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GCPRS 2025: प्लास्टिक रिसाइक्लिंग में भारत की तकनीकी क्रांति  

भारत मंडपम में ग्लोबल प्लास्टिक सम्मेलन, रिसाइक्लिंग और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस

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प्लास्टिक अब केवल पर्यावरणीय चुनौती नहीं रहा, बल्कि यह आर्थिक और तकनीकी संभावनाओं का बड़ा माध्यम बन चुका है। भारत मंडपम, प्रगति मैदान में आयोजित ‘द्वितीय ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन प्लास्टिक रिसाइक्लिंग एंड सस्टेनेबिलिटी (GCPRS 2025)’ का भव्य शुभारंभ हुआ।

 

उद्घाटन सत्र में रसायन एवं पेट्रो रसायन तथा उर्वरक मंत्रालय के संयुक्त सचिव दीपक मिश्रा ने कहा कि, “प्लास्टिक उद्योग ने EPR (एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी) जैसे कड़े नियमों को अवसर में बदलकर नई संभावनाओं को जन्म दिया है। जैसे प्लास्टिक हर जगह मौजूद और लगभग अमर है, वैसे ही यह उद्योग भी लचीला और जीवंत है जो हर चुनौती का समाधान निकालता है।”

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत में पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) बोतलों की लगभग 90% रीसाइक्लिंग की जा रही है, जो उद्योग की नवाचार क्षमता और तकनीकी अपनाने की तत्परता का प्रमाण है।

 

रसायन एवं पेट्रो रसायन विभाग की निदेशक सुश्री वंदना ने कहा, “प्लास्टिक अपशिष्ट अब केवल एक देश की समस्या नहीं बल्कि एक वैश्विक उत्तरदायित्व है। सरकार, उद्योग और उपभोक्ताओं को मिलकर इस चुनौती का समाधान निकालना होगा। जीसीपीआरएस जैसे वैश्विक मंच सहयोग और समाधान तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।”

एआईपीएमए के गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन अरविंद डी. मेहता ने कहा, “भारत अब केवल एक उत्पादक देश नहीं रहा, बल्कि प्लास्टिक रिसाइक्लिंग में दक्षता प्राप्त कर वैश्विक मॉडल बनने की दिशा में बढ़ रहा है। इस उद्योग को केवल समस्या नहीं, बल्कि समाधान की दृष्टि से भी देखा जाना चाहिए।”

GCPRS 2025 के चेयरमैन हितेन भेडा ने कहा कि, “पुनर्चक्रण (Recycling) ही वह पुल है, जो पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है।”

एआईपीएमए अध्यक्ष मनोज आर. शाह ने कहा कि “हमें युवाओं को न केवल तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है, बल्कि उन्हें पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भाव भी देना होगा।”

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि भविष्य में तकनीकी नवाचार और युवाओं की भागीदारी ही प्लास्टिक रिसाइक्लिंग क्षेत्र को आगे ले जाएगी।

इस आयोजन में एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें प्लास्टिक पुनर्चक्रण की नवीनतम तकनीकों और व्यावहारिक मॉडल्स को प्रदर्शित किया गया।

फार्मा, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में प्रयुक्त प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग के व्यवहारिक समाधान सम्मेलन का मुख्य आकर्षण रहे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्लास्टिक रिसाइक्लिंग उद्योग अगले 8 वर्षों में 6.9 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे देश को पर्यावरणीय लाभ के साथ-साथ आर्थिक बढ़त भी मिलेगी।

इस आयोजन में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, स्वच्छ भारत मिशन, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय और रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का सहयोग सराहनीय रहा।

सिद्धार्थ आर. शाह, कैलाश बी. मुरारका, राजेश गौबा, हनुमंत सर्राफ और हरेन सांघवी जैसे आयोजकों की सक्रिय भूमिका ने इस आयोजन को सफल बनाया।

सम्मेलन में देश-विदेश की 175 से अधिक कंपनियों और संगठनों ने भाग लिया। कुल 230 स्टॉल्स लगाए गए और 18 देशों से विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और रिसाइक्लिंग सेक्टर के नेतृत्वकर्ता शामिल हुए। यहां उठे सवाल और सुझाए गए समाधान आने वाले वर्षों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा तय करेंगे।

GCPRS 2025 अब केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि पर्यावरण और उद्योग के बीच सहयोग का वैश्विक मंच बनकर उभरा है।

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