मेरे अलफ़ाज़/कविता
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77 साल बाद भी पौष्टिक भोजन की उपलब्धता में विफलता
आज हम देश की आजादी का जश्न मना रहे हैं और दुनिया में शक्तिशाली देशों की पांत में आ खडे़…
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राम: एक अद्वितीय आदर्श
रामनवमी विशेष- सिया के राम सीता को छोड़कर तो राम अयोध्या भी नहीं आए थे, सिंहासन छोड़ने पर नहीं, राम…
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संकट के दौर में है सांस्कृतिक पत्रकारिता- डॉ. सच्चिदानंद जोशी
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (IGNCA) के उमंग सभागार में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अजित राय की पुस्तक ‘दृश्यांतर’ का…
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अधूरापन: एक कविता जो रचती हैं रिश्तों की गहराई को
अधूरापन.. मुझे इंकार है हर उस सूरज के साथ से जहां मैं सूरजमुखी बनी उसे निहारना ही अपना फ़र्ज़ पाऊं…
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मन के बदलते रंग: एक अजीब दौर
ग़र्दिशे-दौरां के नाम ये दौर है कुछ अजीबो-ग़रीब ये दौर है कुछ पेंचीदा सा, नाउम्मीदी का भी नाम नहीं उम्मीदों…
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परदेस की साथी के नाम: एक अनूठी दोस्ती
परदेस की साथी के नाम ओ चिड़िया मेरे छज्जे आ पानी पी और दाना खा, मुझसे छूटा हुआ बसेरा तू…
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उत्तराखंड: समान नागरिक संहिता UCC का पहला राज्य बनकर बनाया इतिहास
उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता यानी UCC विधेयक न केवल विधान सभा में पेश कर…
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मन के बदलते रंग….
मन के बदलते रंग शाम तक सुबह का इंतज़ार सोए भी देर तलक मगर आंखों की जलन कुछ कम न…
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सतरंगी रंग: जीवन की विविधता और परिप्रेक्ष्य
सतरंगी रंग जुगनू हूं तो क्या, अंधेरे का हिस्सा तो नहीं हूं क़र्ज़दार तो हूं ज़माने की, पर बेईमानी…
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