दिल्ली की अशोक विहार रामलीला में कुंभकरण-मेघनाद वध और राम-रावण युद्ध ने मोहा मन
अहंकार पर धर्म की विजय का संदेश

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रामायण में कुंभकरण, मेघनाद और अहिरावण वध के प्रसंग भगवान श्रीराम की विजय यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। रावण का भाई कुंभकरण अपनी विशाल काया और अपार शक्ति के लिए प्रसिद्ध था। युद्ध में रावण की सहायता के लिए उसे नींद से जगाया गया, लेकिन भगवान श्रीराम के साथ युद्ध करते हुए उसका अंत हुआ। रावण का पुत्र मेघनाद, जिसे इंद्रजीत भी कहा जाता है, अपनी मायावी शक्तियों और युद्ध कौशल के लिए जाना जाता था। लक्ष्मण ने युद्ध में उसका वध कर राक्षस सेना को बड़ा आघात पहुंचाया। वहीं, रामायण की कुछ परंपराओं में वर्णित अहिरावण पाताल लोक का शासक था, जो छल से श्रीराम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया था। हनुमान जी ने अहिरावण का वध कर दोनों भाइयों को मुक्त कराया। इन वीरों के अंत के बाद श्रीराम और रावण के बीच निर्णायक युद्ध हुआ, जिसमें अंततः अधर्म और अहंकार का प्रतीक रावण पराजित हुआ।

इन्हीं रोमांचक और प्रेरणादायक प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन अशोक विहार रामलीला कमेटी फेज-1 में किया गया। कुंभकरण, मेघनाद और अहिरावण वध के साथ राम-रावण युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। विशेष रूप से बच्चे युद्ध के रोमांचक दृश्यों को देखकर उत्साहित नजर आए और तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे।
अशोक विहार रामलीला कमेटी फेज-1 के प्रेरक अशोक गुप्ता और चेयरमैन लख्मीचंद मकरानी ने बताया कि दिन की लीला में कुंभकरण के नींद से जागने, रावण के क्रोध, उसके द्वारा भगवान श्रीराम को ललकारने और अहंकार से भरे संवादों का प्रभावशाली मंचन किया गया। इन दृश्यों ने दर्शकों के बीच रोमांच और उत्साह का वातावरण बना दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
राम-रावण के बीच हुए भीषण युद्ध को देखने के लिए दर्शकों में विशेष उत्साह रहा। युद्ध के दौरान दोनों पक्षों के बीच संघर्ष और भगवान श्रीराम की वीरता के दृश्यों को दर्शकों ने खूब सराहा। युद्ध के समापन के बाद भव्य आतिशबाजी की गई और रावण दहन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
कमेटी के प्रधान ललित गर्ग और महामंत्री योगेश गोयल ने बताया कि रावण, कुंभकरण, अहिरावण और मेघनाद के पुतलों का अग्निबाण से दहन किया गया। पुतलों के दहन के दौरान उनसे राम-राम की ध्वनि सुनाई देने का विशेष प्रभाव दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। आतिशबाजी और पुतला दहन के दृश्य देखकर उपस्थित लोगों ने आयोजन का आनंद लिया।

इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद बांसुरी स्वराज सहित कई नेता भी उपस्थित रहे और उन्होंने रामलीला का अवलोकन किया। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश प्रमुखता से देखने को मिला। रामलीला के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।

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