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स्वर्गीय पं.गोविन्द बल्लभ पंत की 135वीं जयंती

भारतीय संविधान में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने और जमींदारी प्रथा को खत्म करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

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स्वर्गीय पं.गोविन्द बल्लभ पंत जी की 135वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को पंडित पंत मार्ग स्थित उनकी प्रतिमा पर नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् के उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने पुष्पों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर अजीत डोभाल, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, श्रीमती इला पन्त लोकसभा की पूर्व सदस्य, सुनील पन्त पुत्र पूर्व रक्षा मंत्री के.सी.पन्त, मुख़्तार अब्बास नकवी, पूर्व केंद्रीय मंत्री, डॉ हर्ष वर्धन, पूर्व मंत्री, रामवीर सिंह बिधूड़ी, नेता विपक्ष तथा कई गणमान्य अथितियो ने उनकी प्रतिमा पर फूल अर्पित किए। कार्यक्रम गोविन्द बल्लभ पंत मेमोरियल सोसाइटी द्वारा आयोजित किया गया था।
सतीश उपाध्याय ने कहा कि गोविंद बल्लभ पंत को देश के सबसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों और एक प्रशासक के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने आधुनिक भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सन् 1957 में गणतंत्र दिवस पर महान् देशभक्त, कुशल प्रशासक, सफल वक्ता, तर्क का धनी एवं उदारमना पन्त जी को भारत की सर्वोच्च उपाधि ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया गया। उन्होंने बताया कि भारत रत्न का सम्मान उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत के गृहमंत्री के रूप में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद द्वारा प्रदान किया गया था। गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी थे और इसके बाद में वे भारत के गृहमंत्री भी बने। भारतीय संविधान में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने और जमींदारी प्रथा को खत्म करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनका जन्म अल्मोड़ा, उत्तराखंड में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अपनी डिग्री हासिल की और काशीपुर में कानून का अभ्यास किया। उन्होंने कहा कि एक रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखते थे लेकिन उनके विचार प्रगतिशील और आधुनिक थे। वह धर्म या आर्थिक स्थिति के नाम पर लोगों को वंचित करने में विश्वास नहीं रखते थे। उन्होंने पश्चिमी शिक्षा को बढ़ावा दिया और उनका मानना था कि लोगों के पास अपने अधिकारों का उपयोग करने की शक्ति होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि गोविंद बल्लभ पंत एक उत्कृष्ट वक्ता थे जो अपने प्रभावशाली भाषणों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया करते थे। वह एक महान व्यक्ति थे और उन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। उनका नाम हमारे दिमाग से कभी नहीं छूटेगा ! वह हमारे इतिहास की किताबों में रहेंगे और उनकी कहानियां युवाओं को देश और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए प्रेरित करेंगी।
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