IRFC-2026: चारा उत्पादन से लेकर AI और ड्रोन तकनीक तक वैज्ञानिकों ने खोजे नए समाधान
अंतरराष्ट्रीय चरागाह एवं चारा सम्मेलन के दूसरे दिन जलवायु-सहिष्णु चारा, सतत पशुधन उत्पादन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर हुआ मंथन

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झांसी, संवाददाता। ग्रासलैण्ड, झांसी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय चरागाह एवं चारा सम्मेलन (IRFC-2026) के दूसरे दिन गुरुवार को चारा एवं पशुधन विकास से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, जलवायु अनुकूल कृषि, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और चरागाह संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिकों ने गहन चर्चा की। सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में चारा उत्पादन को अधिक उत्पादक, पोषणयुक्त और टिकाऊ बनाने के साथ-साथ बदलती जलवायु परिस्थितियों में पशुधन क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने पर शोध प्रस्तुत किए गए।
चारा फसल सुधार और आधुनिक प्रजनन तकनीकों पर जोर

तकनीकी सत्रों में चारा फसल सुधार प्रमुख विषय रहा। वैज्ञानिकों ने आनुवंशिक संसाधनों के बेहतर उपयोग, आधुनिक प्रजनन तकनीकों, जीनोम एडिटिंग तथा चारा फसलों की उत्पादकता और पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के उपायों पर अपने शोध साझा किए। उन्नत एवं जलवायु-सहिष्णु चारा किस्मों के विकास को भविष्य की पशुधन जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर वैज्ञानिक मंथन
चारा उत्पादन एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े सत्र में बंजर भूमि के सुधार, जल एवं पोषक तत्वों के दक्ष उपयोग, फसल विविधीकरण और मृदा कार्बन संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन के बीच ऐसे चारा उत्पादन मॉडल विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया, जो कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करें।
सतत पशुधन उत्पादन और डेयरी क्षेत्र पर चर्चा
पशुधन एवं डेयरी से संबंधित सत्रों में सतत पशुधन उत्पादन, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, फसल अवशेषों के मूल्य संवर्धन, पशु पोषण और डेयरी उत्पादकता से जुड़े शोध प्रस्तुत किए गए। वैज्ञानिकों ने पशु पोषण में सुधार और उपलब्ध कृषि संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को पशुधन उत्पादकता बढ़ाने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित किया।
AI, ड्रोन और रोबोटिक्स से बदलेगा चारा उत्पादन
सम्मेलन में अगली पीढ़ी की तकनीकों पर केंद्रित सत्र भी आकर्षण का केंद्र रहा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, रोबोटिक्स, नैनो-बायो-इन्फॉर्मेशन तकनीक और मशीन लर्निंग के जरिए चारा उत्पादन एवं पशु स्वास्थ्य को अधिक सटीक और टिकाऊ बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रिसिजन तकनीकों के इस्तेमाल से चारा उत्पादन की निगरानी, संसाधनों के बेहतर उपयोग और पशु स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
16 प्रमुख और 54 मौखिक शोध प्रस्तुतियां
सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में कुल 16 प्रमुख प्रस्तुतियों और 54 मौखिक शोध प्रस्तुतियों के साथ पोस्टर प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इनमें पारंपरिक चरागाह ज्ञान से लेकर आधुनिक जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रिसिजन तकनीकों तक विभिन्न विषयों को शामिल किया गया।
IRFC-2026 में प्रस्तुत शोधों का मुख्य फोकस चारा उत्पादन बढ़ाने, पशुधन पोषण एवं उत्पादकता सुधारने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने पर रहा। सम्मेलन के तकनीकी विमर्श में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय के जरिए चरागाह एवं पशुधन क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में नए अवसरों पर विचार किया गया।

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