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भोपाल के RIE के डॉ. रजत और मनीष की ‘आठ पहर’ डिजिटल क्लॉक को डिजाइन पेटेंट

भारतीय पारंपरिक समय-ज्ञान और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम, गणितीय शिक्षा और एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग में उपयोगी हो सकती है ‘आठ पहर’ डिजिटल वॉल क्लॉक

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भोपाल, संवाददाता

भारतीय पारंपरिक समय-गणना को आधुनिक तकनीक और शिक्षा से जोड़ने वाली एक अनूठी ‘आठ पहर’ डिजिटल वॉल क्लॉक को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से डिजाइन पेटेंट मिला है। यह नवाचार भारतीय ज्ञान परंपरा, गणितीय शिक्षा और आधुनिक डिजिटल तकनीक के बीच एक नया सेतु तैयार करने का प्रयास है।

इस अभिनव डिजिटल वॉल क्लॉक का डिजाइन क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (REE), भोपाल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजत कौशिक, मनीष कुशवाहा और उनके सहयोगी विवेक यादव के नाम दर्ज है। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने 8 सितंबर को इसके लिए रजिस्टर्ड डिजाइन नंबर 494340-001 के साथ पेटेंट सर्टिफिकेट जारी किया। यह डिजाइन क्लास 10-01 के अंतर्गत ‘DIGITAL WALL CLOCK’ के लिए पंजीकृत किया गया है।

भारतीय ‘आठ पहर’ की अवधारणा को डिजिटल रूप

‘आठ पहर’ भारतीय पारंपरिक समय-विभाजन की प्राचीन अवधारणा है। दिन और रात के समय को अलग-अलग पहरों में विभाजित कर समय को समझने की यह परंपरा भारतीय ज्ञान प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इसी पारंपरिक अवधारणा को आधुनिक डिजिटल वॉल क्लॉक के डिजाइन में प्रस्तुत करना इस नवाचार की प्रमुख विशेषता है।

डॉ. रजत कौशिक और मनीष कुशवाहा के अनुसार, इस डिजाइन का उद्देश्य केवल समय बताने वाली एक डिजिटल घड़ी तैयार करना नहीं है, बल्कि भारतीय पारंपरिक समय-ज्ञान को आधुनिक तकनीक और शिक्षण के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।

विद्यार्थियों के लिए गणितीय शिक्षा का नया माध्यम

डिजिटल क्लॉक का यह डिजाइन विद्यार्थियों को पारंपरिक समय-विभाजन, गणितीय गणनाओं और आधुनिक समय-प्रणाली के बीच संबंध समझाने में उपयोगी हो सकता है। इसके जरिए एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और गणितीय अवधारणाओं को व्यावहारिक तरीके से समझाने के लिए शैक्षिक गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं।

डिजाइनरों का मानना है कि यह नवाचार विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को समय की गणितीय समझ विकसित करने के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराने में सहायक हो सकता है।

भारतीय ज्ञान परंपरा और नई शिक्षा नीति से जुड़ाव

‘आठ पहर’ डिजिटल वॉल क्लॉक को भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुभवात्मक शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने वाले शैक्षिक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। डिजाइनरों के अनुसार, इस तरह के शैक्षिक उपकरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा, अनुभवात्मक शिक्षा और नवाचार पर दिए गए जोर के अनुरूप नए शिक्षण संसाधनों के विकास का आधार बन सकते हैं।

इस डिजाइन को पेटेंट मिलने से भारतीय पारंपरिक अवधारणाओं पर आधारित नए शैक्षणिक उपकरणों के विकास को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। साथ ही, शिक्षक और शोधकर्ता पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए ऐसे और प्रयोग कर सकते हैं।

परंपरा और तकनीक के मेल की नई मिसाल

‘आठ पहर’ डिजिटल वॉल क्लॉक को मिले डिजाइन पेटेंट ने भारतीय पारंपरिक समय-ज्ञान को आधुनिक डिजिटल तकनीक के साथ जोड़ने वाले एक अभिनव प्रयोग को औपचारिक पहचान दी है। यह पहल आने वाले समय में गणितीय शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में नए शैक्षिक प्रयोगों का आधार बन सकती है।

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