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परीक्षा पर चर्चा के बहाने प्रधानमंत्री सीखा रहे जीवन के गुर -डॉ विनोद बछेती
प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह से परीक्षा को लेकर सहजता से अपनी बात कहते हैं उससे छात्रों के जीवन में काफी बदलाव महसूस किया गया है।

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भारत देश में परीक्षा को लेकर कई मिथकीय और शाश्वत विचार हैं जिसे पिछले कुछ सालों से हमारे प्रधानमंत्री तोड़ रहे हैं। लोगों के ज़हन से परीक्षा का फोबिया उतारने का काम हमारे प्रधानमंत्री लगाकर कर रहें हैं। प्रधानमंत्री मन की बात में परीक्षा की बारीकियों को बता रहें हैं। जिससे परीक्षार्थियों को काफी लाभ मिलता रहता है उनके मन में परीक्षा को लेकर जो डर होता है उसे खत्म करने में अधिक मदद मिलती है। परीक्षा के साथ-साथ जीवन में बेहतर करने के लिए सहायता मिलती है।
“मन की बात” में परीक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी बेहतर तरीके से एक शिक्षक और दोस्त की तरह अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। लगातार देश हित के कार्यों में समर्पित हमारे प्रधानमंत्री जिस तरह विद्यार्थियों को सही दिशा-निर्देश दे रहे हैं वैसा जज़्बा कम लोगों में देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री देश की जिम्मेदारी के साथ-साथ भारत के छात्रों की जिम्मेदारी को एक अभिभावक (Guardian) की तरह निभा रहे हैं यही कार्य उन्हें देश के नेताओं से अगल बनाती है। प्रधानमंत्री केवल परीक्षा के बारे में नहीं सिखाते बल्कि वो छोटी-छोटी बातों और अपने जीवन के उदाहरण से बताते हैं कि विपरीत परिस्थितियों संयम कैसे रखना है और आगे बढ़ना है। जीवन तो इन परीक्षाओं से काफी बड़ा और बेहतर है।
जब प्रधानमंत्री मोदी शिक्षकों से यह कहते है कि अगर कोई छात्र किसी तरह का सवाल पूछता है तो इसके पीछे के मनोविज्ञान को समझने की जरूरत है कि आखिर उसके मन में यह सवाल कहां से आया तो आप पाएंगे कि वे छात्र जिज्ञासु प्रवृति (inquisitive nature) का है यानी उससे जाने में दिलचस्पी है ऐसे छात्रों को मेधावी छात्रों की सूची में रखा जाता है और उन्हें बेहतर से बेहतर दिशा में आगे बढ़ाए जाने की जिम्मेदारी एक शिक्षक की होती है। प्रधानमंत्री आगे कहते हैं कि आज के समय में छात्र गैजेट्स की और अधिक दिलचस्पी दिखा रहा है मगर उन्हें स्मार्ट बनना है लेकिन सिर्फ गैजेट्स को लेकर स्मार्ट नही बनना है। प्रधानमंत्री ने अपने जीवन में जो भी सीखा उस अनुभव के आधार पर अपनी बात को छात्रों के समक्ष रखते हैं और उसका लाभ हमारे देश के युवा छात्रों पर पड़ता है जीवन सही मार्ग चुनने में बहुत सहायता मिलती है।
देश के प्रधानमंत्री जब यह कहते हैं की छात्रों को अपनी क्षमता का ज्ञान होना बेहद जरूरी है ताकि वह लगातार उस पर काम कर सके क्योंकि छात्र जीवन में उस पर आप बेहतर काम कर सकते हो। प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह से परीक्षा को लेकर सहजता से अपनी बात कहते हैं उससे छात्रों के जीवन में काफी बदलाव महसूस किया गया है। इतना ही नहीं वो सीधे छात्रों से जुड़कर उनके सवाल सुनते हैं उनकी जिज्ञासा के पीछे का सच जानने की कोशिश करते हैं और फिर उसे आसान शब्दों में समझाते हैं ताकि वो भविष्य में बेहतर कार्य कर सके। देश के छात्र देश का भविष्य है।
कोई भी ऐसे ही महान नहीं बन जाता उसके लिए त्याग करना पड़ता है और लगातार कार्य करना पड़ता है। एक सकारात्मक दिमाग और रचनात्मक सोच का व्यक्ति ही ऐसी बातें कर सकता है। जिसकी हर बात देश हित से जुड़ी है। देश के हर कोने से जुड़ने वाले छात्र आज प्रधानमंत्री के जीवन से बहुत कुछ सीख रहे हैं उनकी प्रेरणा से आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत भाग्य विधाता के रुप को सार्थक रुप दें रहें हैं।
-लेखक चेयरमैन डीपीएमआई
भारतीय जनता पार्टी
मयूर विहार ज़िला अध्यक्ष हैं।





