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भरतनाट्यम में संस्कारों की प्रस्तुति, प्रतिभालय अकादमी का 19वां वार्षिक समारोह संपन्न

प्रतिभालय आर्ट्स अकादमी के वार्षिक समारोह ‘संस्कार’ में गुरु-शिष्य परंपरा, अद्वैत दर्शन और पंचतंत्र की कथाओं का भरतनाट्यम के माध्यम से सशक्त मंचन।

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भोपाल।
नृत्य एवं कला को समर्पित राजधानी भोपाल की प्रतिष्ठित संस्था प्रतिभालय आर्ट्स अकादमी का 19वां वार्षिक समारोह ‘संस्कार’ गुरुवार की शाम रंगश्री लिटल बैले ट्रूप के ऑडिटोरियम में भव्यता के साथ संपन्न हुआ। समारोह में कुल 110 कलाकारों ने भरतनाट्यम की भावपूर्ण, लयबद्ध और आध्यात्मिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दो चरणों में आयोजित इस समारोह में गुरु-शिष्य परंपरा, अनुशासन और संस्कारों का सजीव चित्रण देखने को मिला। नृत्य, भक्ति और समर्पण से सजी प्रस्तुतियों ने भरतनाट्यम की समृद्ध परंपरा को प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा।

नृत्य नाटिका ‘आदि शंकरा’ से समझाई अद्वैत परंपरा

वार्षिक समारोह ‘संस्कार’ का शुभारंभ प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के आवासीय आचार्य स्वामी भूमानंद सरस्वती एवं श्री श्री मां पूर्णप्रज्ञा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रथम प्रस्तुति गणेश पंचस्रोत से आरंभ हुई।

इसके बाद भरतनाट्यम नृत्य नाटिका ‘आदि शंकरा’ की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। इसमें अकादमी के 14 से 42 वर्ष आयु वर्ग के 49 कलाकारों ने भाग लिया। नृत्य नाटिका में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के अद्वैत सिद्धांत को नृत्य के माध्यम से सशक्त रूप में प्रस्तुत किया गया।

प्रस्तुति में यह दर्शाया गया कि कैसे आदि शंकराचार्य ने भारत के विभिन्न कोनों की यात्रा कर अद्वैत वेदांत के मूल सिद्धांतों का प्रचार किया और मानव जीवन को आशा, आनंद, ज्ञान, पूर्णता, स्वतंत्रता एवं शांति का मार्ग दिखाया।

उत्कृष्ट संगीत एवं मंचीय सहयोग

इस नृत्य नाटिका में पार्श्व स्वर राजीव वर्मा, स्मृति शर्मा, उमेश तरकसवार और तनिष्का हतवलने का रहा। सितार पर स्मिता नागदेव, गायन में हर्षिता एवं मट्टूर श्रीनिधि, वायलिन में मट्टूर श्रीनिधि, बाँसुरी पर शशांक ने संगत दी।

संगीत संरचना एवं ताल वाद्य यंत्र डॉ. राममूर्ति केशवन, पार्श्व संगीत उमेश तरकसवार, संगीत सहायक कबीर तरकसवार और मंच संचालन विनय उपाध्याय द्वारा किया गया।

पंचतंत्र पर आधारित नृत्य नाटिका ‘चत्वारि यथार्थ मित्राणि’ ने जीता दिल

 

समारोह के दूसरे चरण में पंचतंत्र की कथा पर आधारित भरतनाट्यम नृत्य नाटिका ‘चत्वारि यथार्थ मित्राणि’ का मंचन किया गया। अकादमी के बाल कलाकारों ने पंचतंत्र के दूसरे भाग ‘मित्र संप्राप्ति’ को नृत्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया।

इस नृत्य नाटिका में चित्रांग (हिरण) और उसके मित्र — कौवा लघुपतनक, चूहा हिरण्यक और कछुआ मंथरक की मित्रता की प्रेरक कहानी को मंच पर जीवंत किया गया। प्रस्तुति ने सच्ची मित्रता, सहयोग और संकट के समय साथ निभाने का संदेश प्रभावशाली ढंग से दिया।

तीन भाषाओं में संवाद बना अनूठा प्रयोग

इस प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि संवाद संस्कृत, हिंदी और अंग्रेज़ी तीनों भाषाओं में प्रस्तुत किए गए।
गुरु डॉ. मंजू मणि हतवलने ने बताया कि पंचतंत्र की कथा को भरतनाट्यम और नाट्य के समन्वय के साथ तीन भाषाओं में प्रस्तुत करना अपने आप में एक अभिनव और पहला प्रयोग है, जो शास्त्रीय नृत्य नाटिकाओं में नवाचार का उदाहरण है।

निर्देशन और नृत्य संरचना

‘चत्वारि यथार्थ मित्राणि’ का निर्देशन एवं नृत्य संरचना डॉ. मंजू मणि हतवलने, सह-निर्देशन विशाल हतवलने, कोरियोग्राफी सहायक एवं अभिनय मार्गदर्शन सुश्री तनिष्का हतवलने द्वारा किया गया। पार्श्व संगीत आशीष प्रसाद (राशीष) एवं आशीष का रहा।

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