उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर पर आधारित फोटो जर्नलिस्ट आशीष शर्मा की पुस्तक का विमोचन किया
‘रिइमैजिनिंग जम्मू एंड कश्मीरः ए पिक्टोरियल जर्नी’ पुस्तक का लोकार्पण और फोटो प्रदर्शनी का आयोजन

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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के कला निधि प्रभाग द्वारा 16 जून 2025, सोमवार को ‘रिइमैजिनिंग जम्मू एंड कश्मीरः ए पिक्टोरियल जर्नी’ पुस्तक का लोकार्पण एवं इस पर चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर इसी शीर्षक से एक विशेष फोटो प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जो 16 से 25 जून 2025 तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चित्रदीर्घा दर्शनम्-1 में दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जम्मू-कश्मीर के माननीय उपराज्यपाल मनोज सिन्हा थे, जबकि अध्यक्षता आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का उद्घाटन संबोधन आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने किया
तथा स्वागत भाषण एवं परिचय कलानिधि प्रभाग के प्रमुख प्रो. रमेश चंद्र गौड़ ने प्रस्तुत किया।
यह पुस्तक प्रसिद्ध फोटो जर्नलिस्ट आशीष शर्मा द्वारा लिखी गई है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, स्मार्ट सिटी पहल, कृषि, हस्तशिल्प और आध्यात्मिक स्थलों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

अपने संबोधन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 5 अगस्त 2019 और 6 जून 2025 की ऐतिहासिक तिथियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वो दिन हैं जब जम्मू-कश्मीर ने भारत के साथ पूरी तरह एकीकरण का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक बीते पांच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में हुए बदलावों की साक्ष्य आधारित प्रस्तुति है। उन्होंने पहलगाम आतंकी घटना (22 अप्रैल 2025) की चर्चा करते हुए कहा कि पहली बार स्थानीय लोगों ने स्वतःस्फूर्त होकर आतंकी हिंसा का विरोध किया, जो राज्य में बदलती सोच का प्रमाण है।

आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि यह पुस्तक सिर्फ एक फोटोग्राफिक एल्बम नहीं, बल्कि बदलते कश्मीर की गाथा है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस पुस्तक को ई-बुक और एक संक्षिप्त संस्करण में भी प्रकाशित किया जाए ताकि यह अधिक लोगों तक पहुंचे।

विशिष्ट अतिथि मीनाक्षी लेखी ने कहा कि कश्मीर भारत के हर नागरिक से आत्मिक रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इस पुस्तक में प्रकाशित लाल चौक की उस तस्वीर का विशेष उल्लेख किया जिसमें महिलाएं रात में सेल्फी लेती नजर आ रही हैं – यह बदलते कश्मीर की प्रतीकात्मक तस्वीर है।

डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने इस पुस्तक को “कागज पर नहीं, हृदय पर लिखी गई पुस्तक” बताते हुए इसे एक भावनात्मक यात्रा करार दिया। लेखक आशीष शर्मा ने इसे अपनी व्यक्तिगत यात्रा और जम्मू-कश्मीर के लोगों को समर्पित बताया।
पुस्तक का सार
‘रिइमैजिनिंग जम्मू एंड कश्मीर’ पुस्तक का उद्देश्य राज्य के बदलते स्वरूप, उसकी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करना है। लेखक स्वयं कश्मीरी हैं और उन्होंने दशकों तक संघर्ष व बदलावों को करीब से देखा है। इस कॉफी टेबल बुक में श्रीनगर और जम्मू की स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, आधुनिक अवसंरचना, कृषि, हस्तशिल्प, पुनर्जीवित सार्वजनिक स्थल, कश्मीरियत की नई ऊर्जा और प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों की मनमोहक झलक मिलती है।
इस आयोजन के माध्यम से कला प्रेमियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को जम्मू-कश्मीर की विविध छवियों और अनुभवों से अवगत होने का अनूठा अवसर प्राप्त हुआ।
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