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Ajab Kahani: भारत का अनोखा गांव, जहां उल्टी दिशा में चलती है घड़ी की सुइयां

उलटी दिशा की घड़ी के इस्तेमाल को लेकर आदिवासियों ने कहा कि उनकी ही घड़ी सही चलती है। समुदाय ने अपनी घड़ी का नाम गोंडवाना टाइम रखा है।

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भारत में ऐसे कई समुदाय हैं, जो लीक से हटकर प्रथाओं को मानते हैं। आम दुनिया में जो चीजें नॉर्मल हैं, वो इन समुदायों में वर्जित है उसकी जगह लीक से हटकर चीजें की जाती हैं। ऐसा ही एक समुदाय भारत के छत्तीसगढ़ (Chattisgarh Tribe) में है इस समुदाय के लोग जिस गांव में रहते हैं, वहां की घड़ी के कांटे उलटी दिशा (Watch In Opposite Direction) में चलते हैं। साथ ही 12 बजे के बाद 11 बजते हैं, ना कि 1 इसकी वजह भी समुदाय के लोगों के पास है, जिसे वो सही मानते हैं।

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दुनिया में जितनी भी घड़ियां चलती हैं, सबकी दिशा बायीं से दाईं और होती है। बारह बजे के बाद एक बजता है, फिर दो और फिर तीन लेकिन भारत के छत्तीसगढ़ में एक ऐसा गांव है, जहां की घड़ियां दाएं से बायीं और चलती हैं. जब से इस गांव में घड़ी आई है, तबसे सारी घड़ियां इसी तरह एंटी क्लॉकवाइज चलती हैं। ये है छत्तीसगढ़ के कोरबा के पास आदिवासी शक्ति पीठ से जुड़े गोंड आदिवासी समुदाय। ये हमेशा से उलटी दिशा की घड़ी का इस्तेमाल करते हैं।

प्रकृति से जुड़ा है कारण

उलटी दिशा की घड़ी के इस्तेमाल को लेकर आदिवासियों ने कहा कि उनकी ही घड़ी सही चलती है। समुदाय ने अपनी घड़ी का नाम गोंडवाना टाइम रखा है। समुदाय का कहना है कि धरती दाएं से बायीं दिशा में घूमती है। साथ ही चन्द्रमा से लेकर सूरज और तारे भी इसी दिशा में घूमते हैं। इसके अलावा तालाब में पड़ने वाला भंवर भी इसी दिशा में घूमता है. यही वजह है कि लोगों ने घड़ी की दिशा यही रखी है।

30 समुदाय फॉलो करते है ये घड़ी

गोंड समुदाय के लोगों के अलावा गोंडवाना घड़ी को अन्य 29 समुदाय के लोग फॉलो करते हैं। आदिवासियों का कहना है कि प्रकृति का चक्र जिस दिशा में चलता है, उसी दिशा में उनकी घड़ी उनकी घड़ी चलती है। आदिवासी समुदाय के ये लोग महुआ, परसा और अन्य पेड़ों की पूजा करते हैं. छत्तीसगढ़ के इस इलाके में करीब दस हजार परिवार रहते हैं। ये सभी लोग उलटी घड़ी का पालन करते हैं।

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