Sawan Shivratri 2026: झण्डेवाला देवी मंदिर में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे, कांवड़ियों के जल से हुआ अभिषेक
सुबह मंदिर खुलते ही शुरू हुआ जलाभिषेक, शिवालयों की विशेष सजावट बनी आकर्षण का केंद्र; श्रद्धालुओं को वितरित किया गया खीर का प्रसाद

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सावन मास की शिवरात्रि के पावन अवसर पर दिल्ली के प्रसिद्ध झण्डेवाला देवी मंदिर में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर के प्रथम तल पर स्थित शिवालय में सुबह मंदिर के कपाट खुलते ही कांवड़ियों द्वारा लाए गए पवित्र जल से भगवान शिव के शिवलिंग का जलाभिषेक शुरू हो गया। भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचते रहे।
सावन शिवरात्रि के अवसर पर मंदिर के शिवालयों को विशेष रूप से सजाया गया है। फूलों, धार्मिक सजावट और आकर्षक श्रृंगार से सजे शिवालय भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना कर रहे हैं।
कांवड़ियों के जल से हुआ भगवान शिव का जलाभिषेक

सावन के महीने में हरिद्वार, गंगोत्री सहित विभिन्न पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़िये भगवान शिव को यह जल अर्पित करते हैं। सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़ियों द्वारा लाए गए जल से शिवलिंग का अभिषेक करने की विशेष धार्मिक परंपरा है। इसी परंपरा के तहत झण्डेवाला देवी मंदिर में भी कांवड़ियों और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। भक्तों का विश्वास है कि इससे नकारात्मकता और पापों का नाश होता है, मन को शांति मिलती है तथा भगवान शिव की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
सावन शिवरात्रि का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। शिवरात्रि से जुड़ी विभिन्न धार्मिक कथाएं और मान्यताएं पुराणों एवं लोक परंपराओं में मिलती हैं। सावन मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है और इस दौरान जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
समुद्र मंथन से जुड़ी प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार देवताओं और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किए जाने पर हलाहल नामक विष निकला था। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण किया, जिसके कारण उनका कंठ नील हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए जल अर्पित किया जाता है। इसी आस्था के कारण सावन में शिवलिंग पर जल और गंगाजल चढ़ाने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है।
हालांकि, सावन शिवरात्रि की धार्मिक परंपराओं से जुड़ी कथाओं के अलग-अलग क्षेत्रीय और पुराणिक संदर्भ मिलते हैं। वहीं महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि अलग-अलग पर्व हैं। महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है, जबकि सावन शिवरात्रि सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है।
गुफा वाले शिवालय में विशेष रुद्राभिषेक
झण्डेवाला देवी मंदिर के गुफा वाले शिवालय में सावन शिवरात्रि के अवसर पर विशेष रुद्राभिषेक की व्यवस्था की गई है। मंदिर की व्यवस्था के अनुसार इस विशेष रुद्राभिषेक के लिए पहले से बुकिंग की जाती है। दिन में कुल पांच बार विशेष रुद्राभिषेक आयोजित किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु विधि-विधान के साथ भगवान शिव का अभिषेक कराते हैं।
मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। बड़ी संख्या में भक्त शिवालय पहुंचकर जलाभिषेक और भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
जलाभिषेक के बाद भक्तों को खीर का प्रसाद
भगवान शिव के जलाभिषेक और दर्शन के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को खीर का प्रसाद वितरित किया जा रहा है। भक्त भगवान शिव का आशीर्वाद लेने के साथ प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। सावन शिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और चारों ओर ‘हर हर महादेव’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं।
सावन शिवरात्रि पर झण्डेवाला देवी मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक आस्था का यह संगम पूरे दिन जारी रहने की उम्मीद है। विशेष रूप से सजाए गए शिवालय और कांवड़ियों द्वारा लाए गए पवित्र जल से हो रहा जलाभिषेक भक्तों के लिए आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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