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फाइफा की चेतावनी: तंबाकू टैक्स से बढ़ेगा अवैध कारोबार

फाइफा की रिपोर्ट में एफसीवी तंबाकू बिक्री घटने और रोजगार नुकसान की चेतावनी

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फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर्स एसोसिएशंस (फाइफा) ने तंबाकू पर बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फाइफा द्वारा जारी एक नई विशेषज्ञ रिपोर्ट में कहा गया है कि तंबाकू टैक्स में हालिया बढ़ोतरी से लाखों किसानों और खेतिहर मजदूरों की आजीविका पर गहरा नकारात्मक असर पड़ सकता है, खासकर फ्लू-क्योर वर्जीनिया (एफसीवी) तंबाकू उगाने वाले किसानों पर।

एफसीवी तंबाकू की बिक्री में 20% गिरावट की आशंका

रिपोर्ट के अनुसार, सिगरेट पर नए टैक्स के चलते एफसीवी तंबाकू फसलों की बिक्री में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आने की संभावना है। इसके साथ ही खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में करीब 26 लाख मानव-दिन (मैन-डेज) के रोजगार का नुकसान हो सकता है।

फाइफा का कहना है कि ऐसे समय में जब देश पहले से ही रोजगार संकट से जूझ रहा है, यह स्थिति तंबाकू किसानों, महिलाओं समेत कृषि मजदूरों और वेयरहाउसिंग, नीलामी, परिवहन जैसी संबंधित गतिविधियों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए बड़ा झटका साबित होगी।

दक्षिण भारत के किसानों पर सबसे ज्यादा असर

फाइफा के अध्यक्ष मुरली बाबू ने कहा कि नया टैक्स विशेष रूप से दक्षिण भारत में एफसीवी तंबाकू उगाने वाले किसानों को प्रभावित करेगा। उन्होंने बताया कि दंडात्मक और भेदभावपूर्ण टैक्स नीति तथा अवैध तंबाकू व्यापार के कारण भारतीय एफसीवी किसानों की बाजार हिस्सेदारी पहले ही 21 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है।

उनका कहना है कि टैक्स में और बढ़ोतरी से किसानों के पास विकल्प और सीमित हो जाएंगे, जिससे वे स्थायी रूप से हाशिए पर चले जाने के खतरे में हैं।

अवैध तंबाकू व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक टैक्सेशन उपभोक्ताओं को सस्ते, गैर-नियंत्रित और अवैध तंबाकू उत्पादों की ओर धकेल सकता है। इससे न सिर्फ वैध किसानों को नुकसान होगा, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के उद्देश्यों पर भी असर पड़ेगा।

अनुमान के मुताबिक, बढ़ी कीमतों के कारण अवैध तंबाकू उत्पादों की मांग में 39 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है और सिगरेट की कुल अवैध खपत 46 अरब स्टिक से अधिक पहुंच सकती है।

राजस्व लाभ से ज्यादा होगा आर्थिक नुकसान

इस रिसर्च को तैयार करने वाली अर्था आर्बिट्रेज कंसल्टिंग एलएलपी के नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि एफसीवी तंबाकू क्षेत्र पहले से ही संरचनात्मक दबाव में है। नई टैक्स व्यवस्था से पहले भी एफसीवी तंबाकू पर बीड़ी और चबाने वाले तंबाकू की तुलना में 30 से 50 गुना ज्यादा टैक्स लगाया जा रहा था।

उनके अनुसार, हालिया एक्साइज ड्यूटी बढ़ोतरी से यह असंतुलन और गहराएगा, जिससे औपचारिक और राजस्व-उत्पादक खपत की बजाय अनौपचारिक और अवैध खपत बढ़ेगी। इससे सरकार को मिलने वाला राजस्व लाभ, कृषि आय में गिरावट और रोजगार नुकसान की तुलना में काफी कम रह सकता है।

छोटे और सीमांत किसानों की रीढ़ है तंबाकू खेती

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में तंबाकू की खेती ज्यादातर छोटे और सीमांत किसान करते हैं, जो कम उपजाऊ और वर्षा-आधारित भूमि पर निर्भर रहते हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद तंबाकू खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और राष्ट्रीय राजस्व में भी बड़ा योगदान देती है।

वैश्विक अध्ययन भी देते हैं चेतावनी

रिपोर्ट में 71 देशों पर किए गए एक वैश्विक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि सिगरेट की कीमत में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी से अवैध व्यापार में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि होती है। एक बार अवैध बाजार मजबूत हो जाए, तो केवल सख्त प्रवर्तन से उसे खत्म करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

संतुलित टैक्स नीति की मांग

फाइफा ने सरकार से आग्रह किया है कि वह टैक्स नीति बनाते समय किफायत, रोजगार, किसानों की आय और अवैध व्यापार जैसे पहलुओं को संतुलन में रखे। संगठन का कहना है कि बिना संतुलन की टैक्स व्यवस्था से कानूनी बिक्री घटेगी, सरकारी राजस्व कम होगा, संगठित अपराध बढ़ेगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी खतरा पहुंचेगा।

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