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Tulip Festival Delhi 2026: डच संस्कृति का प्रतीक ट्यूलिप, दिल्ली में दिखी यूरोप की बागवानी विरासत

भारत-नीदरलैंड्स मित्रता का प्रतीक बना पुष्पोत्सव, रंग-बिरंगे ट्यूलिप्स ने महकाया राजदूत आवास

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राजधानी दिल्ली स्थित नीदरलैंड्स के राजदूत आवास का उद्यान एक बार फिर 50,000 खिले हुए ट्यूलिप्स की रंगीन छटा से सजा नजर आया। फरवरी की सुहानी सुबह में यह नजारा विश्वप्रसिद्ध Keukenhof गार्डन की याद दिलाता दिखा। पुष्पों की इस भव्य प्रदर्शनी ने प्रकृति की सुंदरता को भारत-नीदरलैंड्स की सांस्कृतिक मित्रता के साथ खूबसूरती से जोड़ दिया।

राजदूत आवास का विस्तृत बगीचा इस पुष्पोत्सव की आकर्षक पृष्ठभूमि बना। जैसे कमल भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, उसी प्रकार ट्यूलिप नीदरलैंड्स की पहचान का अभिन्न हिस्सा है। यह फूल केवल एक मौसमी आकर्षण नहीं, बल्कि आशा, ऊर्जा और वसंत के आगमन का संदेशवाहक माना जाता है।

मध्य एशिया से यूरोप तक ट्यूलिप की यात्रा

ट्यूलिप की उत्पत्ति मध्य एशिया में हुई, जहां से इसे उस्मानी साम्राज्य ने अपनाया और 16वीं सदी में यह यूरोप पहुंचा। समय के साथ यह डच संस्कृति में इस कदर रच-बस गया कि राष्ट्रीय प्रतीक का दर्जा प्राप्त कर लिया।

आज विश्वभर में ट्यूलिप की 3,000 से अधिक आधिकारिक किस्में पंजीकृत हैं—साधारण एकरंगी फूलों से लेकर दुर्लभ और आकर्षक पैटर्न वाली प्रजातियों तक। लोकप्रियता के चरम पर कई किस्मों को ‘एडमिरल’ और ‘जनरल’ जैसे नाम दिए गए, जबकि कुछ का नाम ऐतिहासिक व्यक्तित्वों पर रखा गया।

वर्ष 2005 में मिस वर्ल्ड रहीं Aishwarya Rai Bachchan के नाम पर एक दुर्लभ पीले-लाल ट्यूलिप का नामकरण किया गया था, जो इस फूल की वैश्विक सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।

‘ट्यूलिप मैनिया’ और ऐतिहासिक दीवानगी

17वीं सदी में नीदरलैंड्स में “ट्यूलिप मैनिया” का दौर शुरू हुआ, जब दुर्लभ ट्यूलिप कंदों की कीमतें आसमान छूने लगीं। उस समय Amsterdam Stock Exchange में इन कंदों की खरीद-फरोख्त घरों की कीमत के बराबर तक पहुंच गई थी। हालांकि यह उन्माद धीरे-धीरे थम गया, लेकिन ट्यूलिप की लोकप्रियता विश्वभर में फैलती चली गई और आज यह वसंत उत्सवों का प्रमुख आकर्षण है।

इंडो-डच संबंधों की गर्माहट

Marisa Gerards और उनके पति Peter Koope ने अपने आवास और उद्यान के द्वार अतिथियों के लिए खोलकर भारत और नीदरलैंड्स की प्रगाढ़ मित्रता का उत्सव मनाया।

राजदूत ने कहा, “यह उत्सव भारत और नीदरलैंड्स के बीच जीवंत साझेदारी का प्रतीक है। हमारे बगीचे में खिले ट्यूलिप सहयोग और साझा विकास की भावना को दर्शाते हैं। इस महोत्सव के दूसरे संस्करण के साथ हमें खुशी है कि यह एक वार्षिक परंपरा बनता जा रहा है, जो दोनों देशों के समुदायों को और करीब ला रहा है तथा इंडो-डच संबंधों की गर्माहट को रेखांकित करता है।”

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