ष रावण दहन को विशेष आकर्षण और सामाजिक संदेशों से जोड़ा गया है। लव कुश रामलीला के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि लीला मैदान में रावण का 110 फीट, कुंभकरण का 100 फीट और मेघनाद का 90 फीट ऊंचा पुतला लगाया गया है। विशालकाय पुतलों के दहन के साथ दर्शकों को विशेष दृश्य प्रभावों के माध्यम से रोमांचक अनुभव मिलेगा।
श्रीराम का तीर लगते ही रावण की नाभि से निकलेगा अमृत
अर्जुन कुमार के अनुसार, इस बार रावण दहन के दौरान विशेष तकनीक और दृश्य प्रभावों का इस्तेमाल किया गया है। श्रीराम का तीर लगने के बाद रावण की नाभि से अमृत निकलता हुआ दिखाई देगा। इसके साथ ही रावण की दोनों मटकती आंखों से आग बरसेगी और उसके गले में पड़ी 11 चमकती मालाओं के रंग बदलेंगे। इन विशेष प्रस्तुतियों के माध्यम से रावण दहन को पहले से अधिक आकर्षक और यादगार बनाने की तैयारी की गई है।
पहली बार रावण देगा दिल्लीवासियों को तीन खास संदेश

अर्जुन कुमार ने बताया कि इस बार रावण दहन से पहले रावण के पुतले के माध्यम से दिल्लीवासियों को तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए जाएंगे। इन संदेशों का उद्देश्य केवल रावण के पुतले का दहन देखना नहीं, बल्कि समाज और शहर की समस्याओं पर भी ध्यान आकर्षित करना है।
पहला संदेश: अपने भीतर के अहंकार रूपी रावण को मारें
रावण का पहला संदेश अहंकार को समाप्त करने से जुड़ा होगा। पुतले से आवाज निकलेगी, ”हर साल यहां मैं तो जल जाता हूं, मुझे मेरे अहंकार ने मारा।” इसके माध्यम से लोगों को अपने भीतर छिपे अहंकार, घमंड और नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करने की प्रेरणा दी जाएगी। संदेश होगा कि केवल पुतला जलाने से बुराई का अंत नहीं होता, बल्कि अपने व्यवहार और विचारों में सकारात्मक बदलाव लाना भी जरूरी है।
दूसरा संदेश: यातायात का दबाव घटाने के लिए सार्वजनिक परिवहन अपनाएं
रावण का दूसरा संदेश दिल्ली की यातायात समस्या को लेकर होगा। राजधानी में बढ़ते वाहनों और यातायात के दबाव को कम करने के लिए लोगों से सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की अपील की जाएगी। बस और मेट्रो जैसे साधनों को प्राथमिकता देने से सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाने तथा प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।
तीसरा संदेश: प्रदूषण खत्म करने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाएं
रावण का तीसरा संदेश पर्यावरण संरक्षण और दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण से संबंधित होगा। अर्जुन कुमार के मुताबिक, रावण के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि दूषित हवा न केवल वर्तमान पीढ़ी के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
इस संदेश के तहत लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में योगदान देने की अपील की जाएगी। रावण के संवाद के माध्यम से कहा जाएगा कि दिल्ली को प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
बुराई के अंत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
लाल किला मैदान की लव कुश रामलीला में इस बार रावण दहन धार्मिक आस्था, भव्य दृश्य प्रस्तुति और सामाजिक जागरूकता का संगम बनने जा रहा है। 110 फीट ऊंचे रावण, 100 फीट ऊंचे कुंभकरण और 90 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतलों के साथ विशेष तकनीकी प्रभाव दर्शकों के आकर्षण का केंद्र होंगे। वहीं, अहंकार त्यागने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के संदेश विजयादशमी के पर्व को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ेंगे।
रामायण का मूल संदेश यही है कि शक्ति और ज्ञान के बावजूद अहंकार तथा अधर्म का अंत निश्चित है। इस बार रावण दहन के माध्यम से दिल्लीवासियों को यह याद दिलाने का प्रयास किया जाएगा कि बुराई पर विजय की शुरुआत अपने भीतर बदलाव लाने से होती है।

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