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स्वामी स्वरूपानंद जी का चिन्तन राष्ट्र को सदा जागृत रखेगा-प्रो वरखेड़ी
भारतीय संस्कृति स्वामी स्वरूपानंद जी के दर्शन से सदा आलोकित होती रहेगी क्योंकि भारत की आत्मा साधु-सन्तों की वाणी में भी वसती है।

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भारतीय दर्शन तथा संस्कृति के जाने माने विद्वान और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी के बह्मलीन होने पर अपने तथा अपने विश्वविद्यालय परिवार की ओर से हार्दिक शोक अभिव्यक्त करते हुए कहा है कि आदरणीय स्वामी जी का पार्थिव शरीर हमलोगों के बीच अब नहीं रहा। लेकिन उनके सनातनी समन्वित चिन्तन तथा दर्शन भारतीय जीवन पद्धति को सर्वदा आलोकित करता रहेगा। स्वामी जी का व्यक्तित्व देश, समाज तथा विश्व कल्याण के लिए अर्पित रहा है।

ध्यातव्य है कि न केवल भारतीय सभ्यता, संस्कृति एवं अध्यात्म अपितु मठ तथा साधू संतों का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (Indian freedom struggle) में जब कभी भी योगदान की बात होगी, द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी भी अवश्य स्मरण किये जाएंगे क्योंकि 02सितंबर1924 मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में अवतरित पोथीराम उपाध्याय के नाम से ख्यात स्वामी जी ने बहुत कम आयु में ही सन् 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया। इसके कारण इन्हें एक क्रांतिकारी संन्यासी के रुप में भी लोकप्रियता मिली।
समाज सुधारक तथा स्वतन्त्रता सेनानी स्वामी स्वरूपानंद जी को करपात्री जी महाराज के ‘राम राज्य परिषद्’ का अध्यक्ष होने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती, शारदा पीठ इनके सांस्कृतिक तथा अध्यात्मिक व्यक्तित्व से प्रभावित होकर इन्हें दण्ड संन्यास की दीक्षा दी और इसके बाद स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के नाम से विश्वविख्यात हुए।
स्वामी स्वरूपानंद जी का व्यक्तित्व समन्वित राष्ट्र निर्माण, त्याग, तपस्या, मानवता की रक्षा, भारतीय तथा सनातनी धर्म का पर्याय था। कुलपति प्रो वरखेड़ी जी ने अपनी भाव पूरित श्रद्धांजलि(Tribute) देते हुए यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति उनके दर्शन से सदा आलोकित होती रहेगी क्योंकि भारत की आत्मा साधु- सन्तों की वाणी में भी वसती है। अतः उनका दर्शन तथा चिन्तन राष्ट्र को सर्वदा जागृत रखेगा।




