ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज, समय पर इलाज से बच सकती है जान
श्री अग्रसेन इंटरनेशनल हॉस्पिटल और इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन की संयुक्त संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताए स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण और आधुनिक उपचार के तरीके

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ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति है, जिसमें समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचाने के साथ स्थायी विकलांगता के खतरे को भी कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से श्री अग्रसेन इंटरनेशनल हॉस्पिटल, रोहिणी और इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में ब्रेन स्ट्रोक विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें चिकित्सकों को स्ट्रोक की शीघ्र पहचान, आधुनिक उपचार पद्धतियों और मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के प्रति जागरूक किया गया।
संगोष्ठी में ब्रेन स्ट्रोक के कारणों, शुरुआती लक्षणों, जोखिम कारकों और उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर डॉ. सुधीर पांडेय और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. निशा सिंह ने विशेषज्ञ जानकारी साझा करते हुए बताया कि ब्रेन स्ट्रोक के मामले में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। इलाज में देरी होने से मस्तिष्क की कोशिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में लक्षणों की पहचान कर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी है।
ब्रेन स्ट्रोक के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों ने बताया कि चेहरे का एक तरफ टेढ़ा हो जाना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी अथवा सुन्नपन महसूस होना, बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी होना, अचानक चक्कर आना, चलने में असंतुलन और तेज सिरदर्द ब्रेन स्ट्रोक के संभावित लक्षण हो सकते हैं। इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर मरीज को बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। लक्षण कुछ समय बाद ठीक हो जाएं, तब भी चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है, ताकि मरीज और उसके परिजन समय रहते उचित कदम उठा सकें। तत्काल चिकित्सा सहायता मिलने से उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
सेरेब्रल एंजियोग्राम से मिलती है उपचार में मदद
संगोष्ठी के दौरान सेरेब्रल एंजियोग्राम की उपयोगिता पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह जांच मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में रुकावट, संकुचन और अन्य असामान्यताओं का पता लगाने में सहायक होती है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर चिकित्सक मरीज की स्थिति का आकलन कर उचित उपचार योजना तैयार कर सकते हैं।
विशेषज्ञों ने आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ समय पर जांच और सही चिकित्सकीय निर्णय के महत्व पर भी जोर दिया।
उच्च रक्तचाप और मधुमेह बढ़ाते हैं स्ट्रोक का खतरा
श्री अग्रसेन इंटरनेशनल हॉस्पिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. आनंद बंसल ने बताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अनियमित जीवनशैली ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इन कारकों पर नियंत्रण रखकर स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने कहा कि रक्तचाप, रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
जागरूकता और समय पर उपचार पर जोर
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा— “समय ही मस्तिष्क है, हर सेकंड जीवन बचाने का अवसर है।” इस संदेश के माध्यम से लोगों को ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान करने और आपात स्थिति में बिना देर किए चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।
अस्पताल के प्रमुख संस्था प्रभारी घनश्याम गुप्ता जावेरी ने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ गंभीर बीमारियों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना भी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और ऐसे संकेत दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता लें।

संगोष्ठी में अस्पताल प्रबंधन की ओर से ज्ञान अग्रवाल, के.एल. गर्ग, नरेश बंसल, मुनीश बंसल और अनिल गुप्ता भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से ब्रेन स्ट्रोक की समय पर पहचान, त्वरित उपचार और बचाव के उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।

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