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लोकतंत्र बचाने की जिम्मेदारी हम सबकी -प्रो. आनंद कुमार

जेपी आंदोलन के तब के साथी और गवाह रहे वरिष्ठ समाजवादी-क्रांतिकारी नेताओं ने न केवल अपने अनुभव सुनाये, बल्कि उस दौर में की गयी ज्यादतियों का सिलसिलेवार वर्णन करते हुए जेपी के विचारों के प्रसार पर बल दिया।

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बीती 8 अक्टूबर को संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्य तिथि पर नयी दिल्ली स्थित नारायण दत्त तिवारी भवन के सभागार में लोकनायक जयप्रकाश अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन विकास केन्द्र और लोकतंत्र बचाओ अभियान के तत्वावधान में श्रृद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें सर्वप्रथम प्रख्यात समाजशास्त्री प्रोफेसर आनंद कुमार,राष्ट्र सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष सुरेश खैरनार, छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक कुमार शुभमूर्ति, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, जद यू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष गाधी शांति प्रतिष्ठान भागलपुर राम शरन, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित, बिहार राष्ट्र सेवा दल के अध्यक्ष मोहम्मद शाहिद कमाल, सर्व सेवा संघ के राष्ट्रीय नेता प्रमुख गांधीवादी रामधीरज भाई, समाजवादी चिंतक विजय प्रताप, जेपी आंदोलन के प्रमुख साथी, प्रखर वक्ता व क्रांतिकारी नेता सर्वश्री घनश्याम भाई, सुशील कुमार, प्रभात कुमार, श्री अरुण, श्री मदन, श्रीकंचन, लोकतंत्र बचाओ अभियान के संयोजक भाई राकेश रफीक, एलजेपीआईएसडीसी के राष्ट्रीय महासचिव  अभय सिन्हा, पत्रकार, लेखक एवं पर्यावरणविद व राष्ट्रीय पर्यावरण सुरक्षा समिति के अध्यक्ष ज्ञानेन्द्र रावत, पर्यावरणविद प्रशांत सिन्हा आदि ने दीप प्रज्वलित कर लोकनायक जयप्रकाश के चित्र पर माल्यार्पण  कर अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित की।
इसके उपरांत केन्द्र के महासचिव अभय सिन्हा ने जेपी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला और जेपी के बताये रास्ते पर चलने पर बल दिया और कहा कि हमारा प्रयास है कि जेपी के सभी अनुयायी एक मंच पर आकर सच्ची आजादी की लडा़ई के लिए आगे बढे़ं। इसके बाद जेपी आंदोलन के तब के साथी और गवाह रहे वरिष्ठ समाजवादी-क्रांतिकारी नेताओं ने न केवल अपने अनुभव सुनाये, बल्कि उस दौर में की गयी ज्यादतियों का सिलसिलेवार वर्णन करते हुए जेपी के विचारों के प्रसार पर बल दिया।
     अपने प्रमुख सम्बोधन में जेपी आंदोलन में अग्रणी प्रमुख भूमिका निबाहने वाले प्रख्यात समाजशास्त्री, जेएन यू के चर्चित प्रोफेसर आनंद कुमार ने 1942 और 1974 के जेपी और आंदोलन के दौर की विषमताओं-विशेषताओं का सिलसिलेवार वर्णन किया और कहा कि उस समय आंदोलनकारियों को तानाशाही के विरोध करने और लोकतंत्र की रक्षा हेतु संघर्ष में किन किन तरह की दुश्वारियों का सामना करना पडा़ था लेकिन आंदोलन के महानायक जयप्रकाश जी के नेतृत्व का ही परिणाम रहा कि हमें अपने आंदोलन में न केवल कामयाबी मिली बल्कि तानाशाही सरकार को उखाड़ने में और जनता की सरकार बनाने में सफल हुए। लेकिन दुख है कि आज भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और हालात उससे भी भयावह हैं। इसलिए समय की मांग है कि लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में किये जा रहे यज्ञ में सभी लोग आपसी मतभेद-मनभेद भुलाकर जी जान से कूद पडे़ं क्योंकि याद रखो लोकतंत्र बचेगा, तो हम बचेंगे, देश बचेगा। इसलिए आओ और इस संघर्ष के लिए कमर कसकर तैयार हो जाओ। इस दिशा में जन जागृति बहुत जरूरी है। यदि हम अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन करने में नाकाम रहे तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा।
श्रृद्धांजलि सभा में मौजूद सृष्टि फाउण्डेशन के प्रमुख सरदार सुखविंदर सिंह, प्रयास एक आशा की प्रमुख जयश्री सिन्हा, सामाजिक कार्यकर्ता मो. रिजवान,विनय खरे, राजेश सिन्हा, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी भारतीय रेल सुशील कुमार सिन्हा, प्रख्यात बालीवाल। खिलाडी़ रजनी श्रीवास्तव, यमुना नदी के पुत्र के रूप में विख्यात अशोक उपाध्याय, वृक्ष मित्र आशीष शर्मा, जया श्रीवास्तव व प्रवीन इब्बन आदि अनेकों सामाजिक-पर्यावरण व लोकतंत्र बचाओ अभियान के कार्यकर्ताओं ने जेपी के चित्र पर अपने श्रृद्धासुमन अर्पित कर अपने महानायक की स्मृतियों को जीवंत किया। अंत में केन्द्र के महासचिव अभय सिन्हा, पर्यावरणविद ज्ञानेन्द्र रावत व लोकतंत्र बचाओ अभियान के संयोजक राकेश रफीक भाई ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
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