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भारत में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग का नया युग, मुंबई बनेगा ट्रेनिंग हब

भारत में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग को नई दिशा: AIPMA–EREMA साझेदारी से मुंबई में खुलेगा स्किल डेवलपमेंट सेंटर

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भारत में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने और सर्कुलर इकोनॉमी के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की गई है। ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIPMA) के अरविंद मेहता टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप सेंटर (AMTEC) और ऑस्ट्रिया की विश्वविख्यात प्लास्टिक रीसाइक्लिंग मशीनरी कंपनी EREMA के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

इस साझेदारी के तहत मुंबई में एक अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना की जाएगी, जो भारत में रीसाइक्लिंग क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की भारी कमी को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगा।

कुशल मैनपावर की कमी सबसे बड़ी चुनौती: अरविंद मेहता

इस अवसर पर एआईपीएमए गवर्निंग काउंसिल और एएमटीईसी के चेयरमैन अरविंद मेहता ने रीसाइक्लिंग उद्योग की मौजूदा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि भारत का रीसाइक्लिंग सेक्टर आज जिस सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है, वह है शिक्षित और प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी

उन्होंने बताया कि यह नया केंद्र एक “व्यवस्थित स्कूल” की तरह काम करेगा, जहाँ छात्रों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा नहीं, बल्कि वास्तविक औद्योगिक मशीनों पर कच्चे माल और प्लास्टिक स्क्रैप की प्रोसेसिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

“हमारा लक्ष्य छात्रों को किताबों से आगे ले जाकर सीधे उद्योग की जरूरतों के लिए तैयार करना है,” — अरविंद मेहता।

75 घंटे का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

समझौते के तहत इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों के छात्रों के लिए 75 घंटे का विशेष रूप से संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। यह कोर्स उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीक, सस्टेनेबिलिटी प्रैक्टिसेज और ऑपरेशनल एक्सीलेंस पर केंद्रित होगा।

ईआरईएमए देगी अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग मशीन

इस साझेदारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि EREMA ऑस्ट्रिया इस केंद्र को 50 से 100 किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता वाली अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग मशीन बिना किसी किराए के उपलब्ध कराएगी। इससे छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग प्राप्त होगी।

तकनीक तभी कारगर जब हों कुशल दिमाग: मार्कस ह्यूबर-लिंडिंगर

EREMA ऑस्ट्रिया के प्रबंध निदेशक मार्कस ह्यूबर-लिंडिंगर ने कहा कि आधुनिक तकनीक का वास्तविक लाभ तभी संभव है जब उसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन मौजूद हों।

“बिना प्रशिक्षित लोगों के अत्याधुनिक तकनीक भी निष्प्रभावी हो जाती है।

सर्टिफिकेट और रोजगार के अवसर

एआईपीएमए के अध्यक्ष श्री सुनील शाह ने जानकारी दी कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले छात्रों को प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई दानदाता CSR फंड के माध्यम से छात्रों की शिक्षा में सहयोग कर रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं के लिए भारत और विदेशों में रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।

स्किल इंडिया और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़ी पहल

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्किल इंडिया मिशन और सर्कुलर इकोनॉमी के विजन से प्रेरित है। एएमटीईसी पहले ही प्रोडक्ट डिजाइन, 3डी प्रिंटिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है, लेकिन EREMA के साथ यह साझेदारी भारत को प्लास्टिक रीसाइक्लिंग के वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगी।

वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर

इस केंद्र से प्रशिक्षित छात्र न केवल भारत में, बल्कि EREMA के दुनिया भर में फैले वैश्विक क्लाइंट नेटवर्क में भी रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल उद्योग और शिक्षा के बीच की खाई को पाटने के साथ-साथ प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए भारत के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगी।

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