महिलाओं की प्राइवेसी से क्रिएटर्स की कमाई तक, ZKTOR ने पेश किया नया डिजिटल मॉडल
चार देशों में बढ़ी पहुंच, नो-URL तकनीक से फोटो-वीडियो स्क्रैपिंग से बचाव का दावा; क्रिएटर्स को कंटेंट कमाई का 70% हिस्सा देने वाला मॉडल

👆भाषा ऊपर से चेंज करें
भारतीय सोशल सुपर-ऐप ZKTOR ने दक्षिण एशिया में अपने विस्तार के बीच 1 मिलियन से अधिक यूजर्स का आंकड़ा पार करने का दावा किया है। कंपनी के अनुसार, भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में भी प्लेटफॉर्म की पहुंच बढ़ रही है। ZKTOR का फोकस महिलाओं और Gen Z यूजर्स की ऑनलाइन प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा, यूजर-कंट्रोल्ड फीड और क्रिएटर्स की कमाई पर है।
कंपनी के मुताबिक, Google Play Store की Top Free Social Apps सूची में ZKTOR पिछले कुछ महीनों से भारत में टॉप-100 और नेपाल, बांग्लादेश तथा श्रीलंका में टॉप-30 में मौजूद रहा है। कंपनी का कहना है कि चार देशों में बढ़ती पहुंच उसके ऐसे डिजिटल मॉडल का हिस्सा है, जिसमें यूजर की पसंद, डेटा सुरक्षा और स्थानीय स्तर पर कमाई के अवसरों को एक साथ रखा गया है।
नो-URL तकनीक से फोटो-वीडियो स्क्रैपिंग से बचाव
ZKTOR के अनुसार, प्लेटफॉर्म में No-URL Technology और Privacy and Data Safety by Design को तकनीकी आधार बनाया गया है। कंपनी का दावा है कि नो-URL तकनीक फोटो और वीडियो की अनधिकृत स्क्रैपिंग से बचाव में मदद करती है। इसके साथ Zero Knowledge Server Architecture और मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन को भी प्लेटफॉर्म की डेटा सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया गया है।
कंपनी के अनुसार, संबंधित देशों में लोकल डेटा सेंटर के माध्यम से डेटा को स्थानीय स्तर पर रखने की व्यवस्था भी की गई है। ZKTOR का दावा है कि यह मॉडल यूजर्स की निजी जानकारी की सुरक्षा और डेटा पर नियंत्रण को प्राथमिकता देता है।
महिलाओं और Gen Z के लिए प्राइवेसी पर जोर
ZKTOR ने महिलाओं और Gen Z यूजर्स के लिए प्राइवेसी को अपने प्लेटफॉर्म की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। कंपनी के मुताबिक, Zero Behavioural Tracking मॉडल के तहत यूजर की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी आधारित प्रोफाइलिंग से बचने का प्रयास किया गया है।
कंपनी का कहना है कि फीड को यूजर की पसंद के अनुरूप रखा गया है और अनचाहे कंटेंट को एल्गोरिद्म के जरिए थोपने के बजाय यूजर को अपने कंटेंट अनुभव पर अधिक नियंत्रण देने की कोशिश की गई है।
इसके अलावा, HOLA AI की Video Detection Layer (VDL) के जरिए असामाजिक और एडल्ट कंटेंट के साथ फेक न्यूज की पहचान और फिल्टरिंग की व्यवस्था होने का दावा किया गया है।
बिना ट्रैकिंग लोकल विज्ञापन का मॉडल
ZKTOR ने अपने विज्ञापन मॉडल के लिए ZHAN यानी ZKTOR Hyperlocal Advertisement Network विकसित करने की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य यूजर की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक किए बिना स्थानीय कारोबारों और विज्ञापनदाताओं को लक्षित विज्ञापन का अवसर देना है।
कंपनी का दावा है कि यह मॉडल प्राइवेसी आधारित स्थानीय विज्ञापन व्यवस्था तैयार करने की दिशा में काम करता है, जिसमें यूजर डेटा की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।
क्रिएटर्स को कमाई का 70 प्रतिशत हिस्सा
ZKTOR ने क्रिएटर इकॉनमी को भी अपने प्लेटफॉर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। कंपनी के अनुसार, निर्धारित नियमों के तहत कंटेंट से होने वाली कमाई का 70 प्रतिशत हिस्सा क्रिएटर्स को दिया जाएगा।
कंपनी का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर क्रिएटर्स अपने पेज, चैनल और कंटेंट का सेटअप तैयार कर सकते हैं और डिजिटल कंटेंट के जरिए कमाई के अवसर हासिल कर सकते हैं।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में पेश की तकनीकी व्यवस्था

नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित कार्यक्रम में सॉफ्टा के सीईओ सुनील कुमार सिंह ने ZKTOR के 1 मिलियन+ यूजर्स के आंकड़े, महिला एवं बाल शिकायत विंग की व्यवस्था और प्लेटफॉर्म से जुड़े तकनीकी साक्ष्य मीडिया के सामने पेश किए।
सिंह ने सोशल मीडिया के साथ निजी संवाद, सर्च, स्थानीय कारोबार और छोटे उद्यमों को एक ही डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ने की योजना भी प्रस्तुत की। उनके अनुसार, इस इकोसिस्टम में सोशल सुपर-ऐप ZKTOR के अलावा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेंजर SNDESH, साक्ष्य-आधारित सर्च इंजन KHOZU.com, हाइपरलोकल ई-कॉमर्स मॉडल EZOWM और MSME के लिए ऑल-इन-वन बिजनेस सूट ZWATO शामिल हैं।
कंपनी के अनुसार, इन सभी सॉफ्टवेयर का साझा आधार Privacy and Data Safety by Design है।
12 वर्षों के शोध से तैयार किया इकोसिस्टम
सुनील कुमार सिंह के अनुसार, इस डिजिटल इकोसिस्टम को तैयार करने में करीब 12 वर्षों का शोध और मेहनत लगी है। उनका कहना है कि अब यह मॉडल दक्षिण एशिया के अन्य देशों तक विस्तार ले रहा है।
सिंह के मुताबिक, इस परियोजना के निर्माण के लिए भारत सरकार, यूरोपीय संघ या फिनलैंड सरकार से कोई अनुदान नहीं लिया गया। उन्होंने विदेशी वेंचर कैपिटल (VC) से फंड लेने से भी इनकार किया है।
बाहरी निवेश को लेकर पूछे गए सवाल पर सिंह ने कहा कि कंपनी निवेश के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह ऐसे बाहरी दबाव और जल्द मुनाफे की मजबूरी से बचना चाहती है, जिससे यूजर्स के डेटा और प्राइवेसी से जुड़ी नीतियों पर किसी तरह का समझौता करना पड़े।
कम लागत वाले ऑपरेटिंग मॉडल पर जोर
कंपनी ने अपने विस्तार के लिए कम लागत और आत्मनिर्भर संचालन मॉडल पर जोर दिया है। सिंह के नेतृत्व में तैयार इस मॉडल को ISRO से प्रेरित लो-कॉस्ट ऑपरेटिंग मॉडल बताया गया है।
सिंह के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए कंपनी बड़ी टेक कंपनियों की तुलना में 7 से 8 गुना कम खर्च में संचालन करने में सक्षम हो सकती है। कंपनी का लक्ष्य कम लागत में तकनीकी क्षमता विकसित करने और लंबे समय तक टिकाऊ कारोबार तैयार करने का है।
सुरक्षित और आत्मनिर्भर डिजिटल इकोसिस्टम का लक्ष्य
ZKTOR के अनुसार, उसका दीर्घकालिक उद्देश्य भारत की तकनीकी क्षमता को मजबूत करते हुए क्षेत्रीय स्तर पर एक ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना है, जिसमें प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा, महिलाओं की ऑनलाइन आजादी और क्रिएटर्स की कमाई को एक साथ महत्व दिया जाए।
सुनील कुमार सिंह ने भारत की तकनीकी सॉफ्ट पावर और वैश्विक भूमिका को मजबूत करने की दिशा में क्षेत्रीय विस्तार को महत्वपूर्ण बताया। कंपनी का कहना है कि यूजर्स के डेटा से समझौता किए बिना स्थानीय तकनीकी क्षमता और डिजिटल उद्यमिता को बढ़ावा देना उसके मॉडल की प्रमुख प्राथमिकता है।

Stay Updated with Dainik India 24×7!
Follow us for real-time updates:




