Ganesh Utsav 2026: झंडेवाला देवी मंदिर में 12 दिन चला गणेश उत्सव, भव्य शोभायात्रा के साथ गणपति को दी विदाई
आरती के बाद बैंड-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा, मंदिर के पास पार्क में बनाए गए विशेष ताल में विधि-विधान से विसर्जित की गई प्रतिमा।

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गणेश विसर्जन की परंपरा हिंदू धर्म में भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा, भक्ति और जीवन के चक्र से जुड़ी मानी जाती है। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और उत्सव के समापन पर प्रतिमा का जल में विसर्जन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विसर्जन भगवान गणेश के अपने धाम लौटने का प्रतीक है। महाराष्ट्र सहित देश के कई हिस्सों में यह परंपरा लंबे समय से गणेश उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। समय के साथ दिल्ली समेत विभिन्न शहरों में भी गणेश उत्सव और विसर्जन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाने लगा है।
झण्डेवाला देवी मंदिर में गणेश उत्सव का भव्य समापन
राजधानी दिल्ली के प्राचीन ऐतिहासिक झण्डेवाला देवी मंदिर में 14 सितंबर 2026 से शुरू हुआ गणेश उत्सव शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्दशी के अवसर पर विधिवत रूप से संपन्न हो गया। उत्सव के अंतिम दिन मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला।


शुक्रवार को विधि-विधान से आरती की गई। इसके बाद भक्तों ने नाचते-गाते और भजन-कीर्तन करते हुए भगवान गणेश की प्रतिमा की शोभायात्रा निकाली। बैंड-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान पूरा वातावरण गणपति बप्पा के जयकारों से गूंज उठा।
विशेष ताल में किया गया गणेश प्रतिमा का विसर्जन

शोभायात्रा के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को मंदिर के पास स्थित पार्क में विसर्जन के लिए विशेष रूप से बनाए गए ताल तक ले जाया गया। यहां बैंड-बाजे और भक्तों की मौजूदगी के बीच विधि-विधान से प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
गणेश विसर्जन के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ मंदिर के अधिकारी तथा पुरुष और महिला सेवादार भी मौजूद रहे। सभी ने श्रद्धा के साथ भगवान गणेश को विदाई दी और अगले वर्ष फिर से पधारने की कामना की।
भक्ति और उत्साह के साथ विदा हुए गणपति

झण्डेवाला देवी मंदिर में करीब 12 दिनों तक चले गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। गणेश चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ उत्सव का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के बीच भगवान गणेश को भावपूर्ण विदाई दी।

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