मेरे अलफ़ाज़/कवितासाहित्य

साहित्य मंच पर वरिष्ठ कथाकारों की कहानियों का पाठ

सतीश जायसवाल, हीरालाल नागर और भावना शेखर ने अपने कहानी पाठ से छुए समाज और संवेदना के विविध आयाम

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साहित्य अकादमी द्वारा सोमवार को आयोजित ‘साहित्य मंच’ कार्यक्रम में तीन वरिष्ठ कथाकारों सतीश जायसवाल, हीरालाल नागर और भावना शेखर ने अपनी कहानियों का वाचन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत भावना शेखर की कहानी ‘इज्जतदार आदमी’ से हुई, जो दो पुरुषों के दंभ और अपनी पत्नियों को वस्तु समझने की मानसिकता पर आधारित थी। कहानी के अंत में महिलाओं द्वारा उस दंभ को तोड़ने की साहसिक प्रस्तुति ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।

इसके बाद हीरालाल नागर ने ‘उस दिन की बात’ शीर्षक से अपनी कहानी का पाठ किया। यह कहानी असम की पृष्ठभूमि पर आधारित थी और स्त्री के भावनात्मक शोषण तथा उसकी त्रासदी को पुरुष दृष्टिकोण से उभारती है। अकार पत्रिका में छपी यह पुरानी कहानी भी स्त्री के भावनात्मक शोषण पर आधारित थी और असम की पृष्ठभूमि पर बुनी हुई थी। कहानी स्त्री की दोनों सीमाओं को प्रतिरूपित करते हुए उसकी त्रासदी को पुरुषों के अलग-अलग नजरियों को प्रस्तुत करती हुई थी

अंत में सतीश जायसवाल ने ‘अब यह शहर’ कहानी सुनाई, जो भिलाई की एक एंग्लो-इंडियन कॉलोनी में आए बदलावों और प्रेम की त्रासदी को दर्शाती है। आधी शताब्दी पुरानी यह कहानी अपने कथ्य और बिंबों की ताजगी के कारण आज की सामाजिक सच्चाइयों से जुड़ी प्रतीत हुई।

कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादेमी के उपसचिव देवेंद्र कुमार देवेश ने किया। इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ कथाकारों के साथ युवा लेखक और छात्र भी उपस्थित थे।

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