देश (National)बहुत खूब

PM द्वारा “प्रधानमंत्री विश्वकर्मा” नाम से एक नई योजना का शुभारंभ हुआ

इस योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, कला और शिल्प जैसी सदियों पुरानी परंपरा, संस्कृति और विविध विरासत को जीवित और समृद्ध बनाए रखा जा सकता है

👆भाषा ऊपर से चेंज करें

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने विश्वकर्मा जयंती और अपने जन्मदिन के अवसर पर नई दिल्ली के द्वारका में स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर में “प्रधानमंत्री विश्वकर्मा” नाम से एक नई योजना का शुभारंभ किया।
      वंही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने द्वारका में इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर में “प्रधानमंत्री विश्वकर्मा” योजना के तहत विभिन्न कलाकारों और शिल्पकारों को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा प्रमाण पत्र भी वितरित किए और कलाकारों और शिल्पकारों से प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत कर उनको इस योजना से होने वाले लाभ के बारे में बताया।
      प्रधानमंत्री का पारंपरिक शिल्प में लगे लोगों को सहायता प्रदान करने पर निरंतर ध्‍यान केन्द्रित रहा है। इस योजना के माध्यम से कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सहायता प्रदान कि जाएगी। इस योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, कला और शिल्प जैसी सदियों पुरानी परंपरा, संस्कृति और विविध विरासत को जीवित और समृद्ध बनाए रखा जा सकता है।
     प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को 13,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित किया जाएगा। इस योजना के तहत, बायोमेट्रिक आधारित प्रधानमंत्री विश्वकर्मा पोर्टल का उपयोग करके सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से विश्वकर्माओं का निःशुल्क पंजीकरण किया जाएगा। उन्हें प्रधानमंत्री विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान-पत्र, मूलभूत और उन्नत प्रशिक्षण से जुड़े कौशल उन्नयन, 15,000 रुपये का टूलकिट प्रोत्साहन, 5 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 1 लाख रुपये (पहली किश्त) और 2 लाख रुपये (दूसरी किश्त) तक संपार्श्विक-मुक्त ऋण सहायता, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता के माध्यम से मान्यता प्रदान की जाएगी।
     प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा या अपने हाथों और औजारों से काम करने वाले विश्वकर्माओं द्वारा पारंपरिक कौशल के परिवार-आधारित प्रथा को सुदृढ़ बनाना और पोषित करना है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का मुख्य फोकस कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की पहुंच के साथ-साथ गुणवत्ता में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि वे घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत हों।
     इस योजना के माध्यम से पूरे भारत में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा के अंतर्गत 18 पारंपरिक शिल्पों को शामिल किया गया है।
इनमें (i) बढ़ई; (ii) नौका निर्माता; (iii) शस्‍त्रसाज; (iv) लोहार; (v) हथौड़ा और टूल किट निर्माता; (vi) ताला बनाने वाला; (vii) सुनार; (viii) कुम्हार; (ix) मूर्तिकार, पत्थर तोड़ने वाला; (x) मोची (जूता/जूता कारीगर); (xi) राजमिस्त्री; (xii) टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता/कॉयर बुनकर; (xiii) गुड़िया और खिलौना निर्माता (पारंपरिक); (xiv) नाई; (xv) माला बनाने वाला; (xvi) धोबी; (xvii) दर्जी; और (xviii) मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले शामिल हैं।
-ओम कुमार
Tags

Related Articles

Back to top button
Close