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नई दिल्ली। साहित्य अकादेमी द्वारा आज प्रसिद्ध बाल साहित्यकार चंद्रपाल सिंह यादव ‘मयंक’ की जन्मशती के उपलक्ष्य में विशेष परिसंवाद का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देशभर से आए प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और विद्वानों ने मयंक जी के योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की शुरुआत में साहित्य अकादेमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि “मयंक जी सच्चे बाल साहित्यकार थे। उन्होंने बच्चों के लिए अनमोल गीत और रचनाएँ दीं, जो आज भी प्रेरणादायक हैं।”
क्षमा शर्मा ने अपने वक्तव्य में मयंक जी की कहानियों पर चर्चा करते हुए कहा कि उनकी कहानियाँ वर्तमान संदर्भों को ईमानदारी से प्रस्तुत करती हैं और संदेश रचना में स्वाभाविक रूप से बुने हुए लगते हैं। वहीं शकुंतला कालरा ने अपने बीज भाषण में मयंक जी के समग्र साहित्य विशेषकर कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी रचनाओं में बच्चों को दया, करुणा और ईमानदारी जैसे सद्गुणों की प्रेरणा दी।
मयंक जी की पुत्री उषा यादव ने कार्यक्रम में अपने पिता से जुड़े कई हृदयस्पर्शी संस्मरण साझा किए। ओमप्रकाश कश्यप ने उनके पद्यकथाओं और खंड काव्यों की सहजता और किस्सागोई की विशेषता पर प्रकाश डाला। योगेंद्र दत्त शर्मा ने मयंक जी की बाल कविताओं को समयानुकूल और राष्ट्रीय चेतना जाग्रत करने वाली बताया। वहीं सुमन वाजपेयी ने मयंक जी के नाटक, एकांकी और यात्रा वृत्तांतों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दिविक रमेश ने कहा कि “बाल साहित्य बच्चों का सच्चा मित्र होता है। इसमें विचार थोपने के बजाय अनुभव साझा करने की जरूरत होती है और मयंक जी की रचनाएँ इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं।”
इस अवसर पर अनेक प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार जैसे जगदीश व्योम और कमलेश भट्ट कमल भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन साहित्य अकादेमी के उपसचिव देवेंद्र कुमार देवेश ने किया।

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