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मुखर्जी नगर को सीलिंग की मार से बचाने की मुहिम तेज
पिछले तीन दिनों से लोग गांधी विहार में मौन मार्च निकालकर इस मुद्दे पर विरोध जता रहे हैं

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मुखर्जी नगर: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों का प्रमुख केंद्र मुखर्जी नगर अब सीलिंग की मार से बचाने के लिए एकजुट हो गया है। इस अभियान में स्थानीय कोचिंग संस्थान, व्यापारी, पीजी संचालक, छात्र, और स्थानीय निवासी सभी मिलकर सक्रिय हैं। सभी ने मिलकर एकजुटता दिखाई है और अपनी मांगों के लिए आवाज उठाई है।
मौन मार्च और ज्ञापन:
पिछले तीन दिनों से लोग गांधी विहार में मौन मार्च निकालकर इस मुद्दे पर विरोध जता रहे हैं। इस दौरान, उन्होंने भाजपा सांसद मनोज तिवारी से भी मुलाकात की और उन्हें अपनी समस्याओं के बारे में ज्ञापन सौंपा। बुधवार को तीमारपुर के विधायक दिलीप पांडेय ने मेयर शैली ओबेरॉय से मुलाकात कर मुखर्जी नगर को सीलिंग से राहत देने के लिए ज्ञापन प्रस्तुत किया।
सीलिंग के कारण आर्थिक संकट:
सीलिंग की वजह से मुखर्जी नगर की आर्थिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थानीय व्यापारियों और छात्रों का कहना है कि मास्टर प्लान में दो तरह के नियम नहीं होने चाहिए। उनका प्रश्न है कि राजेंद्र नगर में कोचिंग संस्थान कैसे चल रहे हैं, जबकि मुखर्जी नगर के कोचिंग संस्थानों और निजी लाइब्रेरियों को बंद कर दिया गया है। यह असमानता केवल छात्रों और स्थानीय व्यापारियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे इलाके की आर्थिक स्थिति के लिए भी गंभीर खतरा बन गई है।
जनसभा की योजना:
मुखर्जी नगर बचाव मुहिम कोर कमेटी के सदस्य क्रिस्टोफर, राजकुमार सर और राजीव सहगल ने मौन मार्च के दौरान 11 अक्तूबर शाम को मुखर्जी नगर में एक बड़ी जनसभा करने की घोषणा की है। इस जनसभा का उद्देश्य और अधिक लोगों को जागरूक करना और अपनी मांगों को मजबूती से प्रस्तुत करना है।
बेरोजगारी की समस्या:
स्थानीय व्यापारियों और छात्रों का कहना है कि सीलिंग के कारण बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो गई है। एसएस भारती, संजय कुमार, सुनैना अरोड़ा और राजेश चावला ने कहा कि यह स्पष्ट है कि सभी कोचिंग सेंटर जिम्मेदार तरीके से काम कर रहे हैं और एमसीडी गलत तरीके से सीलिंग कर रही है। इसके अलावा, फायर विभाग एनओसी देने में भी टालमटोल कर रहा है, जिससे क्षेत्र का विकास ठप हो गया है। बेरोजगारी की समस्या से प्रभावित लोग, जिनमें व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले, खोमचे वाले और रिक्शा चालक शामिल हैं, सभी एक कठिन समय से गुजर रहे हैं।
स्थानीय नेताओं का आश्वासन:
इस बीच, कुमार गौतम ने बताया कि दिल्ली की मेयर शैली ओबेरॉय और स्थानीय विधायक दिलीप पांडेय ने आश्वासन दिया है कि वे एमसीडी से संबंधित समस्याओं का समाधान ढूंढेंगे। उन्होंने सीलिंग की प्रक्रिया को रद्द करने का भी भरोसा दिया है, जिससे छात्रों और व्यापारियों को राहत मिल सके।

सामुदायिक समर्थन:
मौन मार्च में गौरव तुल्ली, केसरी, कोमल गर्ग, कुलदीप ढलोरिया, रणजीत सिंह, रोहित मलिक, भूपिंदर सिंह सहित कई लोग शामिल हुए। ये सभी इस मुहिम का समर्थन कर रहे हैं और एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं कि मुखर्जी नगर को सीलिंग के प्रभाव से बचाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
मुखर्जी नगर में चल रही इस मुहिम का उद्देश्य केवल सीलिंग से बचना नहीं है, बल्कि छात्रों और स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति को सुधारना भी है। यह आंदोलन दिखाता है कि जब समुदाय एकजुट होता है, तो वह अपने हक के लिए लड़ सकता है।
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