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Farmer Mahapanchayat: जंतर-मंतर पर किसानों की महापंचायत, राष्ट्रपति को दिया ज्ञापन

किसानों ने अपनी मांगों को स्पष्टता से रखते हुए यह साफ कर दिया है कि यदि सरकार आने वाले समय में इन मांगों को लेकर गंभीर नहीं हुई तो एक बार पूरा देश भर का किसान पूर्व की ही भांति दिल्ली कूच करेगा।

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सोमवार को देश का राष्ट्रीय राजधानी में किसानों ने प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर पर किसानों की महापंचायत को लेकर दिल्ली की सभी सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी थी। इस प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कई क्षेत्रों में जाम भी लग गया।

प्रदर्शन के दौरान गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस ने कुछ किसानों को हिरासत में भी लिया। किसानों ने जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर पुलिस की बैरिकेडिंग को भी गिरा दिया था। पुलिस ने किसानों को जंतर-मंतर पर महापंचायत करने की अनुमति नहीं दी थी। जंतर-मंतर पर संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनैतिक) के द्वारा एक दिवसीय किसान महापंचायत का आह्वान किया गया, उक्त कार्यक्रम में देशभर के समस्त गैर राजनीतिक किसान संगठनों और हजारों की संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया।

इस प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने बताया कि किसानों द्वारा जब दिल्ली किसान आंदोलन स्थगित किया गया था तब सरकार द्वारा जो लिखित आश्वासन दिया गया था, उन बातों को सरकार ने पूरा करने के बजाय किसानों के साथ विश्वासघात किया। आज भी किसानों की बुनियादी मांगे (Basic Demands) यथावत हैं।

किसान पंचायत की प्रमुख मांगें

1.लखीमपुर खीरी नरसंहार के पीड़ित किसान परिवारों को इंसाफ, जेलों में बंद किसानों की रिहाई व नरसंहार के मुख्य दोषी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी की गिरफ्तारी की जाए।

2.स्वामीनाथन आयोग के C2+50 फिसदी फॉर्मूले के अनुसार एमएसपी की गारंटी का कानून बनाया जाए।

3.देश के सभी किसानों को कर्जमुक्त किया जाए।

4.बिजली बिल 2022 रद्द किया जाए।

5.गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए और गन्ने की बकाया राशि का भुगतान तुरन्त किया जाए।

6.भारत डब्लूटीओं से बाहर आये और सभी मुक्त व्यापार समझौतों को रद्द किया जाए।

7.किसान आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।

8.प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के बकाया मुआवज़े का भुगतान तुरन्त किया जाए।

9.अग्निपथ योजना वापिस ली जाए।

विशाल महापंचायत  में देश भर के 19 राज्यों से आए किसानों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। किसानों ने अपनी मांगों को स्पष्टता से रखते हुए यह साफ कर दिया है कि यदि सरकार आने वाले समय में इन मांगों को लेकर गंभीर नहीं हुई तो एक बार पूरा देश भर का किसान पूर्व की ही भांति दिल्ली कूच करेगा।

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