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शिरोमणि अकाली दल सिख पंथ की एकमात्र नुमाइंदा जत्थेबंदी है: सरना

शिरोमणि अकाली दल के 103वें स्थापना दिवस के मौके पर समूचे नेतृत्व के साथ श्री दरबार साहिब में मत्था टेका

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शिरोमणि अकाली दल के 103वें स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई में समूचे नेतृत्व ने श्री दरबार साहिब में नतमस्तक होकर गुरु साहिब का आर्शीवाद प्राप्त किया।

     इस संबंध में जानकारी देते हुए शिरोमणि अकाली दल की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने बताया कि अकाली दल के 103वें स्थापना दिवस के एतिहासिक मौके पर पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने 2015 में एक पंथक सरकार के रहते श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का निरादर करने वाले दोषियों को पकड़ पाने में अस्मर्थता व अनजाने में हुई गलतियों के लिए श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर समूचे पंथ से माफी मांगी।
      उन्होंने कहा कि सरदार बादल ने ऐसा कर एक बेहतरीन मिसाल पेश की है क्योंकि पंथक हितों के लिए झुकना एक अच्छी बात है। आज जब सिख पंथ पर चारो तरफ से हमले हो रहे हैं तो पंथ को एकजुट करने का यह कदम सराहनीय है।
     सरदार सरना ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल सिख पंथ की एकमात्र नुमाइंदा जत्थेबंदी है इसलिए सभी को एकजुट होकर अकाली दल का समर्थन करने की जरूरत है। अगर अभी भी किसी के मन में कोई संदेह या असंतुष्टि है तो खुले दिल से संपर्क करते हुए बताए कि पार्टी को मजबूत करने के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
      उन्होंने आगे कहा कि पंथक राजनीति को कायम रखने के लिए यह बहुत जरूरी है कि शिरोमणि अकाली दल को मजबूत किया जाए। इसलिए हम सभी को तन-मन-धन से अकाली विचार के प्रति समर्पण भाव से कार्य करते हुए शिरोमणि अकाली दल की बेहतरी के लिए एक साथ आना चाहिए।
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