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ओडिसी नृत्य से स्वास्थ्य और सुख का संदेश: ‘दीक्षा 2025’ में गूंजा ‘सर्वे भवन्तु सुखीनाः’

दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण और दमघोंटू हवा के बीच ओडिसी नृत्य के माध्यम से स्वास्थ्य और सुख की कामना

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दिल्ली-एनसीआर इन दिनों गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। दमघोंटू हवा के कारण लोगों की सांसों पर संकट बना हुआ है। ऐसे कठिन समय में कला और संस्कृति ने समाज को सकारात्मक संदेश देने का कार्य किया। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में जयंतिका – मायाधर राउत स्कूल ऑफ ओडिसी डांस के 51वें वार्षिक समारोह ‘दीक्षा 2025’ का आयोजन किया गया, जिसमें ओडिसी नृत्य के माध्यम से ‘सर्वे भवन्तु सुखीनाः, सर्वे संतु निरामया’ का भावपूर्ण संदेश दिया गया।

इस अवसर पर गुरु मधुमिता राउत की 40 शिष्याओं ने अपनी सशक्त और भावप्रवण प्रस्तुतियों के जरिए सभी के उत्तम स्वास्थ्य, सुख और शांति की कामना की। कार्यक्रम की शुरुआत माणिक्य वीणा श्लोकअंगिकाभूमि प्रणाम और मंगलाचरण से हुई। इसके बाद मेघ मल्हारबटुबसंत पल्लवीराग बैरागनाचन्ती कृष्णा और अंत में मोक्ष जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

बाल कलाकारों से लेकर युवतियों तक की प्रस्तुतियों में जीवन, संस्कार, राधा-कृष्ण प्रेम, बटुक भैरव की वंदना और ओडिसी की लयात्मक शैली का सुंदर समन्वय देखने को मिला। हर प्रस्तुति में कला के साथ-साथ स्वास्थ्य और सुख की सामूहिक कामना झलकती रही। दर्शकों ने बार-बार करतल ध्वनि से सभागार को गुंजायमान कर दिया।

     मॉडर्न स्कूल, बाराखंबा रोड की छात्रा अवनी श्रीवास्तव ने अपने प्रभावशाली मंगलाचरण से विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। वहीं अनन्या, अनुषा, बोनिता, रुचिका, रूपिंदर, श्रुति और तृप्ति की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों को खूब प्रभावित किया। कार्यक्रम के मोक्ष फिनाले में समूह प्रस्तुति को दर्शकों ने भरपूर सराहना दी।

उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में प्रस्तुति देने के लिए कुछ कलाकार विदेशों से भी आई थीं, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और अंतरराष्ट्रीय पहचान और अधिक बढ़ गई। कार्यक्रम में उपस्थित स्वर्णिम संगीत महाविद्यालय की प्रिंसिपल श्रावणी बहुगुणा और प्रसिद्ध आर्ट कंसलटेंट एवं क्यूरेटर सीमा सुब्बना ने कहा कि आज के दौर में संस्कृति और परंपराओं को सहेजने में ओडिसी नृत्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम की आयोजक, पद्मश्री गुरु मायाधर राउत की पुत्री एवं शिष्या गुरु मधुमिता राउत ने भावुक स्वर में कहा कि यह पहला आयोजन है, जब वे अपने गुरुजी को मंच पर महसूस नहीं कर पा रही हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व ही गुरु मायाधर राउत का निधन हुआ था। ऐसे में यह समारोह उनके शिष्यों की ओर से एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी रहा।

कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद बड़ी संख्या में दर्शक कार्यक्रम देखने पहुंचे और छात्राओं की प्रतिभा व अनुशासित प्रस्तुति की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन इशिता ने किया।

यह आयोजन न केवल ओडिसी नृत्य की समृद्ध परंपरा का उत्सव था, बल्कि प्रदूषण और तनाव से जूझते समाज को स्वास्थ्य, सुख और सामूहिक कल्याण का सकारात्मक संदेश देने वाला एक सार्थक प्रयास भी साबित हुआ।

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