Anti-Smuggling Day: वैश्विक सहयोग से ही रुकेगा संगठित आर्थिक अपराध
भारत ने संयुक्त राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग उठाई, नेटवर्क ध्वस्त करने पर जोर, अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर भारत की बड़ी कार्रवाई

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लगातार बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के बीच भारत ने अपने प्रवर्तन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अनुपालन प्रबंधन सदस्य मोहन कुमार सिंह ने बताया कि भारत ने 42 पारस्परिक सीमा शुल्क सहयोग समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं और 21 अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ समझौतों पर बातचीत जारी है।
फिक्की कास्केड द्वारा आयोजित तस्करी विरोधी दिवस के 5वें संस्करण में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज तस्करी एक संगठित, तकनीक-संचालित और बहु-आयामी आर्थिक अपराध बन चुकी है, जिसका सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है।
चालू वित्त वर्ष में बड़ी जब्तियां
श्री सिंह ने बताया कि सीमा शुल्क विभाग और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने प्रवर्तन प्रयासों को तेज किया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में हवाई अड्डों पर बड़ी मात्रा में अवैध वस्तुओं की जब्ती की गई, जिनमें शामिल हैं:
- लगभग 500 किलोग्राम सोना
- 15 करोड़ अवैध सिगरेट
- 20 टन से अधिक लाल चंदन
- लगभग 120 किलोग्राम कोकीन
- लगभग 50 किलोग्राम हेरोइन
- लगभग 350 किलोग्राम एम्फैटेमिन
- लगभग 3,700 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक कैनेबिस
- 100 से अधिक वन्यजीव तस्करी के मामले
- डुअल-यूज सामान, हथियार, गोला-बारूद, ड्रोन और नकली भारतीय करेंसी नोट
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब प्रवर्तन केवल जब्ती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तस्करी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में काम होगा। इसके लिए फाइनेंशियल फ्लो, लॉजिस्टिक इनेबलर्स और अंतरराष्ट्रीय लिंकेज को भी निशाना बनाया जाएगा।
एआई और एडवांस टेक्नोलॉजी से मजबूत होगा सीमा प्रबंधन
सीमा शुल्क विभाग को देश की सीमाओं पर सुरक्षा की पहली पंक्ति बताते हुए श्री सिंह ने कहा कि:
- रिस्क-बेस्ड निरीक्षण
- बेहतर कार्गो स्क्रीनिंग
- नॉन-इंट्रूसिव एग्जामिनेशन सिस्टम
- एआई-संचालित एनालिटिक्स
के माध्यम से संदिग्ध कंसाइनमेंट को घरेलू बाजार में प्रवेश से पहले ही रोका जा रहा है।
केंद्रीय बजट की हालिया घोषणाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एआई-आधारित इमेज एनालिटिक्स और प्रमुख बंदरगाहों पर विस्तारित कंटेनर स्कैनिंग से प्रवर्तन और मजबूत होगा। जीएसटी सरलीकरण और सीमा शुल्क सुधार से वैध व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और अवैध व्यापार के प्रोत्साहन कम होंगे।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर
फिक्की कास्केड के अध्यक्ष अनिल राजपूत ने कहा कि तस्करी से लड़ना किसी एक देश या संस्था की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से “अंतरराष्ट्रीय तस्करी विरोधी दिवस” को मान्यता देने की मांग की, ताकि वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई नीतिगत, प्रवर्तन, व्यावसायिक और उपभोक्ता विकल्पों की भी है। यदि वैधता और ईमानदारी को प्राथमिकता दी जाए तो तस्करी को जड़ जमाने का अवसर नहीं मिलेगा।
नेटवर्क को ध्वस्त करना होगा लक्ष्य
फिक्की कास्केड के सलाहकार और सीबीआईसी के पूर्व अध्यक्ष श्री पी. सी. झा ने कहा कि तस्करी विरोधी दिवस केवल प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि संरचनात्मक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क अब वैध व्यापार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों का दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में प्रवर्तन को:
- इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई
- वित्तीय जांच
- एजेंसियों के बीच समन्वय
- अंतरराष्ट्रीय तालमेल
पर जोर देना होगा।
8 लाख करोड़ का अवैध बाजार, लाखों नौकरियों पर असर
फिक्की कास्केड की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में भारत में प्रमुख सेक्टरों में अवैध बाजार का आकार लगभग 8 लाख करोड़ रुपये था।
2019-20 के आंकड़ों के अनुसार, गैरकानूनी व्यापार की वजह से लगभग 15.96 लाख वैध नौकरियां प्रभावित हुईं। यह औपचारिक अर्थव्यवस्था और रोजगार पर तस्करी के गंभीर प्रभाव को दर्शाता है।
पैनल चर्चाओं में रणनीतिक प्रवर्तन और वैश्विक तालमेल पर चर्चा
कार्यक्रम में दो उच्च-स्तरीय पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं:
- रणनीतिक प्रवर्तन: अर्थव्यवस्था, सीमा और सुरक्षा की हिफाजत
- समन्वित खुफिया साझेदारी
- संगठित अपराध नेटवर्क का विघटन
- टेक्नोलॉजी आधारित बॉर्डर सिक्योरिटी
- सीमा-पार सामंजस्य: अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करना
- एडवांस्ड सर्विलांस और डेटा एनालिटिक्स
- खुफिया जानकारी साझा करना
- बहुपक्षीय सहयोग
युवाओं की भागीदारी भी अहम

“स्टैंड अगेंस्ट स्मगलिंग” डिजिटल आर्ट प्रतियोगिता में देशभर से 10,000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। इससे युवाओं में नैतिक जागरूकता और जिम्मेदार नागरिक संस्कृति को बढ़ावा मिलने का संकेत मिलता है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ी पहल
11 फरवरी 2022 को पहली बार वैश्विक स्तर पर तस्करी विरोधी दिवस की शुरुआत हुई थी। यह मंच सरकार, उद्योग, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज को एक साथ लाकर अवैध व्यापार के खिलाफ साझा रणनीति बनाने में मदद कर रहा है।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि आर्थिक अखंडता की रक्षा, वैध व्यापार की सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को मजबूत करना देश की सतत प्रगति के लिए अनिवार्य है।

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